कुतूहल अध्याय 6 खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने अँगूठे और तर्जनी अँगुली के मध्य 18 cm लंबी और 2 cm चौड़ी एक कागज की पट्टी को पकड़िए ताकि ये मुक्त रूप से लटकी रहे। अनुमान लगाइए कि कागज पर फूँक मारने से आपका अवलोकन क्या होगा? इस क्रियाकलाप को कीजिए। अपने प्रेक्षणों को अंकित कर परिणामों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर

अधिकांश विद्यार्थियों का अनुमान: वायु पट्टी को नीचे धकेल देगी। वास्तव में होता यह है: पट्टी ऊपर उठ जाती है और वायु की धारा की ओर फड़फड़ाती है।

विधि: लगभग 18 cm लंबी और 2 cm चौड़ी कागज की पट्टी काटिए। उसका एक सिरा अँगूठे और तर्जनी के बीच, अपने निचले होंठ से थोड़ा नीचे पकड़िए और शेष भाग स्वतंत्र रूप से लटकने दीजिए। अब पट्टी के ऊपरी पृष्ठ के ऊपर से लगातार फूँक मारिए, किनारे पर नहीं।

अंकित करने योग्य प्रेक्षण:

  • धीरे फूँक मारने पर मुक्त सिरा थोड़ा ऊपर उठकर काँपता है।
  • अधिक वेग से फूँक मारने पर पट्टी और ऊपर उठ जाती है और लगभग क्षैतिज हो सकती है।
  • फूँक मारना रोकते ही पट्टी वापस नीचे लटक जाती है।

व्याख्या: फूँक मारने से पट्टी के ऊपर की वायु तीव्र गति से चलने लगती है, और तीव्रगामी वायु से दाब घट जाता है। पट्टी के नीचे की वायु शांत है, अत: वह सामान्य वायुमंडलीय दाब पर बनी रहती है। अब नीचे का दाब ऊपर के दाब से अधिक है और यही अंतर पट्टी को ऊपर उठा देता है। अधिक वेग से फूँकने पर ऊपर की चाल और बढ़ती है, दाब और घटता है और पट्टी और ऊपर उठती है — यही परिणाम क्रियाकलाप 6.6 में भी मिला था।

व्यापक निष्कर्ष: झंझावात में छतों का उड़ना और होर्डिंग्स में छिद्र बनाना — दोनों की क्रियाविधि यही है। प्रत्येक स्थिति में तीव्रगामी वायु की धारा किसी पृष्ठ के एक ओर दाब घटा देती है और दूसरी ओर की शांत वायु उसे धकेल देती है।
प्र2.
विगत 20 वर्षों में भारत में आए तीन प्रमुख चक्रवातों की सूची बनाइए। प्रत्येक चक्रवात से होने वाली दो प्रमुख क्षतियों की सूची बनाइए। स्थानीय सरकार और समुदायों द्वारा जीवन एवं संपत्ति की क्षति को कम करने के लिए कौन से कदम उठाए गए? ऐसे दो सुझावों को इंगित कीजिए जिन्हें आप स्थानीय सरकार को देना चाहेंगे।
उत्तर

यह परियोजना कैसे करें: जानकारी ऐसे स्रोतों से लीजिए जो आधिकारिक अभिलेख रखते हैं — भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चक्रवात रिपोर्ट, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), तथा उन दिनों के समाचार-पत्र। प्रत्येक चक्रवात का नाम, वर्ष, वह तट जहाँ वह पहुँचा, उसकी उच्चतम पवन गति और हुई क्षति लिखिए। कोई भी आँकड़ा लिखने से पहले कम-से-कम दो स्रोतों से मिलाइए और अंत में अपने स्रोत अवश्य दीजिए।

नमूना उत्तर:

चक्रवातवर्ष एवं तटदो प्रमुख क्षतियाँ
अम्फान2020, पश्चिम बंगाल एवं ओडिशाउच्चतम पवन गति लगभग 270 km/h (यह अध्याय में भी दिया है); तटीय पश्चिम बंगाल तथा सुंदरबन के बड़े भाग जलमग्न हो गए और कोलकाता एवं आस-पास के जिलों में विद्युत तथा दूरसंचार कई दिनों तक बाधित रहा।
फणि (फ़ानी)2019, ओडिशापुरी एवं भुवनेश्वर में घरों तथा विद्युत और जलापूर्ति व्यवस्था को भारी क्षति; तट के साथ खड़ी फसलें और हजारों वृक्ष नष्ट हो गए।
फाइलिन2013, ओडिशा एवं आंध्र प्रदेशगंजाम जिले के बड़े क्षेत्र में धान तथा अन्य खड़ी फसलें नष्ट; जल की दीवार (उत्प्रवाह) से मछली पकड़ने वाली नौकाएँ, कच्चे घर और तटीय मार्ग क्षतिग्रस्त।

सरकार और समुदायों द्वारा उठाए गए कदम:

  • IMD ने उपग्रह द्वारा प्रत्येक चक्रवात का अनुवीक्षण किया और कई दिन पूर्व ही चेतावनियाँ जारी कीं।
  • तट पर पहुँचने से पहले लाखों लोगों को निर्धारित चक्रवात सुरक्षा गृहों में पहुँचाया गया — फणि और फाइलिन में जनहानि पहले के चक्रवातों की तुलना में बहुत कम रहने का सबसे बड़ा कारण यही रहा।
  • मछुआरों को समुद्र में न जाने को कहा गया और नौकाएँ तट पर लाकर सुरक्षित बाँध दी गईं।
  • राहत दल (NDRF एवं राज्य बल) भोजन, पेयजल और औषधियों के साथ पहले से तैनात किए गए; चक्रवात के पश्चात उन्होंने गिरे हुए वृक्ष हटाकर मार्ग खोले और विद्युत लाइनें पुन: जोड़ीं।
  • समुदाय के स्वयंसेवकों ने वृद्धों, बच्चों और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया तथा सुरक्षा गृहों में सामुदायिक रसोई चलाई।

