प्र1.
आपने देखा होगा कि जल के पाइप के छिद्रों से अथवा रिसाव वाले जोड़ों से जल की प्रबल धारा फव्वारे के रूप में निकलती है। क्या आप समझा सकते हैं कि ऐसा क्यों होता है? क्या यह जल द्वारा पाइप की दीवारों पर लगाए गए दाब के कारण होता है?
उत्तर
हाँ — फव्वारा पाइप की दीवार पर लगने वाले जल के दाब से ही बनता है।
आपूर्ति के पाइप में जल दाब के अंतर्गत रहता है, क्योंकि पाइप को कहीं ऊपर रखी टंकी से जल मिलता है। यह जल पाइप की दीवार पर सर्वत्र बाहर की ओर दाब डालता है, ठीक वैसे ही जैसे क्रियाकलाप 6.2 में बोतल की दीवार पर डालता था। जहाँ दीवार अटूट है वहाँ धातु या प्लास्टिक उतना ही बल वापस लगाकर जल को रोके रखता है। दरार या ढीले जोड़ पर रोकने वाला कुछ नहीं होता, अत: जल उसी अंतराल से बाहर धकेल दिया जाता है।
यह ऊपर तक क्यों उछलता है: छिद्र छोटा होता है, अत: बाहर निकलने वाले पूरे जल को उसी कम क्षेत्रफल से तीव्र गति से गुजरना पड़ता है और वह छिद्र की दिशा में ही निकलता है। पाइप को जल देने वाली टंकी जितनी ऊँची होगी, दाब उतना अधिक और फव्वारा उतना ही ऊँचा होगा — यह भी इसी बात का प्रमाण है कि द्रव का दाब ऊपर के स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है।