अधिकांश विद्यार्थियों का अनुमान: वायु पट्टी को नीचे धकेल देगी। वास्तव में होता यह है: पट्टी ऊपर उठ जाती है और वायु की धारा की ओर फड़फड़ाती है।
विधि: लगभग 18 cm लंबी और 2 cm चौड़ी कागज की पट्टी काटिए। उसका एक सिरा अँगूठे और तर्जनी के बीच, अपने निचले होंठ से थोड़ा नीचे पकड़िए और शेष भाग स्वतंत्र रूप से लटकने दीजिए। अब पट्टी के ऊपरी पृष्ठ के ऊपर से लगातार फूँक मारिए, किनारे पर नहीं।
अंकित करने योग्य प्रेक्षण:
- धीरे फूँक मारने पर मुक्त सिरा थोड़ा ऊपर उठकर काँपता है।
- अधिक वेग से फूँक मारने पर पट्टी और ऊपर उठ जाती है और लगभग क्षैतिज हो सकती है।
- फूँक मारना रोकते ही पट्टी वापस नीचे लटक जाती है।
व्याख्या: फूँक मारने से पट्टी के ऊपर की वायु तीव्र गति से चलने लगती है, और तीव्रगामी वायु से दाब घट जाता है। पट्टी के नीचे की वायु शांत है, अत: वह सामान्य वायुमंडलीय दाब पर बनी रहती है। अब नीचे का दाब ऊपर के दाब से अधिक है और यही अंतर पट्टी को ऊपर उठा देता है। अधिक वेग से फूँकने पर ऊपर की चाल और बढ़ती है, दाब और घटता है और पट्टी और ऊपर उठती है — यही परिणाम क्रियाकलाप 6.6 में भी मिला था।