कुतूहल अध्याय 7 द्रव्य की कणीय प्रकृति के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

प्रत्येक द्रव्य अत्यंत सूक्ष्म घटक कणों की बहुत बड़ी संख्या से बना होता है। ये कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें किसी सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं देखा जा सकता। तोड़ने या पीसने से ये कण नहीं बदलते — केवल कणों का एक समूह दूसरे समूह से पृथक होता है। कण परस्पर आकर्षण बलों द्वारा जुड़े रहते हैं जिन्हें अंतराकणीय आकर्षण कहते हैं। इनकी प्रबलता पदार्थ की प्रकृति एवं अंतराकणीय दूरी पर निर्भर करती है — दूरी में अल्प वृद्धि भी इन बलों को अत्यधिक कम कर देती है। इन्हीं बलों की प्रबलता भौतिक अवस्था निर्धारित करती है। ठोस में कण सुसंकुलित होते हैं, आकर्षण प्रबलतम होता है और कण केवल अपनी नियत स्थिति पर कंपन कर सकते हैं — अत: निश्चित आकृति और निश्चित आयतन। द्रव में आकर्षण कुछ दुर्बल होता है, कण सीमित स्थान के भीतर गति करते हैं — निश्चित आयतन, परंतु आकृति निश्चित नहीं। गैस में आकर्षण नगण्य होता है और कण स

  1. खोजबीन और विचार करें
  2. पाठ्य प्रश्न
  3. क्रियाकलाप 7.1
  4. पाठ्य प्रश्न
  5. क्रियाकलाप 7.2
  6. पाठ्य प्रश्न
  7. हमारी वैज्ञानिक परंपरा
  8. पाठ्य प्रश्न
  9. क्रियाकलाप 7.3
  10. पाठ्य प्रश्न
  11. पाठ्य प्रश्न
  12. पाठ्य प्रश्न
  13. पाठ्य प्रश्न
  14. क्रियाकलाप 7.6
  15. क्रियाकलाप 7.7
  16. पाठ्य प्रश्न
  17. पाठ्य प्रश्न
  18. क्रियाकलाप 7.8
  19. वैज्ञानिक की भाँति सोचें
  20. पाठ्य प्रश्न
  21. क्रियाकलाप 7.9
  22. पाठ्य प्रश्न
  23. जिज्ञासा बनाए रखें
  24. खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें
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