कुतूहल अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने विचार किया कि ये कंकड़, पत्थर और रेत कहाँ से आते हैं?
उत्तर

ये पर्वतों की चट्टानों से आते हैं।

पर्वतों में अपरदन के कारण चट्टानें धीरे-धीरे टूटती रहती हैं। इन पर्वतों से बहने वाली नदियाँ इन अपरदित टुकड़ों को अपने साथ बहा ले जाती हैं और बहते-बहते उन्हें और तोड़ती जाती हैं — पहले कंकड़, फिर पत्थर, फिर रेत — और उनकी वृहत मात्रा को मैदानों तक पहुँचा देती हैं। नदी या समुद्र के किनारे जो कंकड़ आप उठाते हैं वे लंबी यात्रा कर चुकी चट्टानों के छोटे, गोल अवशेष हैं।

इस अध्याय के लिए इसका महत्व: यह सब केवल भौतिक परिवर्तन है। रेत का दाना उसी पदार्थ का बना है जिसकी वह चट्टान थी — टूटने से टुकड़ों का आकार बदला है, उनका पदार्थ नहीं। ठीक यही विचार क्रियाकलाप 7.1 चॉक के टुकड़े से जाँचता है।
प्र2.
क्या ये कण किसी बड़ी चट्टान की सबसे छोटी इकाई है या रेत और मिट्टी के इन कणों को और भी तोड़ा जा सकता है?
उत्तर

ये सबसे छोटी इकाई नहीं हैं — रेत और मिट्टी के इन कणों को और भी तोड़ा जा सकता है।

चॉक के टुकड़े की भाँति ही रेत का प्रत्येक दाना स्वयं घटक कणों की एक वृहत संख्या से बना होता है। पीसने पर वह केवल और महीन दानों में बँट जाता है और प्रत्येक महीन दाना भी उतने ही असंख्य कणों से बना रहता है। यदि पीसने की यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहे तो अंततः एक ऐसी स्थिति आएगी जब टुकड़ों को और अधिक तोड़ा नहीं जा सकेगा; वही इकाइयाँ उस पदार्थ की सबसे छोटी इकाइयाँ हैं।

पैमाने का ध्यान रखिए: आवर्धक लेंस से मुश्किल से दिखाई देने वाला रेत का कण भी किसी घटक कण की तुलना में विशाल है। घटक कणों को किसी सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं देखा जा सकता।
प्र3.
क्या चॉक के इस महीन चूर्ण का प्रत्येक कण अभी भी उसी पदार्थ का बना हुआ है या यह तोड़ने या पीसने पर किसी और पदार्थ में परिवर्तित हो गया है?
उत्तर

प्रत्येक कण अभी भी उसी पदार्थ — चॉक — का ही बना है। कोई नया पदार्थ नहीं बना।

आवर्धक लेंस से चूर्ण देखिए (चित्र 7.1, घ): प्रत्येक सूक्ष्म कण उतना ही सफ़ेद और चॉक जैसा है जितना वह पूरा टुकड़ा था जिससे आपने आरंभ किया था। तोड़ने और पीसने से चॉक के घटक कणों का एक समूह दूसरे समूह से केवल पृथक होता है। कण स्वयं अछूते रहते हैं — वे न कटते हैं, न बदलते हैं और न किसी अन्य पदार्थ में परिवर्तित होते हैं।

ऐसा क्यों होता है: किसी पदार्थ के गुणधर्म उसके कणों के प्रकार से आते हैं। जब तक कण अपरिवर्तित हैं, पदार्थ भी अपरिवर्तित रहेगा, चाहे आप टुकड़े कितने ही छोटे कर लें। इसी कारण पीसना एक भौतिक परिवर्तन है।
प्र4.
कक्षा 7 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय ‘हमारे आस-पास के परिवर्तन— भौतिक एवं रासायनिक’ का पुनः स्मरण कीजिए। चॉक को पीसना एक भौतिक परिवर्तन है या रासायनिक परिवर्तन?
उत्तर

यह एक भौतिक परिवर्तन है।

कोई परिवर्तन रासायनिक तभी होता है जब नए गुणधर्मों वाला कोई नया पदार्थ बने। चॉक को पीसने पर कुछ भी नया नहीं बनता: चूर्ण चॉक ही है, दिखने में चॉक जैसा, स्पर्श में चॉक जैसा और व्यवहार में भी चॉक जैसा। बदलता केवल यह है कि प्रत्येक कण का आकार और छोटा होता जाता है।

जाँचने की कसौटी: स्वयं से पूछिए — "परिवर्तन के बाद वाला पदार्थ वही पदार्थ है या नहीं?" चॉक पीसने में उत्तर ‘हाँ’ है, अत: परिवर्तन भौतिक है। इसकी तुलना मोमबत्ती के जलने या लोहे में जंग लगने से कीजिए, जहाँ उत्तर ‘नहीं’ होता है।
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