ओखल में प्राप्त कण नहीं — परंतु यह प्रक्रिया जिन इकाइयों तक ले जाती है, वे अवश्य हैं। इन दोनों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
- ओखल और मूसल से वास्तव में जो मिलता है वह चॉक का अत्यंत महीन चूर्ण है। इसका प्रत्येक कण अभी भी लाखों-लाखों घटक कणों से बना है। यह सबसे छोटी इकाई से कोसों दूर है।
- पाठ आपसे यह कल्पना करने को कहता है कि पीसने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहे। अंततः एक ऐसी स्थिति आएगी जब कणों को और अधिक तोड़ा नहीं जा सकेगा। वही सूक्ष्म इकाइयाँ वे मूल निर्माण इकाइयाँ हैं जिनसे चॉक बना था — उसके घटक कण।
कल्पना की आवश्यकता क्यों: कोई ओखल वास्तव में उस स्थिति तक नहीं पहुँच सकती और वे कण किसी सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी दिखाई नहीं देते। हम उस विचार तक उसी से पहुँचते हैं जो हम देख सकते हैं — कि प्रत्येक कण, चाहे कितना भी महीन हो, चॉक ही रहता है।
यह मॉडल यहाँ क्या दावा नहीं करता: अध्याय यह नहीं कहता कि इन इकाइयों को किसी भी उपाय से कभी विभाजित नहीं किया जा सकता। यह कहता है कि ये चॉक की सबसे छोटी इकाइयाँ हैं — इन्हें विभाजित कर देने पर चॉक शेष नहीं रहेगा। ये किससे बनी हैं, यह उच्च कक्षाओं में पढ़ेंगे (देखिए एक सोपान ऊपर, पृष्ठ 115: परमाणु और अणु)।