कुतूहल अध्याय 8 अपनी जिज्ञासा बनाए रखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
निम्नलिखित अभिक्रिया पर विचार कीजिए जहाँ दो पदार्थ ‘अ’ और ‘ब’ संयोजित होकर एक उत्पाद ‘स’ बनाते हैं— अ + ब → स मान लीजिए कि ‘अ’ और ‘ब’ को रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता है। इस जानकारी के आधार पर निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? (क) ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ सभी यौगिक हैं और केवल ‘स’ का संघटन निश्चित है। (ख) ‘स’ एक यौगिक है और ‘अ’ एवं ‘ब’ का संघटन निश्चित है। (ग) ‘अ’ और ‘ब’ यौगिक हैं एवं ‘स’ का संघटन निश्चित है। (घ) ‘अ’ और ‘ब’ तत्व हैं ‘स’ एक यौगिक है तथा इसका संघटन निश्चित है।
उत्तर

सही उत्तर: (घ) ‘अ’ और ‘ब’ तत्व हैं, ‘स’ एक यौगिक है तथा इसका संघटन निश्चित है।

क्यों: दी गई एकमात्र सूचना यह है कि ‘अ’ और ‘ब’ को सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता। यही तत्व की परिभाषा है, अत: ‘अ’ और ‘ब’ तत्व हैं। ‘स’ दो भिन्न तत्वों के रासायनिक संयोजन से बना है, अत: वह यौगिक है — और प्रत्येक यौगिक में उसके तत्व एक निश्चित अनुपात में संयोजित होते हैं, अत: ‘स’ का संघटन निश्चित है।
विकल्पनिर्णयकारण
(क)असत्य‘अ’ और ‘ब’ यौगिक नहीं हो सकते — यौगिक को सरल पदार्थों में तोड़ा जा सकता है
(ख)असत्य‘स’ का यौगिक होना ठीक है, परंतु ‘निश्चित संघटन’ ‘स’ का है; ‘अ’ और ‘ब’ एकल तत्व हैं, कोई संयोजन नहीं
(ग)असत्ययह भी ‘अ’ और ‘ब’ को यौगिक मानता है, जो दी गई जानकारी के विरुद्ध है
(घ)सत्यतत्व की परिभाषा और यौगिक की परिभाषा — दोनों से मेल खाता है
प्र2.
अभिकथन— वायु एक मिश्रण है। कारण— मिश्रण तब बनता है जब दो या दो से अधिक पदार्थ बिना किसी रासायनिक परिवर्तन के मिश्रित होते हैं। (क) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है। (ख) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है। (ग) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है। (घ) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।
उत्तर

सही उत्तर: (क) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

क्यों: अभिकथन सत्य है — वायु नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प का समरूप मिश्रण है। कारण मिश्रण की सही परिभाषा है। और कारण अभिकथन की व्याख्या भी करता है: वायु मिश्रण इसीलिए है क्योंकि ये गैसें बिना किसी रासायनिक परिवर्तन के मिश्रित हैं और प्रत्येक अपने गुणधर्म बनाए रखती है। वायु में उपस्थित नाइट्रोजन आज भी दहन में सहायक नहीं है और ऑक्सीजन आज भी दहन में सहायक है, ठीक वैसे ही जैसे वे अकेली होतीं। कारण जिस कसौटी की बात करता है, वह वायु पर पूरी उतरती है।
संकेत: अभिकथन-कारण प्रश्न में पहले दोनों कथनों को अलग-अलग जाँचिए, फिर अलग से यह प्रश्न पूछिए — क्या कारण वास्तव में अभिकथन की व्याख्या करता है, या वह मात्र एक और सत्य तथ्य है?
प्र3.
जल ऑक्सीजन और हाइड्रोजन तत्वों से निर्मित एक यौगिक है। इसके गुणधर्म ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के गुणधर्मों से भिन्न हैं। इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर

जल के गुणधर्म हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के गुणधर्मों का मेल नहीं हैं — वे पूर्णतया नए हैं। जब तत्व रासायनिक रूप से संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं तो ऐसा ही होता है।

