कुतूहल अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ठोस पदार्थों में घटकों के कण परस्पर किस प्रकार जुड़े हुए होते हैं?
उत्तर

अत्यंत दृढ़ता से। ठोस में कण सुसंकुलित होते हैं और अंतराकणीय आकर्षण बल अत्यंत प्रबल होते हैं।

ये प्रबल बल प्रत्येक कण को उसकी नियत स्थिति पर रखते हैं। कण गति तो कर सकता है — परंतु केवल अपनी स्थिति के आस-पास इधर-उधर, जिसे कंपन अथवा दोलन कहते हैं। वह अपने पड़ोसी कणों के पास से होकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जा सकता।

यही एक तथ्य क्रियाकलाप 7.3 के सभी प्रेक्षणों की व्याख्या कर देता है:

  • प्रत्येक वस्तु की आकृति निश्चित है, क्योंकि प्रत्येक कण अपने स्थान पर बँधा है।
  • प्रत्येक वस्तु का आयतन निश्चित है, क्योंकि कण उतने ही पास-पास हैं जितना उनके आकर्षण बल उन्हें रख सकते हैं।
  • हथौड़े से पीटने पर वस्तु में गड्ढा पड़ सकता है या वह टूट सकती है, परंतु ठोस जल की भाँति कभी प्रवाहित नहीं होता।
प्र2.
क्या ठोस अवस्था में इन कणों को पृथक करने का कोई उपाय है?
उत्तर

हाँ — ठोस को गरम कीजिए। बस इतना ही आवश्यक है।

ऊष्मा दी गई कणों की ऊष्मीय ऊर्जा बढ़ती है
→ कंपन अधिक तीव्र हो जाते हैं (चित्र 7.4, ख)
→ कण अपनी नियत स्थिति छोड़ने लगते हैं
→ अंतराकणीय दूरी बढ़ती है, अत: आकर्षण बल दुर्बल हो जाते हैं
→ ठोस द्रव में परिवर्तित हो जाता है (चित्र 7.4, ग)

जिस तापमान पर ऐसा होता है वह उस ठोस का गलनांक कहलाता है — अधिक ठीक कहें तो, वायुमंडलीय दाब पर वह न्यूनतम तापमान जिस पर कोई ठोस पिघलकर द्रव में परिवर्तित होता है।

गरम करना पर्याप्त क्यों है: दूरी में अल्प वृद्धि होते ही अंतराकणीय बल अत्यधिक कम हो जाता है। अत: जैसे ही कंपन इतने बड़े हो जाते हैं कि कण थोड़ा-सा दूर खिसक जाएँ, आकर्षण बल शीघ्र ही ढह जाते हैं और कण इधर-उधर गति करने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
गलन का अर्थ यह नहीं है: कण स्वयं न पिघलते हैं, न नरम होते हैं, न फूलते हैं और न किसी प्रकार बदलते हैं। बदलते केवल उनके अंतराकणीय स्थान और उनकी गति हैं। बर्फ और जल ठीक एक ही प्रकार के कणों से बने हैं।
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