कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 4 क्रियाकलाप 4.1 के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
चित्र 4.5 में दर्शाए अनुसार किसी गेंद को बिंदु ‘O’ से ऊर्ध्वाधरत: ऊपर की ओर फेंका गया है। यह ऊपर की ओर चलती हुई बिंदु ‘B’ तक जाती है और वहाँ से गिर कर वापस बिंदु O पर लौट आती है। क्या इस गेंद की गति को सरल रेखा में गति माना जा सकता है?
चित्र 4.5, पृष्ठ 51 — गेंद की ऊर्ध्वाधर गति। ऊपर जाने (बाएँ) और नीचे आने (दाएँ) की गतियों को दो अलग-अलग बिंदुदार रेखाओं से केवल स्पष्टता के लिए दर्शाया गया है; वास्तव में गेंद एक ही सरल रेखा पर ऊपर जाती और नीचे आती है।
उत्तर
हाँ। पूरी यात्रा — O से B तक ऊपर और B से O तक नीचे — एक ही ऊर्ध्वाधर सरल रेखा पर होती है।
ऐसा क्यों होता है: सरल रेखा में गति का अर्थ यह नहीं कि वस्तु एक ही ओर चलती रहे। इसका अर्थ केवल इतना है कि उसका पथ सरल रेखा हो। यहाँ गेंद नीचे आते समय ठीक उसी रेखा पर लौटती है; चित्र 4.5 में ऊपर और नीचे की गतियों को दो अलग बिंदुदार रेखाओं से केवल इसलिए दिखाया गया है ताकि A, B और C पृष्ठ पर एक-दूसरे पर न पड़ें। वास्तव में दोनों रेखाएँ एक ही हैं।
स्वयं जाँचिए: गेंद B पर पलटती अवश्य है, इसलिए यहाँ चलित दूरी और विस्थापन का परिमाण अलग हो जाएँगे — तालिका 4.1 इसी को दिखाने के लिए बनी है।
प्र2.
इस गति के लिए तालिका 4.1 में मान अंकित कीजिए।
चित्र 4.5, पृष्ठ 51 — गेंद की ऊर्ध्वाधर गति। ऊपर जाने (बाएँ) और नीचे आने (दाएँ) की गतियों को दो अलग-अलग बिंदुदार रेखाओं से केवल स्पष्टता के लिए दर्शाया गया है; वास्तव में गेंद एक ही सरल रेखा पर ऊपर जाती और नीचे आती है।
क्र. सं.
स्थिति
O से चलकर इंगित स्थिति तक पहुँचने में गेंद द्वारा चलित कुल दूरी
O से चलकर इंगित स्थिति तक पहुँचने में गेंद का विस्थापन
1.
O
0 cm
0 cm
2.
A
40 cm
40 cm ऊपर की ओर
3.
B
4.
C
5.
O
तालिका 4.1, पृष्ठ 51 — गेंद द्वारा चलित दूरी और उसका विस्थापन (पुस्तक में छपी हुई तालिका, जिसे भरना है)।
उत्तर
चित्र 4.5 से पढ़िए — O 0 cm पर, A 40 cm पर, उच्चतम बिंदु B 140 cm पर और C 80 cm पर है। किंतु C नीचे आते समय अंकित है, अर्थात गेंद C पर तब पहुँचती है जब वह B से 60 cm नीचे आ चुकी होती है।
क्र. सं.
स्थिति
O से चलकर इंगित स्थिति तक पहुँचने में गेंद द्वारा चलित कुल दूरी
O से चलकर इंगित स्थिति तक पहुँचने में गेंद का विस्थापन
1.
O
0 cm
0 cm
2.
A
40 cm
40 cm ऊपर की ओर
3.
B
140 cm
140 cm ऊपर की ओर
4.
C
200 cm
80 cm ऊपर की ओर
5.
O
280 cm
0 cm
C पर: दूरी = OB + BC = 140 cm + (140 cm − 80 cm) = 140 cm + 60 cm = 200 cm
विस्थापन = C की स्थिति − O की स्थिति = 80 cm − 0 cm = 80 cm ऊपर की ओर
वापस O पर: दूरी = OB + BO = 140 cm + 140 cm = 280 cm
विस्थापन = 0 cm − 0 cm = 0 cm
गेंद 140 cm ऊपर जाती है और उतने ही 140 cm नीचे लौटती है — पथ 280 cm लंबा है पर स्थिति में सकल परिवर्तन शून्य।
प्र3.
तालिका 4.1 में दिए गए आँकड़ों का विश्लेषण कीजिए और विस्थापन के संबंध में नीचे दिए गए कथनों में से सत्य कथन का चयन कीजिए— (i) यह कभी भी शून्य नहीं होता है। (ii) इसका परिमाण कुल चलित दूरी से अधिक हो सकता है। (iii) इसका परिमाण कुल चलित दूरी से कम हो सकता है या उसके बराबर हो सकता है। (iv) इसका परिमाण सभी स्थितियों में सदैव चलित दूरी से कम होता है।
चित्र 4.5, पृष्ठ 51 — गेंद की ऊर्ध्वाधर गति। ऊपर जाने (बाएँ) और नीचे आने (दाएँ) की गतियों को दो अलग-अलग बिंदुदार रेखाओं से केवल स्पष्टता के लिए दर्शाया गया है; वास्तव में गेंद एक ही सरल रेखा पर ऊपर जाती और नीचे आती है।
क्र. सं.
स्थिति
O से चलकर इंगित स्थिति तक पहुँचने में गेंद द्वारा चलित कुल दूरी
O से चलकर इंगित स्थिति तक पहुँचने में गेंद का विस्थापन
1.
O
0 cm
0 cm
2.
A
40 cm
40 cm ऊपर की ओर
3.
B
4.
C
5.
O
तालिका 4.1, पृष्ठ 51 — गेंद द्वारा चलित दूरी और उसका विस्थापन (पुस्तक में छपी हुई तालिका, जिसे भरना है)।
उत्तर
सत्य कथन है — (iii) इसका परिमाण कुल चलित दूरी से कम हो सकता है या उसके बराबर हो सकता है।
तालिका के आँकड़ों पर एक-एक कथन जाँचिए —
(i) असत्य — अंतिम पंक्ति में गेंद वापस O पर है और विस्थापन ठीक 0 cm है।
(ii) असत्य — C पर विस्थापन 80 cm है जबकि चलित दूरी 200 cm। विस्थापन कभी अधिक हो ही नहीं सकता, क्योंकि यह तो दोनों स्थितियों के बीच की सीधी दूरी मात्र है।
(iii) सत्य — A पर दोनों 40 cm हैं (बराबर); गेंद के पलटने के बाद हर जगह विस्थापन कम है।
(iv) असत्य — इसमें "सभी स्थितियों में" कहा गया है, जबकि A पर दोनों बराबर हैं, अतः "कम" हर स्थिति में लागू नहीं होता।
ऐसा क्यों होता है: दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा मार्ग उन्हें मिलाने वाली सरल रेखा होती है। विस्थापन वही सीधी दूरी है, जबकि चलित दूरी वास्तव में अपनाए गए मार्ग की लंबाई। कोई मार्ग सीधी रेखा से छोटा हो नहीं सकता, इसलिए विस्थापन का परिमाण ≤ चलित दूरी — और बराबरी तभी, जब मार्ग स्वयं वही सीधी रेखा हो, अर्थात वस्तु कभी लौटे नहीं।