स्थानीय सरकार के लिए दो सुझाव (अपने सुझाव चुनिए और प्रत्येक का कारण दीजिए):

  1. प्रत्येक तटीय गाँव से पैदल दूरी पर चक्रवात सुरक्षा गृह बनाए या सुधारे जाएँ — ऊँचे चबूतरे, संग्रहित पेयजल और सौर प्रकाश के साथ — और उन्हें हर मौसम में चलने योग्य सड़क से जोड़ा जाए। जब लोग समय पर सुरक्षा गृह तक पहुँच ही न पाएँ तो निष्कासन की योजना विफल हो जाती है।
  2. तट के किनारे मैंग्रोव वनों की रक्षा और पुनर्रोपण किया जाए। मैंग्रोव की पट्टी जल की दीवार की गति धीमी करती है और मिट्टी को बाँधे रखती है, जिससे बाढ़ और कृषि भूमि की लवणता — दोनों की क्षति घटती है, जिनका उल्लेख इस अध्याय में है।
पुस्तक की सलाह याद रखिए: मौसम संबंधी सूचनाओं तथा भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा समय-समय पर जारी चेतावनियों से अवगत रहना महत्त्वपूर्ण है। यदि आप चक्रवात संवेदनशील क्षेत्र में रहते हैं तो आवश्यक सामग्री के साथ आपातकालीन पेटी (किट) अवश्य रखनी चाहिए, और चक्रवात के समय निकटवर्ती चक्रवात सुरक्षा गृह में तुरंत चले जाना चाहिए।
प्र3.
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में तड़ितझंझा की प्रबलता के आँकड़े एकत्रित कीजिए। अपने आँकड़ों की तुलना करके पहचानिए कि कौन से क्षेत्रों में तड़ितझंझा की संभावनाएँ अधिक हैं। क्या आप अपने निष्कर्षों का कारण दे सकते हैं?
उत्तर

आँकड़े कैसे एकत्र करें: IMD की मानसून-पूर्व एवं मानसून रिपोर्ट तथा उसके तड़ित बुलेटिन, और आपदा प्रबंधन संस्थाओं की वार्षिक तड़ित रिपोर्ट देखिए। प्रत्येक राज्य के लिए (i) वर्ष में तड़ितझंझा के दिनों की संख्या, (ii) वे महीने जिनमें ये आते हैं, तथा (iii) अभिलिखित तड़ित प्रहारों की संख्या लिखिए। सभी आँकड़े एक ही तालिका में रखिए ताकि तुलना उचित हो — सदैव एक ही राशि की, एक ही अवधि के लिए तुलना कीजिए।

क्षेत्रकब अधिककारण
पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशामार्च–मई, मानसून से पूर्वमानसून-पूर्व स्थल का तीव्र गरम होना और बंगाल की खाड़ी से आती प्रचुर आर्द्र वायु। इन्हीं झंझावातों को कालबैशाखी कहते हैं।
असम एवं पूर्वोत्तरमार्च–मईबंगाल की खाड़ी से आती आर्द्र वायु पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती है और ऊँचे बादल शीघ्र बन जाते हैं। स्थानीय नाम बोदोइसिला
केरल, कर्नाटक, तमिलनाडुमानसून-पूर्व महीनेगरम एवं आर्द्र तटीय वायु सरलता से ऊपर उठती है। ये आम वर्षा कहलाती हैं और आम पकाने में सहायक होती हैं; कर्नाटक में स्थानीय तड़ित-झंझावात कॉफी के पौधों की वृद्धि में सहायक होते हैं।
उत्तर-पश्चिम के शुष्क क्षेत्र (तुलना हेतु)तड़ितझंझा के दिन बहुत कमवायु गरम तो होती है परंतु शुष्क होती है। पर्याप्त नमी के बिना संघनन कम होता है, अत: ऊँचे झंझा-बादल कम ही बनते हैं।

निष्कर्ष और उसका कारण: तड़ितझंझा वहाँ सबसे अधिक होते हैं जहाँ दो बातें साथ हों — स्थल का तीव्र गरम होना और वायु में प्रचुर नमी। गरम होने से वायु ऊपर उठती है और निम्न दाब बनता है जो और वायु खींचता है; नमी वह जलवाष्प देती है जो संघनित होकर ऊँचे बादल बनाती है और ऊष्मा मुक्त कर वायु को और ऊपर उठाती है। इसी कारण बंगाल की खाड़ी के निकट पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्तर-पश्चिम के शुष्क भीतरी भागों की तुलना में तड़ितझंझा के दिन कहीं अधिक होते हैं। अध्याय भी यही एक पंक्ति में कहता है: तड़ित-झंझावात के निर्माण के लिए आर्द्रता एवं तीव्र वायु महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं

संकेत: अपनी तुलना प्रस्तुत करते समय स्पष्ट लिखिए कि आँकड़े किस वर्ष के हैं और कहाँ से लिए गए हैं। भिन्न-भिन्न राज्यों के भिन्न-भिन्न वर्षों के आँकड़ों से निकाला गया निष्कर्ष उचित तुलना नहीं होती।
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