प्र1.
काले रंग के पत्रक को बिना हिलाए किसी खुली खिड़की के पास (चित्र 8.6, क) या वाटिका में कुछ घंटों के लिए रख दीजिए। आप क्या अवलोकन करते हैं?
उत्तर
पत्रक की सतह पर छोटे-छोटे कण जमे हुए दिखाई देते हैं। आवर्धक लेंस से देखने पर (चित्र 8.6, ख) पता चलता है कि वे भिन्न-भिन्न आकार, आकृति और रंग के हैं — महीन धूसर धूल, कालिख के कण, परागकण, कपड़े का कोई रेशा।
| पत्रक | प्रेक्षण |
|---|---|
| चित्र 8.6, क — आरंभ में | काला, स्वच्छ, धूल के किसी भी दृश्य कण से रहित |
| चित्र 8.6, ख — कुछ घंटों के बाद | पूरी सतह पर छोटे-छोटे कण जमे हुए |
ऐसा क्यों होता है: ये कण पहले से ही वायु में तैर रहे थे। पत्रक को बिना हिलाए रखने पर कण गुरुत्व के कारण धीरे-धीरे उस पर बैठ जाते हैं और वहीं रह जाते हैं। यह दर्शाता है कि धूल के कण वायु में निलंबित होते हैं। काला पत्रक जान-बूझकर चुना गया है — हल्के रंग की धूल गहरी पृष्ठभूमि पर स्पष्ट दिखती है।
स्वयं जाँचिए: एक पत्रक व्यस्त सड़क के पास और एक बंद कक्ष के भीतर रखिए। धूल की मात्रा का अंतर बता देगा कि धूल के कणों की संख्या स्थान के अनुसार क्यों बदलती है।