कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 12 जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
जैव विविधता जीवों की संपूर्ण विविधता है। भारत में यह इसलिए समृद्ध है क्योंकि यहाँ हिमालय से लेकर थार मरुस्थल और पश्चिमी घाट तक भिन्न-भिन्न पर्यावास हैं। जो जातियाँ केवल एक ही क्षेत्र में पाई जाती हैं वे स्थानिक जातियाँ कहलाती हैं (नीलगिरी तहर, लाॅयन टेल्ड मकाक, नेपेन्थीस खासियाना , नीलकुरिंजी), और स्थानिक जातियों से समृद्ध किंतु पर्यावास की भारी क्षति झेल चुके क्षेत्र जैव विविधता हॉटस्पॉट कहलाते हैं। जीवों का वर्गीकरण सात प्रकार के प्रमाणों पर होता है — बाह्य विशेषताएँ, पोषण की विधि, आंतरिक संरचनाएँ, कोशिका संरचना, पारिस्थितिकीय भूमिका, जनन और आनुवंशिक समानता। समान विशेषताएँ समान पूर्वज की ओर संकेत करती हैं। प्रणाली क्रमशः विकसित हुई — अरस्तू (पर्यावास) → द्विजगत (1758, लिनियस) → तीन जगत (1866, हेकल, प्रोटिस्टा जोड़ा) → चार जगत (1938, कोपलैंड, मोनेरा जोड़ा) → पाँच जगत (1969, व्हिटेकर) : मो
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| शब्द | अर्थ | अध्याय से उदाहरण | कहाँ आया है |
|---|---|---|---|
| जैव विविधता | पृथ्वी पर जीवों की संपूर्ण विविधता | सूक्ष्मदर्शीय शैवाल से विशाल वृक्ष तक; हिमालय से अंडमान की प्रवाल भित्तियाँ तक | अध्याय का आरंभ, 12.1 |
| स्थानिक जाति | जो जाति प्राकृतिक रूप से केवल एक ही क्षेत्र में पाई जाती है | नीलगिरी तहर, लाॅयन टेल्ड मकाक, नेपेन्थीस खासियाना, नीलकुरिंजी | 12.1, चित्र 12.1 |
| जैव विविधता हॉटस्पॉट | स्थानिक जातियों से समृद्ध वह क्षेत्र जहाँ पर्यावास की अत्यधिक क्षति हुई है | पश्चिमी घाट, इंडो बर्मा, हिमालय, सुंडालैंड | 12.1 |
| पूर्वकेंद्रकी / सुकेंद्रकी | झिल्ली आबद्ध केंद्रक रहित / युक्त कोशिका | जीवाणु (पूर्व) बनाम अमीबा (सु) | 12.5, चित्र 12.5 |
| मोनेरा | एककोशिकीय पूर्वकेंद्रकी जीव | बैक्टीरिया, आर्किया, साइनोबैक्टीरिया; लैक्टोबैसिलस, राइजोबियम | 12.6.1 |
| प्रोटिस्टा | एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव, कोशिका भित्ति अनुपस्थित या सेल्युलोस की | अमीबा, पैरामीशियम, क्लैमाइडोमोनास, यूग्लीना | 12.6.2 |
| फंजाई | प्रायः बहुकोशिकीय विषमपोषी सुकेंद्रकी जीव, कोशिका भित्ति काइटिन की | यीस्ट, ऐस्पर्जिलस, पेनिसिलियम, मशरूम | 12.6.3 |
| कवक जाल (माइसीलियम) | महीन तंतुओं का वह संजाल जिससे कवक पोषक अवशोषित करता है | डबलरोटी पर उगी फफूँद | 12.6.3 |
| थैलस | ऐसी सरल काया जो जड़, तना और पत्ती में विभेदित नहीं होती | स्पाइरोगाइरा (थैलोफाइटा) | 12.6.4 |
| मूलाभास (राइजॉइड) | ब्रायोफाइट की जड़ जैसी संरचनाएँ (वास्तविक जड़ नहीं) | मॉस, मार्केशिया | 12.6.4 |
| संवहनी ऊतक | जाइलम जल पहुँचाता है, फ्लोएम भोजन | सर्वप्रथम टेरिडोफाइटा में (चित्र 12.11 ख) | 12.6.4 |
| पृष्ठरज्जु | लचीली छड़ाकार संरचना; जंतु वर्गीकरण का मुख्य आधार | ऐम्फिऑक्सस (प्रोटोकॉर्डेट) में उपस्थित; कशेरुक दंड की पूर्ववर्ती | 12.6.5 |
| द्विपार्श्व सममिति | शरीर को एक तल से दो समान भागों में बाँटा जा सकता है; सिर-पूँछ स्पष्ट | प्लैटीहेल्मिन्थीस से आगे | 12.6.5 |
| बहिःकंकाल / अंतःकंकाल | शरीर के बाहर कठोर आवरण / शरीर के भीतर कंकाल | केकड़ा, कीट (बहिः); स्टारफिश, कशेरुकी (अंतः) | चित्र 12.16 |
| द्विनाम पद्धति | दो भागों वाला लैटिन वैज्ञानिक नाम: वंश + जाति | पेंथेरा टाइग्रिस, मेंजीफेरा इंडिका | 12.8 |
| जीवाश्म | चट्टानों, रेत और मिट्टी की परतों में दबे पादपों और जंतुओं के परिरक्षित अवशेष | पुरानी परतों में साधारण जीव; बीरबल साहनी का कार्य | 12.9 |
अभ्यास
- चिंतन कीजिए
- क्रियाकलाप 12.1
- सोचिए और बताइए
- क्रियाकलाप 12.2
- क्रियाकलाप 12.3
- क्रियाकलाप 12.4
- क्रियाकलाप 12.5
- सोचिए और बताइए
- विज्ञान एवं समाज
- क्रियाकलाप 12.6
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 12.7
- सोचिए और बताइए
- क्रियाकलाप 12.8
- क्रियाकलाप 12.9
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- सोचिए और बताइए
- विज्ञान एवं समाज
- पाठ्य प्रश्न
- सोचिए और बताइए
- विज्ञान एवं समाज
- अभ्यास प्रश्न
- परियोजना कार्य
- खोज जारी है…