प्र1.
गैस के जिन कणों को हम नग्न आँखों से नहीं देख सकते हैं उनकी गति को हम कैसे दर्शा सकते हैं?
उत्तर
अप्रत्यक्ष रूप से — ऐसी वस्तु का अवलोकन करके जिसे हम देख या अनुभव कर सकते हैं और जिसे वे अदृश्य गैस-कण इधर-उधर धकेलते हैं।
अध्याय ऐसे तीन उपाय देता है:
| उपाय | हम क्या अनुभव कर सकते हैं | अदृश्य कणों के विषय में यह क्या दर्शाता है |
|---|---|---|
| गैस जारों में धुआँ (क्रियाकलाप 7.5) | जार ‘अ’ से जार ‘ब’ में फैलता धूसर धुआँ | वायु में निलंबित धुएँ के सूक्ष्म कणों से गैसों के अदृश्य कण टकराते हैं और उनकी गति हमें गैस-कणों की गति का अवलोकन करने में सहायता करती है |
| बंद गैस जार में आयोडीन वाष्प (चित्र 7.8) | पूरे जार को भरती बैंगनी वाष्प | गैस के कण सभी दिशाओं में गति करते हैं और संपूर्ण उपलब्ध स्थान घेर लेते हैं |
| जलती हुई अगरबत्ती (क्रियाकलाप 7.9) | कक्ष के दूसरे कोने तक पहुँचती सुगंध | वायु के कण निरंतर गति कर रहे हैं और सुगंध के कणों को पूरे कक्ष में फैला देते हैं |
यह प्रमाण क्यों माना जाता है: धुआँ स्वयं तैरता नहीं और सुगंध स्वयं चलती नहीं। कोई है जो उन्हें धकेल रहा है, जो कक्ष में सर्वत्र है और जो कभी रुकता नहीं। निरंतर गतिशील वायु-कण ही वह व्याख्या है जो इन सब बातों में ठीक बैठती है।