गुणधर्महाइड्रोजनऑक्सीजनजल
कक्ष के तापमान पर अवस्थागैसगैसद्रव
आग के प्रति व्यवहारईंधन — ‘फट्’ की ध्वनि के साथ जलती हैदहन में सहायक — लौ को अधिक प्रदीप्त करती हैआग बुझाता है
क्या पिया जा सकता है?नहींनहींजीवन के लिए आवश्यक
क्या भौतिक विधि से पृथक किया जा सकता है?दोनों तत्व हैं — इन्हें तोड़ा ही नहीं जा सकताकिसी भी भौतिक विधि से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में पृथक नहीं किया जा सकता
ऐसा क्यों होता है: जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दो गैसों की तरह साथ-साथ नहीं पड़े हैं; वे 2 : 1 के निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित हैं और उनके कण इतनी प्रबलता से बँधे हैं कि एक नए प्रकार का कण अस्तित्व में आ जाता है। नया कण अर्थात नया पदार्थ, और नए पदार्थ के अपने गुणधर्म होते हैं। यदि जल केवल इन दो गैसों का मिश्रण होता तो वह स्वयं भी जलता और दहन में सहायक भी होता — परंतु जल दोनों का ठीक उल्टा करता है, और इसीलिए हम आग बुझाने के लिए जल का उपयोग करते हैं।
प्र4.
निम्नलिखित में से किसमें सभी उदाहरण सही सुमेलित हैं? अपने उत्तरों के समर्थन में कारण दीजिए। (i) तत्व— जल, नाइट्रोजन, लोहा, वायु। (ii) समरूप मिश्रण— खनिज, समुद्री जल, काँसा, वायु। (iii) शुद्ध पदार्थ— कार्बन डाइऑक्साइड, लोहा, ऑक्सीजन, चीनी। (iv) विषमरूप मिश्रण— वायु, रेत, पीतल, गदला जल।
उत्तर

सही उत्तर: (iii) शुद्ध पदार्थ— कार्बन डाइऑक्साइड, लोहा, ऑक्सीजन, चीनी।

(iii) सही क्यों है: शुद्ध पदार्थ में एक ही प्रकार के कण होते हैं, और प्रत्येक तत्व तथा प्रत्येक यौगिक इस कसौटी पर खरा उतरता है। कार्बन डाइऑक्साइड और चीनी यौगिक हैं; लोहा और ऑक्सीजन तत्व हैं। अत: चारों ही शुद्ध पदार्थ हैं।
विकल्पजो उदाहरण उसे बिगाड़ता हैकारण
(i) तत्वजल और वायुजल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यौगिक है; वायु गैसों का मिश्रण है। केवल नाइट्रोजन और लोहा ही तत्व हैं।
(ii) समरूप मिश्रणखनिजखनिज मिश्रण होते ही नहीं — अधिकांश यौगिक हैं और कुछ शुद्ध तत्व। समुद्री जल, काँसा और वायु अवश्य समरूप मिश्रण हैं।
(iii) शुद्ध पदार्थ— कोई नहीं —चारों तत्व अथवा यौगिक हैं। यही सही समूह है।
(iv) विषमरूप मिश्रणवायु और पीतलवायु समरूप मिश्रण है और पीतल मिश्रधातु है, जो समरूप होती है। केवल रेत और गदला जल विषमरूप हैं।
प्र5.
लोहा आर्द्र वायु के साथ अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड बनाता है और मैग्नीशियम ऑक्सीजन में दहन के पश्चात मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। उपर्युक्त अभिक्रियाओं में सम्मिलित सभी पदार्थों को तत्वों, यौगिकों या मिश्रणों के रूप में औचित्य सहित वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर
लोहा + आर्द्र वायु → आयरन ऑक्साइड
मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड
पदार्थवर्गीकरणऔचित्य
लोहातत्वइसे और अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता; समान परमाणुओं से बना है
आर्द्र वायुमिश्रणनाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प एक साथ मिश्रित, प्रत्येक अपने गुणधर्म बनाए हुए
आयरन ऑक्साइड (जंग)यौगिकलोहा और ऑक्सीजन एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित; इसके गुणधर्म — लाल-भूरा, भुरभुरा, चमकहीन — लोहे से पूर्णतया भिन्न
मैग्नीशियमतत्वएक धातु जिसे और सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता
ऑक्सीजनतत्वएक अधातु जिसे और सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता
मैग्नीशियम ऑक्साइडयौगिकमैग्नीशियम और ऑक्सीजन एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित; एक सफेद चूर्ण, न चमकीली धातु जैसा न रंगहीन गैस जैसा
ऐसा क्यों होता है: दोनों अभिक्रियाओं में एक तत्व ऑक्सीजन से रासायनिक रूप से संयोजित होता है और यौगिक बनता है। पहली अभिक्रिया में एक रोचक बात है — लोहा उस ऑक्सीजन और जलवाष्प से अभिक्रिया करता है जो संयोगवश वायु नामक मिश्रण में उपस्थित हैं। इसीलिए लोहे में आर्द्र वायु में जंग लगती है, शुष्क वायु में लगभग नहीं।
प्र6.
निम्नलिखित को तालिका 8.3 में तत्वों, यौगिकों या मिश्रणों के रूप में वर्गीकृत कीजिए। कार्बन डाइऑक्साइड, रेत, समुद्री जल, मैग्नीशियम ऑक्साइड, गदला जल, ऐलुमिनियम, सोना, ऑक्सीजन, जंग, आयरन सल्फाइड, ग्लूकोस, वायु, जल, फलों का रस, नाइट्रोजन, सोडियम क्लोराइड, सल्फर, हाइड्रोजन, बेकिंग सोडा। इनमें से शुद्ध पदार्थों की पहचान कीजिए एवं इन्हें नीचे सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर

