कक्षा ९ गणित अध्याय 6 सोचिए और विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
यदि समांतर चतुर्भुज संकरा हो (चित्र 6.18) और C से AD पर डाले गए लंब का पाद भुजा AD पर न हो तो क्या होगा? तब यह चतुर्भुज रचना क्षेत्रफल ज्ञात करने के कार्य को नहीं साधती है। रचना में इस ‘कमी’ को हम कैसे दूर करेंगे?चित्र 6.18 — एक ‘संकरा’ समांतर चतुर्भुज ABCD।
उत्तर
सूत्र तब भी आधार × ऊँचाई ही रहता है; केवल प्रमाण को सुधारना पड़ता है। सुधार यह है कि समांतर चतुर्भुज को एक-एक चरण में कतरकर (shear) कम झुका हुआ बना दिया जाए।
सामान्य प्रमाण एक सिरे का समकोण त्रिभुज काटकर दूसरे सिरे पर लगा देता है और आयत बना देता है। यह तभी काम करता है जब C से डाले गए लंब का पाद रेखाखंड AD पर ही गिरे। बहुत झुके हुए समांतर चतुर्भुज में वह पाद AD के बाहर गिरता है, अतः काटने के लिए कोई त्रिभुज ही नहीं मिलता।
DA पर D के निकट एक बिंदु D′ लीजिए और DA को बढ़ाकर उस पर A′ लीजिए, जहाँ A′A = D′D हो। तब A′BCD′ एक समांतर चतुर्भुज है (A′D′ ∥ BC और A′D′ = AD = BC)। ΔCDD′ ≅ ΔBAA′ (CD = BA, DD′ = AA′, ∠CDD′ = ∠BAA′) ∴ ar(A′BCD′) = ar(ABCD) − ar(ΔCDD′) + ar(ΔBAA′) = ar(ABCD)
एक कतरन-चरण — A′BCD′ (बिंदुकित) का आधार BC वही है, ऊँचाई वही है और क्षेत्रफल भी वही है, किंतु झुकाव कम है।
प्रत्येक चरण क्षेत्रफल अपरिवर्तित रखता है और झुकाव घटाता है। जितनी बार आवश्यक हो दोहराइए, जब तक लंब का पाद आधार के भीतर न आ जाए — तब मूल काट-सरका प्रमाण लागू हो जाता है और क्षेत्रफल आधार × ऊँचाई निकलता है।
ऐसा क्यों होता है: ऊपरी भुजा को उसी की रेखा पर सरकाना कतरन है। कतरन प्रत्येक बिंदु को आधार के समांतर खिसकाती है, अतः न आधार बदलता है न ऊँचाई, और ऊपर की सर्वांगसमता के कारण क्षेत्रफल भी नहीं। सूत्र bh कतरन को पहचान ही नहीं सकता — और यही कारण है कि भुजाओं की लंबाई नहीं, बल्कि आधार × ऊँचाई गुणा करना सही है।
संकेत: "तर्क किसी विषम स्थिति में टूटता है, तो उस स्थिति को अलग से साधिए" — यही अनुशासन आप कक्षा 9 और 10 की पूरी ज्यामिति में काम में लेंगे। जब तक प्रत्येक विन्यास सिद्ध न हो, सूत्र प्रमाणित नहीं माना जाता।