कक्षा ८ विज्ञान अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या इस प्रकार प्राप्त चॉक के सूक्ष्म कण चॉक की सबसे छोटी इकाइयाँ माने जा सकते हैं?
उत्तर

ओखल में प्राप्त कण नहीं — परंतु यह प्रक्रिया जिन इकाइयों तक ले जाती है, वे अवश्य हैं। इन दोनों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।

  • ओखल और मूसल से वास्तव में जो मिलता है वह चॉक का अत्यंत महीन चूर्ण है। इसका प्रत्येक कण अभी भी लाखों-लाखों घटक कणों से बना है। यह सबसे छोटी इकाई से कोसों दूर है।
  • पाठ आपसे यह कल्पना करने को कहता है कि पीसने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहे। अंततः एक ऐसी स्थिति आएगी जब कणों को और अधिक तोड़ा नहीं जा सकेगा। वही सूक्ष्म इकाइयाँ वे मूल निर्माण इकाइयाँ हैं जिनसे चॉक बना था — उसके घटक कण।
कल्पना की आवश्यकता क्यों: कोई ओखल वास्तव में उस स्थिति तक नहीं पहुँच सकती और वे कण किसी सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी दिखाई नहीं देते। हम उस विचार तक उसी से पहुँचते हैं जो हम देख सकते हैं — कि प्रत्येक कण, चाहे कितना भी महीन हो, चॉक ही रहता है।
यह मॉडल यहाँ क्या दावा नहीं करता: अध्याय यह नहीं कहता कि इन इकाइयों को किसी भी उपाय से कभी विभाजित नहीं किया जा सकता। यह कहता है कि ये चॉक की सबसे छोटी इकाइयाँ हैं — इन्हें विभाजित कर देने पर चॉक शेष नहीं रहेगा। ये किससे बनी हैं, यह उच्च कक्षाओं में पढ़ेंगे (देखिए एक सोपान ऊपर, पृष्ठ 115: परमाणु और अणु)।
प्र2.
चीनी को जल में घोलकर विलयन बनाने की प्रक्रिया को स्मरण करें। जब जल में चीनी को घोला जाता है तो क्या होता है?
उत्तर

चीनी अपने घटक कणों में टूट जाती है, ये कण परस्पर पृथक हो जाते हैं और जल के कणों के बीच के स्थानों में फैल जाते हैं।

चीनी का प्रत्येक छोटा दाना ऐसे ही लाखों-लाखों कणों से निर्मित होता है। जल उन्हें दाने से एक-एक कर बाहर खींच लेता है और वे जल में पहले से विद्यमान अंतराकणीय स्थानों में चले जाते हैं। ये कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं और अब पूरे द्रव में अलग-अलग बिखर चुके होते हैं, अत: चीनी का कोई दाना दिखाई नहीं देता।

चीनी न लुप्त हुई है और न नष्ट। विलयन का प्रत्येक चम्मच मीठा लगता है, अत: चीनी के कण उसमें सर्वत्र उपस्थित होने चाहिए।

प्र3.
क्या आपको विलयन में चीनी का कोई कण दिखाई दे रहा है?
उत्तर

नहीं — गिलास में कहीं भी एक भी कण दिखाई नहीं देता।

इसके दो कारण एक साथ काम करते हैं, और दोनों महत्वपूर्ण हैं:

  1. चीनी के घटक कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं — इतने कि उन्हें किसी सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं देखा जा सकता, नग्न आँखों की तो बात ही छोड़िए।
  2. अब वे किसी दाने में एक साथ संकुलित नहीं हैं। प्रत्येक कण पृथक होकर जल के अंतराकणीय स्थानों में जा चुका है, अत: दिखाई देने लायक कुछ शेष ही नहीं बचा।
फिर भी वे वहीं हैं: जल ऊपरी सतह पर भी उतना ही मीठा है जितना नीचे। जो प्रमाण देखने से नहीं मिलता वह स्वाद से मिल जाता है। किसी वस्तु का दिखाई न देना उसकी अनुपस्थिति का प्रमाण नहीं है — इस अध्याय में जब भी अदृश्य कणों की बात हो, यह बात स्मरण रखने योग्य है।
क्या यह उपयोगी रहा?