क्योंकि पत्थर और रेत का प्रत्येक कण ठोस है जबकि जल द्रव है — और यह अंतर पूर्णतः इस बात पर निर्भर करता है कि उनके घटक कण कितनी प्रबलता से परस्पर जुड़े हैं।
प्रत्येक पत्थर और रेत के प्रत्येक दाने के भीतर कण सुसंकुलित होते हैं तथा अंतराकणीय आकर्षण बल अत्यंत प्रबल होते हैं। ये बल प्रत्येक कण को उसकी नियत स्थिति पर रखते हैं, अत: प्रत्येक दाना अपनी निश्चित आकृति बनाए रखता है और नीचे वाले दानों पर बिना दबे टिका रह सकता है। दाना दाने पर टिकता है और ढेर खड़ा रहता है।
जल में अंतराकणीय आकर्षण बल बहुत दुर्बल होते हैं। इसके कण एक-दूसरे के पास से होकर गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, अत: जल की कोई परत अपने ऊपर वाली परत को सँभाल नहीं सकती। ढेर लगाने का प्रयास करते ही नीचे के कण किनारों की ओर सरक जाते हैं और जल फैलकर समतल हो जाता है।