कुतूहल अध्याय 7 खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक बोतल के संकीर्ण भाग (बोतल के मुँह) पर एक गुब्बारा लगाइए एवं बोतल को गरम जल में रख दीजिए। इसके साथ ही जाँच कीजिए कि क्या होगा?
उत्तर

गुब्बारा स्वयं फूल जाएगा और बोतल के मुँह पर तनकर खड़ा हो जाएगा — जबकि आपने उसमें फूँक भी नहीं मारी।

कैसे करें। एक खाली, सूखी बोतल लीजिए और गुब्बारे के मुँह को उसकी गर्दन पर इतना कसकर चढ़ाइए कि कहीं से वायु न निकल सके। बोतल को गरम जल से भरे किसी बर्तन में इस प्रकार खड़ा कीजिए कि उसका अधिकांश भाग जल में डूबा रहे। एक-दो मिनट गुब्बारे को देखिए। फिर बोतल को निकालकर ठंडे जल में रखिए और पुन: देखिए।

आप क्या देखेंगे।

बोतल कहाँ रखी हैगुब्बारा
गरम जल मेंधीरे-धीरे फूलकर तन जाता है
इसके बाद ठंडे जल मेंपिचककर पुनः ढीला पड़ जाता है
ऐसा क्यों होता है: बोतल खाली नहीं है — वह वायु से भरी है, और वायु कणों से बना द्रव्य है। गरम जल उस वायु को ऊष्मा देता है, अत: उसके कणों की ऊष्मीय ऊर्जा बढ़ती है और वे तीव्रता से गति करने लगते हैं। गैस में अंतराकणीय आकर्षण नगण्य होते हैं, अत: तीव्र गति वाले कण और अधिक दूर-दूर फैलकर अधिक स्थान घेर लेते हैं। गैस का आयतन निश्चित नहीं होता, इसलिए वायु फैल जाती है और फैलने के लिए एकमात्र स्थान गुब्बारा ही है। बोतल को ठंडा कीजिए तो कण धीमे हो जाते हैं, वायु कम स्थान घेरती है और गुब्बारा बैठ जाता है।
परीक्षण निष्पक्ष रखिए: गुब्बारा गर्दन पर वायुरोधी होना चाहिए, अन्यथा वायु कार्य करने के स्थान पर बाहर निकल जाएगी। और ध्यान रखिए कि कोई नई वायु नहीं बनी — वही कण अधिक आयतन में फैल गए हैं।
सावधानी: उबलते जल के स्थान पर नल का या कुछ देर रखा हुआ गरम जल लीजिए और बर्तन किसी वयस्क की सहायता से ही सँभालिए।
प्र2.
मिट्टी से निर्मित गोलियों, मोतियों इत्यादि के उपयोग से ठोस पदार्थों, द्रवों और गैसों के कणों को निरूपित करते हुए अंतराकणीय स्थान को दर्शाता हुआ एक सामान्य प्रतिमान (मॉडल) अभिकल्पित कीजिए और उसका सृजन कीजिए।
उत्तर

विधि। सभी गोलियाँ एक ही आकार की बनाइए — यही सबसे महत्वपूर्ण नियम है, क्योंकि अवस्था बदलने पर कण नहीं बदलते; बदलते केवल उनका अंतराकणीय स्थान और उनकी गति हैं। तीन एक जैसी उथली ट्रे या डिब्बों के ढक्कन लीजिए ताकि तीनों प्रतिमानों की तुलना निष्पक्ष रहे।

प्रतिमानकैसे बनाएँक्या दर्शाना चाहिए
ठोसट्रे को एक ही आकार की मिट्टी की गोलियों से, नियमित पंक्तियों में लगभग स्पर्श करते हुए भर दीजिए और उन्हें चिपका दीजिए ताकि कोई हिल न सकेन्यूनतम अंतराकणीय स्थान, नियमित संकुलन, कण नियत स्थिति पर
द्रवउसी ट्रे में उतनी ही गोलियाँ रखिए, परंतु ढीली और अनियमित रूप से, बीच में कुछ अधिक रिक्त स्थान छोड़कर; उन्हें खिसकने के लिए स्वतंत्र रहने दीजिएठोस से कुछ अधिक स्थान, कोई नियत व्यवस्था नहीं, सीमित स्थान के भीतर गति
गैसट्रे में केवल चार-पाँच गोलियाँ, दूर-दूर रखिए और ट्रे को धीरे से हिलाइए ताकि वे पूरी ट्रे में लुढ़कती रहेंअधिकतम अंतराकणीय स्थान, स्वतंत्र गति, संपूर्ण उपलब्ध स्थान में फैलाव

