घुलने पर चीनी के छोटे-छोटे कण परस्पर पृथक हो जाते हैं और जल के कणों के बीच उपलब्ध स्थानों में चले जाते हैं। इन स्थानों का नाम है — अंतराकणीय स्थान।
दो अलग-अलग अवलोकन एक ही उत्तर की ओर संकेत करते हैं:
स्वाद (क्रियाकलाप 7.2): संपूर्ण विलयन मीठा है, अत: चीनी के कण पूरे जल में फैले हुए हैं।
आयतन (क्रियाकलाप 7.7): चीनी घुलने पर जलस्तर चिह्न ‘ब’ से घटकर ‘स’ पर आ जाता है। विलयन जल और चीनी के अलग-अलग आयतनों के योग से कम स्थान घेरता है — यह तभी संभव है जब चीनी उस स्थान में समा गई हो जो पहले से विद्यमान था।
चिह्न ‘ब’ से जलस्तर नीचे क्यों आ जाता है — घुले हुए कणों को अपने लिए नया स्थान नहीं चाहिए; वे जल के कणों के बीच पहले से विद्यमान स्थानों में चले जाते हैं, इसलिए विलयन का आयतन जल और चीनी के आयतनों के योग से कम होता है।
प्र2.
चॉक और चीनी दोनों को उनके घटक कणों में तोड़ा जा सकता है परंतु इनके जिन ठोस टुकड़ों को हम देखते हैं उनमें ये घटक कण परस्पर किस प्रकार जुड़े होते हैं?
उत्तर
कणों के बीच लगने वाले आकर्षण बलों द्वारा, जिन्हें अंतराकणीय आकर्षण कहते हैं।
अध्याय इन बलों के विषय में तीन बातें बताता है और तीनों महत्वपूर्ण हैं:
ये बल प्रकृति में आकर्षी हैं — ये कणों को एक-दूसरे की ओर खींचते हैं और इसीलिए चॉक का टुकड़ा एक वस्तु के रूप में बना रहता है।
इनकी प्रबलता पदार्थ की प्रकृति एवं अंतराकणीय दूरी पर निर्भर करती है। कणों की दूरी में अल्प वृद्धि भी इन बलों को अत्यधिक कम कर देती है।
इन बलों की प्रबलता ही अंतत: पदार्थ की भौतिक अवस्था निर्धारित करती है — ठोस, द्रव अथवा गैस।
ठोस चॉक और ठोस चीनी में ये बल इतने प्रबल होते हैं कि प्रत्येक कण अपनी नियत स्थिति पर बँधा रहता है। इसी कारण चॉक के टुकड़े की आकृति और आयतन निश्चित होते हैं और उसे उँडेला नहीं, बलपूर्वक तोड़ा जाता है।
आगे की ओर देखिए: यही एक वाक्य — दूरी बढ़ते ही बल का अत्यधिक घट जाना — शेष पूरे अध्याय की व्याख्या कर देता है। ठोस को गरम कीजिए, कण थोड़ा दूर हो जाते हैं, बल टूट जाता है, और ठोस पिघल जाता है।
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