तालिका 8.3

तत्वयौगिकमिश्रण
ऐलुमिनियम, सोना, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, हाइड्रोजनकार्बन डाइऑक्साइड, मैग्नीशियम ऑक्साइड, जंग, आयरन सल्फाइड, ग्लूकोस, जल, सोडियम क्लोराइड, बेकिंग सोडारेत, समुद्री जल, गदला जल, वायु, फलों का रस

शुद्ध पदार्थ — सूची के सभी तत्व और सभी यौगिक:

ऐलुमिनियम, सोना, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, हाइड्रोजन,
कार्बन डाइऑक्साइड, मैग्नीशियम ऑक्साइड, जंग, आयरन सल्फाइड, ग्लूकोस, जल, सोडियम क्लोराइड, बेकिंग सोडा
— अर्थात पहले दो स्तंभों के सभी 14 पदार्थ।
संदेह वाले पदार्थों का निर्णय कैसे हुआ:
  • जंग आयरन ऑक्साइड है — लोहा और ऑक्सीजन रासायनिक रूप से संयोजित, अत: यौगिक।
  • रेत मुख्यत: क्वार्ट्ज है परंतु उसमें अन्य खनिज और कण मिले रहते हैं, अत: इसे मिश्रण माना जाता है; इसके कण पहचाने जा सकते हैं, इसलिए यह विषमरूप है।
  • समुद्री जल समरूप मिश्रण है — जल में घुले लवण — क्योंकि लवण वाष्पीकरण द्वारा पुन: प्राप्त किया जा सकता है।
  • फलों के रस में जल, गूदा, शर्करा और अम्ल एक साथ रहते हैं, अत: यह मिश्रण है।
  • बेकिंग सोडा एक ही यौगिक है। इसे बेकिंग पाउडर से भ्रमित न कीजिए, जो बेकिंग सोडा और टार्टरिक अम्ल का ठोस-ठोस मिश्रण है (तालिका 8.1)।
द्रव्य शुद्ध पदार्थ मिश्रण तत्व यौगिक समरूप विषमरूप सोना, ऑक्सीजन जल, ग्लूकोस वायु, समुद्री जल रेत, गदला जल पहले पूछिए: एक पदार्थ है या एक से अधिक? फिर: क्या इसे और सरल में तोड़ा जा सकता है?
द्रव्य के किसी भी नमूने को वर्गीकृत करने वाले दो प्रश्न।
प्र7.
लौह चूर्ण और गंधक चूर्ण के मिश्रण को गरम करने पर कौन-सा नया पदार्थ बनता है और यह मूल मिश्रण से किस प्रकार भिन्न होता है? अभिक्रिया का समीकरण शब्दों में लिखिए।
उत्तर

नया पदार्थ आयरन सल्फाइड है, एक काला द्रव्यमान — और यह यौगिक है, जबकि मूल पदार्थ मिश्रण था।