नमूना प्रस्तुति। तीनों ट्रे पर ठोस, द्रव और गैस लिखिए और प्रत्येक के नीचे एक वाक्य: “आकर्षण प्रबलतम, स्थान न्यूनतम, केवल कंपन”; “आकर्षण कुछ दुर्बल, स्थान कुछ अधिक, सीमित स्थान में गति”; “आकर्षण नगण्य, स्थान अधिकतम, सभी दिशाओं में स्वतंत्र गति”

अपने प्रतिमान की स्वयं जाँच कीजिए। उससे तीन प्रश्न पूछिए: क्या तीनों ट्रे में गोलियाँ एक ही आकार की हैं? क्या रिक्त स्थान वास्तव में खाली हैं, उनमें कुछ भरा या बनाया हुआ नहीं? क्या ठोस वाली ट्रे में हल्के कंपन के अतिरिक्त कोई गति सचमुच संभव नहीं है? इनमें से किसी में भी विफल प्रतिमान गलत विचार सिखाएगा।
एक सीमा जो स्पष्ट कहनी चाहिए: वास्तविक घटक कण मिट्टी की गोलियों से कल्पनातीत रूप से सूक्ष्म होते हैं, रंगहीन होते हैं और कभी विराम नहीं लेते। प्रतिमान व्यवस्था और अंतराकणीय स्थान अच्छी तरह दिखा देता है; पैमाना और निरंतर गति वह नहीं दिखा सकता।
प्र3.
विभिन्न तापमानों पर ठोस पदार्थों, द्रवों एवं गैसों के कणों का अभिनय कीजिए और कणों की गति दर्शाते हुए किसी नाटक या नृत्य को प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर

विधि। पूरी कक्षा कण बन जाए और फर्श पात्र। चॉक या रस्सी से पात्र की सीमा बनाइए और तीनों दृश्यों में उसका आकार समान रखिए, ताकि जो बदले वह अंतराकणीय स्थान ही हो।

दृश्यकहाँ खड़े होंकैसे गति करें
ठोस, ठंडाकंधे से कंधा मिलाकर नियमित पंक्तियों में, चिह्नित क्षेत्र को भरते हुएपैर स्थिर; केवल अपने स्थान पर हल्का-सा हिलिए — पड़ोसी से स्थान कभी न बदलिए
ठोस को गरम करनावही पंक्तियाँ, वही स्थानढोल की गति बढ़ने के साथ अधिकाधिक ज़ोर से हिलिए, जब तक कुछ विद्यार्थी अपना स्थान छोड़ न दें
द्रवअब भी निकट, परंतु पंक्तियों में नहींधीरे-धीरे चलिए, एक-दूसरे के पास से निकलते हुए, चिह्नित क्षेत्र के भीतर ही रहिए
गैसदूर-दूर फैलकरतेज़ी से, सीधी दिशाओं में, सभी ओर चलिए — कक्ष की दीवारों तक; अब चॉक की सीमा लागू नहीं

सूत्रधार के लिए नमूना संवाद: “हम बर्फ के कण हैं। हमें हमारे पड़ोसियों ने कसकर थाम रखा है, हम केवल अपने स्थान पर काँप सकते हैं। ऊष्मा आ रही है … हम और ज़ोर से काँप रहे हैं … पकड़ टूटी, अब हम जल हैं — अब हम चल सकते हैं, पर साथ-साथ ही रहते हैं। और ऊष्मा … अब हम इतनी तेज़ी से चल रहे हैं कि निकल ही भागे। अब हम वाष्प हैं। हम पूरे कक्ष में भर गए हैं।”

