कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.5 के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
अपने सिरे से स्लिंकी को अपने मित्र की ओर बलपूर्वक धकेलिए और उसे तुरंत वापस खींच लीजिए (चित्र 10.8)। क्या आप स्लिंकी में उत्पन्न किसी विक्षोभ (disturbance) का अवलोकन करते देखते हैं जो आपके मित्र की ओर बढ़ता है?
चित्र 10.8, पृष्ठ 188 — पुनःचित्रित रेखाचित्र। एक सिरे पर तेज़ धक्का देकर तुरंत खींचने पर फेरों का पास-पास आया हुआ क्षेत्र (विक्षोभ) खिंची हुई स्लिंकी के अनुदिश आगे बढ़ता है।
उत्तर
हाँ। एक ऐसा क्षेत्र जहाँ फेरे पास-पास सिमट गए हैं, स्लिंकी के अनुदिश आपके मित्र की ओर दौड़ता हुआ दिखाई देता है।
ऐसा क्यों होता है: आपके धक्के से पहले कुछ फेरे आपस में सिमट जाते हैं। प्रत्येक सिमटा फेरा अपने आगे वाले फेरे को दबाता है और फिर वापस लौट आता है, अतः यह सिमटाव फेरे-दर-फेरे आगे बढ़ता जाता है। स्लिंकी के अनुदिश जो गमन करता है वह निकटता का प्रतिरूप है, फेरे स्वयं नहीं — प्रत्येक फेरा थोड़ा आगे बढ़कर अपनी पूर्व स्थिति पर लौट आता है।
यह ध्वनि तरंग के एकल संपीडन का उत्तम प्रतिरूप है: स्रोत पर धक्का, संघट्टों द्वारा आगे बढ़ता सिमटाव, और माध्यम का कोई सामूहिक प्रवाह नहीं।
प्र2.
अब स्लिंकी के सिरे को अनेक बार जल्दी-जल्दी आगे की ओर धक्का दीजिए तथा पीछे की ओर खींच लीजिए (स्लिंकी के सिरे को खींचना और धक्का देना निरंतर उत्पन्न होने वाली ध्वनि के सदृश है)। क्या स्लिंकी में विक्षोभों की एक श्रृंखला उत्पन्न होती है? क्या ये विक्षोभ स्लिंकी की पूर्ण लंबाई के अनुदिश गति करते हैं? क्या स्लिंकी पर लगाया गया चिह्न विक्षोभ की दिशा के समानांतर आगे-पीछे गति करता है?
उत्तर
तीनों का उत्तर हाँ है।
विक्षोभों की श्रृंखला उत्पन्न होती है। जहाँ फेरे पास-पास हैं वे क्षेत्र और जहाँ वे दूर फैले हैं वे क्षेत्र क्रम से आते हैं।
ये स्लिंकी के अनुदिश गमन करते हैं, एक के बाद एक, आपके सिरे से आपके मित्र के सिरे तक।
चिह्नित फेरा गमन नहीं करता। वह केवल अपनी विरामावस्था के इधर-उधर दोलन करता है, और वह भी विक्षोभ की गमन दिशा के समानांतर।
स्लिंकी में
वायु में ध्वनि तरंग में
फेरे पास-पास
संपीडन — घनत्व औसत से अधिक
फेरे दूर-दूर
विरलन — घनत्व औसत से कम
चिह्नित फेरा अपनी जगह दोलन करता
वायु का कण अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर दोलन करता
सिमटाव का प्रतिरूप आगे बढ़ता
ध्वनि तरंग आगे संचरित होती
इससे ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग क्यों सिद्ध होती है: कण उसी रेखा के अनुदिश कंपन करते हैं जिसके अनुदिश तरंग चलती है। ऐसी तरंग को अनुदैर्घ्य तरंग कहते हैं। रस्सी को ऊपर-नीचे हिलाकर बनाई गई तरंग से तुलना कीजिए — वहाँ कण गमन दिशा के लंबवत गति करते हैं, और वह अनुप्रस्थ तरंग है (चित्र 10.13)।
संकेत: चिह्नित फेरा ही इस क्रियाकलाप का मुख्य बिंदु है। यह इस बात का दृश्य प्रमाण है कि ऊर्जा गमन करती है जबकि द्रव्य अपनी जगह रहता है।