कुतूहल अध्याय 7 क्रियाकलाप 7.8

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप क्या देखते हैं?
उत्तर

बिना किसी विलोडन के रंग स्वयं पूरे जल में फैल जाता है।

  • आरंभ में — तली में पड़े पोटैशियम परमैंगनेट के दानों से गुलाबी रंग की पतली धारियाँ ऊपर और चारों ओर फैलती दिखाई देती हैं (चित्र 7.13, क)।
  • कुछ समय पश्चात — ये धारियाँ आपस में मिल जाती हैं और संपूर्ण जल एकसमान गुलाबी रंग का हो जाता है (चित्र 7.13, ख)।
सावधानी: पोटैशियम परमैंगनेट को अपने हाथों से न छुएँ। इसे डालने के लिए किसी चम्मच या स्पैचुला का उपयोग कीजिए।
प्र2.
क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि जल के कण निरंतर गति में रहते हैं। यह कार्य वे दो चरणों में करते हैं:

  1. गतिशील जल-कण पोटैशियम परमैंगनेट के कणों को उसके दाने से एक के बाद एक खींच लेते हैं
  2. फिर वे उन मुक्त कणों से बार-बार टकराकर उन्हें इधर-उधर धकेलते हैं, जब तक वे पूरे द्रव में न फैल जाएँ।

न कुछ विलोडित किया गया, न कुछ उँडेला गया। यह फैलाव पूर्णत: उन कणों का किया हुआ है जो वैसे भी, हर समय गति करते ही रहते हैं — चाहे आप देख रहे हों या नहीं।

रेत के साथ ऐसा क्यों नहीं होता: बहुत से पदार्थों में घटक कण इतनी प्रबलता से परस्पर जुड़े होते हैं कि जल के कण उन्हें दूर करने में असमर्थ रहते हैं। ऐसे पदार्थ — पुस्तक का उदाहरण रेत है — जल में अघुलनशील होते हैं। पहला चरण ही विफल हो जाता है, अत: दूसरा आरंभ ही नहीं होता।
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