केवल अवस्था नहीं, तापमान भी दिखाइए: गति ढोल या ताली से नियंत्रित कीजिए। तेज़ ताल = अधिक ऊष्मीय ऊर्जा = तीव्र गति वाले कण। यही एक युक्ति इस नृत्य को अध्याय का सही कथन बना देती है — ऊष्मा प्रदान करने पर कणों की गति बढ़ जाती है।
प्र4.
कक्षा में चर्चा कीजिए कि गैसें विस्तार कर सकती हैं और समस्त उपलब्ध स्थान को पूर्ण रूप से भर देती है। गैसों का यह गुणधर्म लाभदायक है या हानिकारक?
उत्तर

दोनों — यह गुणधर्म स्वयं में न अच्छा है, न बुरा। महत्व इस बात का है कि फैलने वाली गैस कौन-सी है और कहाँ फैल रही है। यही पक्ष रखने योग्य है, और दोनों ओर से तर्क उसी भौतिकी से आने चाहिए: गैस में अंतराकणीय आकर्षण नगण्य, अंतराकणीय स्थान अधिकतम और कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र होते हैं, अत: कहीं भी मुक्त हुई गैस तब तक फैलती है जब तक संपूर्ण उपलब्ध स्थान न घिर जाए।

लाभदायकहानिकारक
रसोई गैस के सिलिंडर का रिसाव दूसरे कमरे से ही सूँघ लिया जाता है — चेतावनी की गंध ख़तरे से पहले पहुँच जाती हैउसी रिसाव से स्वयं गैस भी पूरी रसोई में फैल जाती है, अत: एक चिंगारी पूरे कक्ष में आग लगा सकती है
सिलिंडर से ऑक्सीजन रोगी तक एकसमान रूप से पहुँचती है; शल्य कक्ष में निश्चेतक गैसें भी विश्वसनीय रूप से फैलती हैंवाहनों और कारखानों का धुआँ तथा हानिकारक गैसें चिमनी के पास नहीं ठहरतीं — वे पूरे नगर पर फैल जाती हैं
अगरबत्ती, कपूर या इत्र की सुगंध पूरे कक्ष अथवा मंदिर के कोने-कोने तक पहुँचती है (क्रियाकलाप 7.9)किसी कारखाने में गैस का रिसाव आस-पास की बस्तियों तक फैल सकता है, इससे पहले कि उसे रोका जा सके
वायु स्वयं निरंतर मिलती-जुलती रहती है, अत: ऑक्सीजन बिना किसी पंप के घर के हर कमरे तक पहुँचती हैपराली या कूड़ा जलाने का धुआँ उस खेत से बहुत दूर तक फैल जाता है जहाँ वह जलाया गया था

चर्चा कैसे कराएँ। कक्षा को दो भागों में बाँटिए। प्रत्येक पक्ष को (क) कोई वास्तविक स्थिति बतानी होगी, (ख) उसे अंतराकणीय स्थान, आकर्षण और कणों की गति के आधार पर समझाना होगा, तथा (ग) दूसरे पक्ष के किसी एक तर्क का उत्तर देना होगा। “गैसें ख़तरनाक होती हैं” या “गैसें उपयोगी होती हैं” जैसे अकेले वाक्य तर्क के रूप में स्वीकार मत कीजिए — प्रत्येक दावा कणीय मॉडल से जुड़ा होना चाहिए।

मिलकर पहुँचने योग्य निष्कर्ष: गैस को एक स्थान पर रुकने के लिए मनाया नहीं जा सकता, अत: उसे घेरकर रखना ही पड़ता है। इसीलिए रसोई गैस बंद सिलिंडरों में बेची जाती है, प्रयोगशालाओं में आयोडीन बंद जार में रखी जाती है (चित्र 7.8), कारखानों में चिमनियाँ और शोधक लगाए जाते हैं, और इसीलिए हमें कहा जाता है कि गैस के रिसाव को जलती हुई तीली से कभी न खोजें। हम गुणधर्म नहीं बदलते; हम उसे ध्यान में रखकर व्यवस्था बनाते हैं।
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