अंतराकणीय स्थान ही सब कुछ निर्धारित करता है, क्योंकि यही स्थान अंतराकणीय दूरी है — और आकर्षण की प्रबलता इसी दूरी पर निर्भर करती है, जो दूरी बढ़ते ही अत्यधिक घट जाती है।
अत: एक ही राशि दो बातें एक साथ नियंत्रित करती है: कण कितनी प्रबलता से बँधे हैं, और वे कितनी स्वतंत्रता से गति कर सकते हैं। यही दोनों मिलकर पदार्थ की आकृति, आयतन और संपीड्यता तय करते हैं।
| अवस्था | अंतराकणीय स्थान | उससे बनने वाला आकर्षण | उससे बनने वाले गुणधर्म |
|---|---|---|---|
| ठोस | न्यूनतम | अधिकतम | आकृति और आयतन निश्चित; कण केवल कंपन करते हैं; व्यावहारिक रूप से असंपीड्य |
| द्रव | ठोस से कुछ अधिक | ठोस से कुछ दुर्बल | आयतन निश्चित, आकृति निश्चित नहीं; कण सीमित स्थान में गति करते हैं; व्यावहारिक रूप से असंपीड्य |
| गैस | अधिकतम | न्यूनतम (नगण्य) | न आकृति निश्चित, न आयतन; कण संपूर्ण उपलब्ध स्थान में गति करते हैं; सरलता से संपीडित |