आयरन + सल्फर (गरम करने पर)आयरन सल्फाइड
तुलना का बिंदुलोहे और सल्फर का मिश्रण (प्रतिदर्श ‘अ’)आयरन सल्फाइड (प्रतिदर्श ‘ब’)
स्वरूपपीले चूर्ण के बीच काले कण; दानेदारसर्वत्र एक समान काला, बनावट भी एक जैसी
चुंबकलोहा आकर्षित होता है और पृथक किया जा सकता हैआकर्षित नहीं होता
तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथहाइड्रोजन देता है — गंधहीन, ‘फट्’ की ध्वनि; सल्फर पीले ठोस के रूप में शेषहाइड्रोजन सल्फाइड देता है — सड़े हुए अंडे जैसी गंध
क्या घटक पृथक किए जा सकते हैं?हाँ, भौतिक विधि सेकिसी भी भौतिक विधि से नहीं
लोहे और सल्फर का अनुपातइच्छानुसार बदला जा सकता हैनिश्चित
ऐसा क्यों होता है: गरम करने से दोनों तत्वों को वह ऊर्जा मिलती है जो रासायनिक रूप से संयोजित होने के लिए आवश्यक है। एक बार संयोजित होने के बाद वे लोहा और सल्फर नहीं रहते, बल्कि अपने गुणधर्मों वाला एक ही नया पदार्थ बन जाते हैं — इसी कारण तालिका का प्रत्येक परीक्षण भिन्न परिणाम देता है।
प्र8.
क्या किसी पदार्थ को तत्व और यौगिक दोनों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है? स्पष्ट कीजिए कि क्यों अथवा क्यों नहीं।
उत्तर

नहीं — कभी नहीं। दोनों की परिभाषाएँ परस्पर एक-दूसरे को काटती हैं।

तत्वयौगिक
इसे और अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकताइसे अपने घटक तत्वों में विभाजित किया जा सकता है
एक ही प्रकार के परमाणुओं से बनादो या दो से अधिक भिन्न तत्वों के रासायनिक संयोजन से बना
अनुपात का प्रश्न ही नहीं — तत्व एक ही हैइसके तत्व एक निश्चित अनुपात में संयोजित होते हैं
ऐसा क्यों होता है: कोई पदार्थ तत्व ठीक तभी है जब उसे किसी सरल पदार्थ में तोड़ा न जा सके। यौगिक होने के लिए उसका कम से कम दो भिन्न तत्वों में टूटना आवश्यक है। एक ही पदार्थ एक साथ टूटने योग्य और न टूटने योग्य नहीं हो सकता, अत: कोई पदार्थ दोनों श्रेणियों में नहीं आ सकता। हाँ, दोनों ही शुद्ध पदार्थ हैं — यही एक नाम है जो दोनों में साझा है।
संकेत: जल यहाँ सबसे बड़ा भ्रम है। वह एक सरल वस्तु प्रतीत होता है, परंतु क्रियाकलाप 8.3 उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बाँट देता है — अत: जल यौगिक है, तत्व कदापि नहीं।
प्र9.
यदि जल एक यौगिक न होकर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण होता तो हमारा दैनिक जीवन किस प्रकार प्रभावित होता?
उत्तर

तब द्रव जल होता ही नहीं — और इसलिए जीवन भी वैसा नहीं होता जैसा हम जानते हैं।

क्यों: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों कक्ष के तापमान पर गैस हैं। इनका मात्र मिश्रण भी गैस ही होता, क्योंकि मिश्रण में प्रत्येक घटक अपने गुणधर्म बनाए रखता है। नदियाँ, कुएँ, समुद्र और आपकी बोतल का जल इसीलिए हैं क्योंकि ये दोनों तत्व रासायनिक रूप से संयोजित होकर एक बिलकुल नया पदार्थ बनाते हैं जो द्रव है।

इसके परिणाम—

  • पीने, पकाने और धोने को कुछ नहीं होता। गैस को बर्तन या बोतल में नहीं ले जाया जा सकता।
  • सब कुछ अत्यंत ज्वलनशील होता। एक ईंधन (हाइड्रोजन) और दहन में सहायक गैस (ऑक्सीजन) का मिश्रण आग बुझाने के स्थान पर छोटी-सी चिंगारी से ही विस्फोट कर देता।
  • अनुपात बदलता रहता। मिश्रण का अनुपात निश्चित नहीं होता, अत: एक स्थान का ‘जल’ दूसरे स्थान के ‘जल’ जैसा न होता।
  • न वर्षा, न नदियाँ, न फसलें। जल-चक्र, सिंचाई और कृषि — कुछ भी संभव न होता।
  • जीवन ही न होता। सभी जीवों का शरीर अधिकतर जल है; रक्त, वनस्पति-रस और कोशिका-द्रव सभी इसके द्रव होने पर निर्भर हैं।
क्या आप जानते हैं? अध्याय की बालिका को यही बात रोचक लगती है — हाइड्रोजन एक ईंधन है और ऑक्सीजन दहन में सहयोग करती है, फिर भी इनसे बना यौगिक आग बुझाता है। रासायनिक संयोजन वास्तव में एक बिलकुल नया पदार्थ बना देता है।
प्र10.
चित्र 8.24 का विश्लेषण कीजिए। गैस (अ) की पहचान कीजिए। साथ ही रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण शब्दों में लिखिए।
उत्तर

