प्र1.
क्या आप जानते हैं कि प्राचीनकाल से लोग इस विषय पर विचार कर रहे हैं कि वस्तुओं को किस सीमा तक तोड़ा जा सकता है एवं द्रव्य का निर्माण किससे हुआ है?
उत्तर
हाँ। भारत में यह प्रश्न बहुत पहले प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य कणाद ने उठाया था, जिन्होंने सर्वप्रथम परमाणु की अवधारणा के विषय में चर्चा की।
- उनके अनुसार द्रव्य का निर्माण सूक्ष्म, अविभाज्य एवं शाश्वत कणों से हुआ है जिन्हें परमाणु कहा जाता है।
- यह विचार उनके वैशेषिक सूत्र नामक ग्रंथ में वर्णित है।
ध्यान दीजिए कि उनका प्रश्न आपके प्रश्न से कितना मिलता है। क्रियाकलाप 7.1 ठीक वही पूछता है जो उन्होंने पूछा था — किसी वस्तु को तोड़ते जाइए, तो क्या यह तोड़ना कभी रुकना ही चाहिए? उन्होंने केवल तर्क से उत्तर दिया; आज वही निष्कर्ष प्रयोगों से भी समर्थित है — चीनी का घुलना, वायु का संपीडित होना और स्थिर जल में रंग का स्वयं फैल जाना।
आधुनिक वर्णन कहाँ भिन्न है: यह अध्याय सावधानी से केवल इतना कहता है कि घटक कण उस पदार्थ की सबसे छोटी इकाइयाँ हैं। यह यह दावा नहीं करता कि उनके भीतर कभी कुछ नहीं मिलेगा। वे कण क्या हैं — परमाणु और अणु — यह पृष्ठ 115 के एक सोपान ऊपर में संकेतित है और उच्च कक्षाओं में विस्तार से पढ़ा जाता है।