प्र1.
क्या गैसों का एक निश्चित आयतन भी होता है?
उत्तर
नहीं। गैस का न आयतन निश्चित होता है और न आकृति — वह दोनों अपने पात्र से लेती है।
क्रियाकलाप 7.5 इसे प्रत्यक्ष दिखाता है। धुआँ केवल गैस जार ‘अ’ में एकत्रित किया जाता है। जब गैस जार ‘ब’ को उसके ऊपर रखकर काँच का ढक्कन हटाया जाता है तो धुआँ स्वयं फैलकर गैस जार ‘ब’ के संपूर्ण स्थान को भी भर देता है (चित्र 7.7, घ)। किसी ने उसे वहाँ धकेला नहीं; वह स्वयं गया।
कारण यह है कि गैस में कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से गति करते हैं और अंतराकणीय आकर्षण नगण्य होते हैं। कणों को रोकने वाला कुछ नहीं है, अत: वे तब तक फैलते जाते हैं जब तक संपूर्ण उपलब्ध स्थान घिर न जाए।
प्रमाण का दूसरा भाग: क्रियाकलाप 7.6 यही बात उलटी ओर से दिखाता है। सिरिंज में बंद वायु को प्लंजर दबाकर बहुत कम आयतन में संपीडित किया जा सकता है। जो गैस बड़े स्थान को भी भर दे और छोटे में भी समा जाए, उसका अपना निश्चित आयतन स्पष्टत: है ही नहीं।
तरल: द्रव और गैस दोनों प्रवाहित होते हैं और अपनी आकृति नहीं बनाए रखते, इसलिए दोनों को एक साथ तरल कहा जाता है — यही गुणधर्म इन्हें ठोस पदार्थों से विभेदित करता है।