प्र1.
क्या आप जानते हैं कि स्टेनलेस स्टील भी एक मिश्रण है?
उत्तर
हाँ। स्टेनलेस स्टील में लोहा, निकेल, क्रोमियम और अल्प मात्रा में कार्बन होता है। ये इतनी एकरूपता से मिश्रित होते हैं कि पूरा मिश्रण सर्वत्र एक जैसा दिखाई देता है और इनके पदार्थों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
धातुओं के ऐसे समरूप मिश्रणों को मिश्रधातु कहते हैं। अध्याय से दो और उदाहरण—
| मिश्रधातु | किन-किन के मिश्रण से | कहाँ दिखती है |
|---|---|---|
| स्टेनलेस स्टील | लोहा, निकेल, क्रोमियम और थोड़ा कार्बन | थाली, चम्मच, पकाने के बर्तन |
| पीतल | ताँबा (कॉपर) और जस्ता (जिंक) | लोटा, गागर, दरवाजों की मूठ |
| काँसा | ताँबा (कॉपर) और टिन | मूर्तियाँ, घंटियाँ, पुराने पात्र |
ऐसा क्यों होता है: धातुओं को पिघलाकर एक साथ मिलाया जाता है, जिससे उनके कण अलग-अलग कणों के स्तर तक मिल जाते हैं — इसीलिए मिश्रधातु एक समरूप मिश्रण है, यौगिक नहीं। यहाँ कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं हुई और अनुपात भी किसी नियम से बँधा नहीं है; पीतल में जस्ते की मात्रा बदली जा सकती है। यही कारण है कि मिश्रधातु शुद्ध धातु से अधिक सुदृढ़ या अधिक जंगरोधी बनाई जा सकती है — स्टेनलेस स्टील शुद्ध लोहे से अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ होती है।
क्या आप जानते हैं? इसी पृष्ठ का ‘हमारी वैज्ञानिक परंपरा’ बॉक्स ऐसे मिश्रण को मिश्रलोह कहता है। चरकसंहिता और सुश्रुतसंहिता में काँसा (काँस्य) — ताँबा (ताम्र, 4 भाग) और टिन (वंग, 1 भाग) — का उपयोग पाचन सुधारने और प्रतिरक्षा वर्धन के लिए वर्णित है।