यह कि वायु ढकने वाले पत्रक पर दाब डालती है, और पत्रक का क्षेत्रफल बढ़ने के साथ यह बल भी बढ़ता जाता है। प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल ही दाब है — अत: वायु दाब आरोपित करती है।
दोनों स्थितियों की तुलना कीजिए। पत्रक वही, भार वही, छड़ वही, प्लेट वही। बदला केवल यह कि पत्रक ने वायु के सामने कितना क्षेत्रफल प्रस्तुत किया। जब वह क्षेत्रफल बढ़ाया गया तो प्लेट उठाने में लगने वाला बल भी बढ़ गया। अत: पत्रक के ऊपर कोई वस्तु उसे नीचे की ओर दबा रही है, और यह दबाव क्षेत्रफल के अनुपात में है — दाब ठीक इसी प्रकार व्यवहार करता है।
तह किया पत्रक → कम क्षेत्रफल → कम अधोमुखी बल → उठाना सरल
बिना तह का पत्रक → अधिक क्षेत्रफल → अधिक अधोमुखी बल → उठाना कठिन
बल ∝ क्षेत्रफल, अत: बल / क्षेत्रफल = एक अचर दाब — वायुमंडलीय दाब
ऐसा क्यों होता है: वायु खाली स्थान नहीं है। वह प्लेट के चारों ओर उपस्थित वास्तविक पदार्थ है और अपने संपर्क की प्रत्येक वस्तु पर दाब डालती है। हमारे चारों ओर की वायु द्वारा डाला गया यही दाब वायुमंडलीय दाब कहलाता है।