कक्षा ४ गणित अध्याय 11 आइए करते हैं के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
चरण 1 — एक कागज लीजिए और उसे आधे से मोड़िए। चरण 2 — अब कागज को खोलिए और मोड़ के केंद्र में जलरंगों की कुछ बूँदें छिड़किए। चरण 3 — कागज को फिर से मोड़िए और रंगों को समान रूप से फैलाने के लिए इसे हल्के से दबाइए। चरण 4 — देखिए आपने क्या बना दिया!
उत्तर
चारों चरण इसी क्रम में कीजिए।
एक सादा कागज लीजिए। उसे आधे से मोड़िए और मोड़ को अच्छी तरह दबाइए।
कागज खोलिए। मोड़ की रेखा के पास जलरंग की कुछ बूँदें डालिए।
उसी मोड़ पर कागज फिर से मोड़िए और हथेली से हल्के-हल्के दबाइए।
अब खोलिए। रंग मोड़ के दोनों ओर फैल गया है।
नमूना उत्तर: चरण 4 के बाद बनी स्याही की अभिकल्पना।
ऐसा क्यों होता है: रंग अभी गीला था, इसलिए ऊपर वाले भाग ने अपनी छाप नीचे वाले भाग पर छोड़ दी।
संकेत: केवल 4–5 बूँदें ही डालिए। अधिक रंग डालने से एक बड़ा धब्बा बन जाता है।
प्र2.
क्या यह एक सममित आकृति है?ऊपर की गतिविधि में बनी स्याही की अभिकल्पना।
उत्तर
हाँ, यह एक सममित आकृति है।
कागज मोड़कर और दबाकर बनी स्याही की अभिकल्पना।
अभिकल्पना को देखिए। मोड़ के बाईं ओर जो है, वही दाईं ओर भी उसी जगह है।
ऐसा क्यों होता है: गीला रंग एक भाग से दूसरे भाग पर दबाया गया था, इसलिए दोनों भाग एक-दूसरे की नकल हैं।
स्वयं जाँचिए: कागज को उसी रेखा पर फिर मोड़िए। दोनों रंगीन भाग ठीक एक-दूसरे पर आ जाएँगे।
प्र3.
इस अभिकल्पना (डिजाइन) को दो समान भागों में बाँटने के लिए आप कहाँ रेखा खींचेंगे?स्याही की अभिकल्पना, जिस पर अभी कोई रेखा नहीं खींची गई है।
उत्तर
रेखा मोड़ के साथ खींचिए — कागज के ठीक बीच से सीधी नीचे।
कागज के मोड़ पर खींची गई बिंदुदार रेखा।
मोड़ की रेखा ही अभिकल्पना की बीच वाली रेखा है। अभिकल्पना का बायाँ भाग = दायाँ भाग
ऐसा क्यों होता है: अभिकल्पना एक भाग को दूसरे पर दबाकर बनी थी। इसलिए केवल मोड़ ही इसे दो बराबर भागों में बाँट सकता है।
प्र4.
क्या यह वही रेखा है जो सममित रेखा कहलाती है? मैंने कक्षा 3 में मुखौटे और रंगोलियाँ बनाते समय भी इसे बनाया था।
उत्तर
हाँ, दीक्षा ठीक कह रही है। बीच की यह रेखा ही सममिति रेखा कहलाती है।
स्याही की अभिकल्पना की सममिति रेखा।
कोई आकृति सममित तब होती है जब मोड़ने पर उसके दोनों भाग एक-दूसरे पर आ जाएँ।
जिस मोड़ से ऐसा होता है, वही उसकी सममिति रेखा है।
मुखौटे, रंगोलियाँ, मोतियों की मालाएँ और कई भवन इसी तरह बनते हैं।
ऐसा क्यों होता है: सममिति रेखा वही मोड़ है जिससे दोनों भाग मिल जाते हैं। कक्षा 3 में दीक्षा ने मुखौटे का कागज इसी तरह मोड़ा था।