(घ) ठोस पदार्थों में सुसंकुलित होते हैं और द्रवों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं।
केवल यही कथन दोनों भागों में सही है। ठोस में कण दृढ़ता से संकुलित होते हैं और अत्यंत प्रबल आकर्षण बलों द्वारा नियत स्थितियों पर बँधे रहते हैं, अत: वे केवल कंपन कर सकते हैं। द्रव में आकर्षण कुछ दुर्बल और अंतराकणीय स्थान कुछ अधिक होता है, अत: कण एक-दूसरे के पास से होकर गति कर सकते हैं — इसीलिए आप जल में अँगुली घुमा सकते हैं, पत्थर में नहीं।
- (क) — पहला भाग सही है, परंतु द्रव के कण स्थिर कदापि नहीं होते; उन्हीं की गति पूरे गिलास में पोटैशियम परमैंगनेट को फैलाती है।
- (ख) — दोनों भाग उलटे हैं। ठोस के कण दूर नहीं, निकट होते हैं; और नियत स्थिति द्रवों में नहीं, ठोसों में होती है।
- (ग) — ठोस के कण एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते ही नहीं, और द्रव के कणों की कोई नियत स्थिति नहीं होती।