कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पृथ्वी परस्पर क्रिया करने वाले पाँच मंडलों का एक तंत्र है — भूमंडल (चट्टानें, मृदा, आंतरिक भाग), जलमंडल (द्रव जल), हिममंडल (हिम और बर्फ), वायुमंडल (वायु) और जैवमंडल (सभी सजीव)। एक मंडल में विक्षोभ अन्य मंडलों में परिवर्तन के रूप में प्रकट होता है। सौर विकिरण विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में आता है जो निर्वात में 3 × 10 8 m s –1 की चाल से चलती हैं। सूर्य की लगभग 99 प्रतिशत ऊर्जा UV, दृश्य और IR परास में होती है। सौर स्थिरांक 1.4 kW m –2 (1400 J s –1 m –2 ) है; अवशोषण और प्रकीर्णन के बाद सतह पर अधिकतम सूर्यातप लगभग 1 kW m –2 रह जाता है। ऊष्मण असमान होता है — एल्बिडो के कारण (हिम 0.80 – 0.90 परावर्तित करती है, काली मृदा और महासागरीय जल बहुत कम), अक्षांश के कारण (ध्रुवों की ओर वही किरण-पुंज अधिक क्षेत्रफल पर फैल जाता है) और पृथ्वी की धुरी के झुकाव के कारण। वायुमंडल संस्तरित है। मौसम क्षोभमंडल
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| शब्द | अर्थ | अध्याय से मान / उदाहरण | कहाँ आया है |
|---|---|---|---|
| सौर स्थिरांक | वायुमंडल के ऊपरी भाग पर सूर्य की किरणों के लंबवत प्रति इकाई क्षेत्र पर प्रति इकाई समय में प्राप्त सौर ऊर्जा की औसत मात्रा | 1.4 kW m–2 = 1400 J s–1 m–2 | अनुभाग 13.1 |
| सूर्यातप | पृथ्वी की सतह पर वास्तव में पहुँचने वाला सौर विकिरण | स्वच्छ आकाश में लगभग 1 kW m–2 | अनुभाग 13.1 |
| एल्बिडो | किसी सतह द्वारा परावर्तित सौर विकिरण का अंश (लैटिन albedo = धवलता) | हिम 0.80 – 0.90; बर्फ 0.50 – 0.70; संदलित चट्टानें 0.25 – 0.30 | तालिका 13.1 |
| क्षोभमंडल | सबसे निचली परत, जो पृथ्वी की सतह से नीचे से गर्म होती है; लगभग सारा मौसम यहीं बनता है | 0 – 12 km; ऊँचाई के साथ ताप लगभग 6.5 °C km–1 घटता है | तालिका 13.2 |
| समतापमंडल | यहाँ ओजोन परत है; UV अवशोषण से यह गर्म होती है, इसलिए ऊँचाई के साथ ताप बढ़ता है और परत शांत रहती है | 12 – 50 km | तालिका 13.2 |
| हरितगृह गैसें | गर्म पृथ्वी द्वारा पुनः विकिरित अवरक्त ऊष्मा को अवशोषित कर उसे अंतरिक्ष में जाने से रोकने वाली गैसें | CO2, CH4, जलवाष्प | अनुभाग 13.1.3 |
| घाटी समीर | दिन की पवन — धूप वाली ढलान गर्म होती है, वायु ऊपर उठती है, ठंडी वायु घाटी से ढलान पर ऊपर चढ़ती है | शिमला, देहरादून और अन्य हिमालयी घाटियाँ | चित्र 13.8 (क) |
| पर्वतीय समीर | रात की पवन — ढलान शीघ्र ठंडी होती है, सघन शीतल वायु नीचे घाटी में उतरती है | शिमला, देहरादून और अन्य हिमालयी घाटियाँ | चित्र 13.8 (ख) |
| वायुदाब पट्टियाँ | भूमध्य रेखा और ध्रुवों के बीच असमान ऊष्मण से बनी उच्च और निम्न दाब की पट्टियाँ | भूमध्यरेखीय निम्न, उपोष्ण उच्च (30°), उपध्रुवीय निम्न (60°), ध्रुवीय उच्च (90°) | चित्र 13.9 (ख) |
| भंवर (gyre) | पृथ्वी के घूर्णन से विक्षेपित जल का विशाल वृत्ताकार प्रवाह पैटर्न | उत्तरी गोलार्ध में घड़ी की दिशा में, दक्षिणी में विपरीत दिशा में | चित्र 13.10 (क) |
| जैव-भू रासायनिक चक्र | अजैविक और जैविक घटकों के मध्य द्रव्य तथा ऊर्जा का चक्रीय संचलन | जल, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन चक्र | अनुभाग 13.3 |
| नाइट्रोजन स्थिरीकरण | अक्रियाशील N2 को अमोनिया में बदलना, जिसे सजीव उपयोग कर सकें | जड़ ग्रंथियों में राइजोबियम, मृदा में एजोटोबैक्टर, तड़ित, हाबर–बॉश प्रक्रिया | अनुभाग 13.3.3 |
| नाइट्रीकरण / विनाइट्रीकरण | NH3 → NO2– → NO3–, तथा नाइट्रेट का पुनः N2 गैस में बदलना | नाइट्रोसोमोनास, नाइट्रोबैक्टर; स्यूडोमोनास | चित्र 13.15 |
| सुपोषण (eutrophication) | अतिरिक्त नाइट्रेट से शैवाल प्रस्फुटन, जल में ऑक्सीजन की कमी और मछलियों की मृत्यु | चित्र 13.17 | अनुभाग 13.4 |
| कीलिंग वक्र | वर्ष 1960 से वायुमंडलीय CO2 का ग्राफ; आरीनुमा दाँते उत्तरी गोलार्ध की वार्षिक वनस्पति वृद्धि हैं | 315 ppm (1960) → लगभग 420 ppm (2025) | चित्र 13.14 |
| शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव | कंक्रीट, ईंट और डामर ऊष्मा संचित कर पुनः विकिरित करते हैं, इसलिए शहर आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से गर्म रहते हैं | शहरों में वातानुकूलन की माँग बढ़ना | जिज्ञासा-सूत्र, पृष्ठ 257 |
अभ्यास
- चिंतन कीजिए
- क्रियाकलाप 13.1
- पाठ्य प्रश्न
- वैज्ञानिक की भाँति सोचिए
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 13.2
- सोचिए और बताइए
- जिज्ञासा-सूत्र
- सोचिए और बताइए
- सोचिए और बताइए
- सोचिए और बताइए
- क्या होगा यदि…
- सोचिए और बताइए
- अभ्यास प्रश्न
- परियोजना कार्य
- खोज जारी है…