कुतूहल अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने अनुभव किया होगा कि जब आप गुब्बारे में वायु भरते हैं तो वह फूल जाता है। क्यों?
उत्तर

क्योंकि भरी हुई वायु गुब्बारे की आंतरिक दीवारों पर बाहर की ओर दाब आरोपित करती है और रबड़ उस दाब से फैल जाती है।

प्रत्येक फूँक उसी छोटे स्थान में और वायु भर देती है। भीतर की वायु रबड़ को भीतर से धकेलती है; बाहर का वायुमंडल उसे बाहर से दबाता है। जब तक भीतर का दाब अधिक है, रबड़ फैलती जाती है और गुब्बारा बड़ा होता जाता है। जब खिंची हुई रबड़ भीतर के अतिरिक्त दाब को संतुलित करने योग्य तनी हो जाती है, तब फैलना रुक जाता है।

प्र2.
क्या हम यह कह सकते हैं कि वायु सभी दिशाओं में दाब आरोपित करती है?
उत्तर

हाँ — और इसका प्रमाण स्वयं गुब्बारा है, क्योंकि वह केवल ऊपर या बगल में नहीं, सभी दिशाओं में फूलता है।

यदि भीतर की वायु केवल नीचे की ओर दाब डालती तो गुब्बारा नीचे से लटक जाता और शेष भाग चपटा रहता। इसके स्थान पर वह चारों ओर समान रूप से गोल हो जाता है, जिससे पता चलता है कि भीतर की वायु दीवार के प्रत्येक भाग पर समान दाब डाल रही है। बाहर की वायु भी ऐसा ही करती है — वह हमारे चारों ओर की प्रत्येक वस्तु के ऊपर, बगल और नीचे, सब ओर दाब डालती है।

क्या आप जानते हैं? द्रव भी ऐसा ही करते हैं — क्रियाकलाप 6.2 में जल बोतल की दीवार पर पार्श्व दाब डाल रहा था। द्रव एवं गैस दोनों पात्र की दीवारों पर, सभी दिशाओं में दाब आरोपित करते हैं।
प्र3.
क्या होता है जब एक फूले हुए गुब्बारे के मुँह को बिना बंद किए रख दिया जाता है? गुब्बारे से वायु क्यों निकल जाती है?
उत्तर

वायु बाहर निकल जाती है और गुब्बारा पिचक जाता है। वह इसलिए निकलती है कि गुब्बारे के भीतर की वायु का दाब बाहर के वायुमंडलीय दाब से अधिक होता है।

खिंची हुई रबड़ भीतर की वायु को दबाकर रखती है, अत: भीतर की वायु कमरे की वायु से अधिक दाब पर होती है। वायु सदैव उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है। खुला मुँह उसे मार्ग दे देता है, अत: वह तब तक बाहर बहती रहती है जब तक भीतर और बाहर के दाब समान न हो जाएँ — तब तक गुब्बारा अपने मूल आमाप में लौट चुका होता है।

आगे यह कहाँ काम आएगा: पवन का पूरा विचार यहीं से आरंभ होता है। साइकिल की ट्यूब पंचर होने पर भी वायु इसी कारण निकलती है, और क्रियाकलाप 6.5 इस अवलोकन को नियम का रूप दे देता है — वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है
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