चित्र 8.24 में एक परखनली में रखे लौह चूर्ण पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डाला गया है और ऊपर लगी नली से एक गैस निकल रही है। वह गैस हाइड्रोजन है।

आयरन + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस
यह हाइड्रोजन है, यह कैसे जाना: यह ठीक वही अभिक्रिया है जो आपने क्रियाकलाप 8.5 में प्रतिदर्श ‘अ’ पर की थी। वहाँ मुक्त हुई गैस रंगहीन और गंधहीन थी और परखनली के मुख पर जलती मोमबत्ती लाने पर ‘फट्’ की ध्वनि के साथ जली — यही हाइड्रोजन की मानक जाँच है।
स्वयं जाँचिए: यदि परखनली में साधारण लौह चूर्ण के स्थान पर आयरन सल्फाइड होता तो गैस हाइड्रोजन सल्फाइड होती, जिसे उसकी सड़े हुए अंडे जैसी गंध से तुरंत पहचाना जा सकता है। केवल गंध की जाँच ही दोनों अभिक्रियाओं में अंतर बता देती है।
प्र11.
मात्र अधातुओं से निर्मित किन्हीं दो यौगिकों के नाम लिखिए और प्रत्येक के दो उपयोगों का उल्लेख भी कीजिए।
उत्तर

ऐसे दो यौगिक हैं जल (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) तथा कार्बन डाइऑक्साइड (कार्बन और ऑक्सीजन)। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और कार्बन — तीनों अधातुएँ हैं, जैसा अध्याय बताता है।

यौगिकइसमें विद्यमान अधातुएँदो उपयोग
जलहाइड्रोजन, ऑक्सीजन1. प्रत्येक घर में पीने, पकाने और धोने के लिए।
2. फसलों की सिंचाई; उद्योगों में शीतलक तथा विलायक के रूप में भी।
कार्बन डाइऑक्साइडकार्बन, ऑक्सीजन1. अग्निशामक यंत्रों में भरने के लिए, क्योंकि यह दहन में सहायक नहीं है।
2. वातित पेय (सोडा जल) बनाने में; पौधे भी इससे अपना भोजन बनाते हैं।
एक और अच्छा उदाहरण: ग्लूकोस (कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) — शरीर के लिए ऊर्जा का शीघ्र स्रोत, तथा औषधियों और रोगियों को दी जाने वाली ड्रिप में उपयोगी।
प्र12.
सोने को खनिज और धातु दोनों के रूप में कैसे वर्गीकृत किया जा सकता है?
उत्तर

सोना दोनों नामों पर खरा उतरता है क्योंकि ये दो शब्द दो भिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हैं — यह कहाँ से आता है? और यह किस प्रकार का तत्व है?

इसे कहते हैंक्योंकि
खनिजयह पृथ्वी में पाया जाने वाला प्राकृतिक ठोस पदार्थ है जिसका रासायनिक संघटन निश्चित है। सोना उन मूल खनिजों में से एक है जो यौगिक नहीं अपितु शुद्ध तत्व होते हैं।
धातुतत्व के रूप में यह धातुओं के वर्ग में आता है, चाँदी, मैग्नीशियम, लोहा और ऐलुमिनियम के साथ — यह चमकीला और भारी है तथा पीटकर आकार दिया जा सकता है।
ऐसा क्यों होता है: अधिकांश खनिज एक से अधिक तत्वों से निर्मित यौगिक होते हैं — क्वार्ट्ज, कैल्साइट, अभ्रक, पाइरॉक्सीन और ओलीवाइन। कुछ खनिज पृथ्वी में पहले से ही अपने शुद्ध तत्व रूप में मिलते हैं; इन्हें मूल खनिज कहते हैं और ये सोना, चाँदी, ताँबा जैसी धातुएँ अथवा सल्फर, कार्बन जैसी अधातुएँ हो सकते हैं। सोना ऐसे तत्व का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है जिसे हम सीधे भूमि से निकालते हैं।
संकेत: ‘खनिज’ स्रोत और संघटन बताता है; ‘धातु’ तत्व के गुणधर्म बताती है। चाँदी और ताँबे को भी दोनों प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है।
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