कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 11 जनन — जीवन की निरंतरता के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

अलैंगिक जनन में एक ही जनक होता है और समसूत्री विभाजन होता है, अतः संतति आनुवंशिक रूप से समरूप क्लोन होती है — यीस्ट और हाइड्रा में मुकुलन, कवकों में बीजाणु निर्माण और पादपों में कायिक प्रवर्धन (कर्तन, कलम बाँधना, परतन, ऊतक संवर्धन)। लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं। अर्धसूत्री विभाजन गुणसूत्रों की संख्या आधी कर देता है (मनुष्य में 46 → 23) और निषेचन उसे पुनः पूरा कर देता है, अतः पीढ़ी-दर-पीढ़ी संख्या स्थिर बनी रहती है। प्रत्येक जोड़े के गुणसूत्र एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से पृथक होते हैं, इसलिए n जोड़ों से 2 n प्रकार के युग्मक बनते हैं — क्रियाकलाप 11.4 के तीन जोड़ी मनकों से 8, और मनुष्य में 2 23 = 8,388,608। विभिन्नता का स्रोत यही है। पुष्प में पुंकेसर (तंतु + परागकोश) परागकण बनाता है और स्त्रीकेसर (वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय) में बीजांड होते हैं। परागण परागकण को परागकोश से वर्तिकाग्र तक

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पदअर्थकहाँ होता है / प्रारूपिक मानअध्याय में कहाँ
अलैंगिक जननएक जनक; संतति आनुवंशिक रूप से उसके समरूपसमसूत्री विभाजन पर आधारितजीवाणु, अमीबा, यीस्ट, हाइड्रा, आलू, अदरक — 11.1
कायिक प्रवर्धनपुराने पौधे के कायिक (वर्धनशील) भाग से नया पौधाकर्तन, कलम बाँधना, परतन, ऊतक संवर्धनब्रायोफिलम की पत्ती (चित्र 11.1); क्रियाकलाप 11.1
मुकुलनएक स्थान पर बार-बार कोशिका विभाजन से उभार बनता है जो अलग होकर स्वतंत्र जीता हैयीस्ट, हाइड्राचित्र 11.6, चित्र 11.7; क्रियाकलाप 11.2
बीजाणु निर्माणथैली या फूली हुई पुटिका पर बने हल्के, प्रायः एककोशिकीय बीजाणुकवक; 25 – 35 °C ताप और नमी आवश्यकराइजोपस, ऐस्पर्जिलस (चित्र 11.8); क्रियाकलाप 11.3
समसूत्री विभाजनऐसा विभाजन जिससे बनी दोनों संतति कोशिकाओं में जनक जितने ही गुणसूत्र होते हैंवृद्धि, मरम्मत और सभी अलैंगिक जनन11.1 — ‘संतति क्लोन होती है’
अर्धसूत्री विभाजनगुणसूत्रों की संख्या आधी कर देने वाला विभाजनवृषण और अंडाशय; परागकोश और बीजांड। मनुष्य में 46 → 2311.2.1; क्रियाकलाप 11.4
युग्मकअगुणित जनन कोशिकाशुक्राणु — सूक्ष्म, गतिशील, संचित पोषक अनुपस्थित। अंडाणु — बड़ा, अचल, पीतकयुक्ततालिका 11.5
परागणपरागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरणस्व- या पर-परागण; माध्यम वायु, जल, कीट, पक्षी11.2.3, 11.2.4; क्रियाकलाप 11.6
निषेचननर युग्मक और अंडकोशिका का युग्मन जिससे युग्मनज बनता हैबीजांड में (पादप); डिंबवाहिनी में (मानव)चित्र 11.14, चित्र 11.20
फल और बीजअंडाशय फल बन जाता है; प्रत्येक बीजांड बीज बन जाता हैपुष्पी पादप में निषेचन के पश्चातचित्र 11.15; 11.2.5
बाह्य बनाम आंतरिक निषेचनयुग्मक जल में शरीर के बाहर मिलते हैं, या मादा के शरीर के भीतरमेंढक 5,000 – 50,000 अंडे, उत्तरजीविता कम; पक्षी 1 – 15 अंडे, मध्यम से उच्चतालिका 11.4; 11.3, 11.4
रजोधर्म चक्रअंडोत्सर्ग, गर्भाशय आस्तर का स्थूलन, और अंतर्रोपण न होने पर उसका निस्तारण21 – 35 दिन (प्रायः 28); रजोधर्म 3 – 7 दिन; अंडोत्सर्ग लगभग 14वें दिनचित्र 11.21; 11.5.5, 11.5.6
  1. चिंतन कीजिए
  2. क्रियाकलाप 11.1
  3. क्रियाकलाप 11.2
  4. पाठ्य प्रश्न
  5. क्रियाकलाप 11.3
  6. पाठ्य प्रश्न
  7. विज्ञान एवं समाज
  8. पाठ्य प्रश्न
  9. क्रियाकलाप 11.4
  10. पाठ्य प्रश्न
  11. क्रियाकलाप 11.5
  12. पाठ्य प्रश्न
  13. क्रियाकलाप 11.6
  14. पाठ्य प्रश्न
  15. पाठ्य प्रश्न
  16. क्रियाकलाप 11.7
  17. सोचिए और बताइए
  18. सोचिए और बताइए
  19. जिज्ञासा-सूत्र
  20. सोचिए और बताइए
  21. सोचिए और बताइए
  22. सोचिए और बताइए
  23. अभ्यास प्रश्न
  24. परियोजना कार्य
  25. खोज जारी है…
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