कक्षा ४ गणित अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
पहचान कीजिए कि निम्नलिखित संख्याओं में से कौन-सी सम संख्या और कौन-सी विषम संख्या है? अपने उत्तर के लिए तर्क दीजिए।
3046786730015441599
पृष्ठ 38 पर दी गई आठ संख्याएँ।
विषम संख्याएँ : ................. सम संख्याएँ : .................
उत्तर
3046786730015441599
पृष्ठ 38 पर दी गई आठ संख्याएँ।

हर संख्या का केवल अंतिम अंक देखिए।

30सम46सम78सम67विषम300सम154सम415विषम99विषम
वही आठ संख्याएँ, हर एक की पहचान के साथ।
विषम संख्याएँ67, 415, 99
सम संख्याएँ30, 46, 78, 300, 154

मेरा तर्क, एक-एक करके:

  • 30 के अंत में 0 है — सम। 46 के अंत में 6 है — सम। 78 के अंत में 8 है — सम।
  • 300 के अंत में 0 है — सम। 154 के अंत में 4 है — सम।
  • 67 के अंत में 7 है — विषम। 415 के अंत में 5 है — विषम। 99 के अंत में 9 है — विषम।
ऐसा क्यों होता है: हर दहाई और हर सैकड़ा अपने आप युग्मों में बँट जाता है। इसलिए केवल बची हुई इकाइयाँ तय करती हैं कि कोई अकेला बचेगा या नहीं।
संकेत: बड़ी संख्या का सम होना ज़रूरी नहीं। 300 बड़ी भी है और सम भी, पर 415 बड़ी होकर भी विषम है। आकार से कोई संबंध नहीं।
प्र2.
बिना पुनरावृत्ति किए अंक 1 और अंक 6 का उपयोग करके दो 2-अंकीय संख्याएँ बनाइए।
उत्तर

दोनों संख्याएँ हैं — 16 और 61

दहाई के स्थान पर 1 और इकाई के स्थान पर 6 → 16
दहाई के स्थान पर 6 और इकाई के स्थान पर 1 → 61

‘बिना पुनरावृत्ति’ का अर्थ है कि एक ही अंक दो बार नहीं लगाना। इसलिए 11 और 66 नहीं बनाए जा सकते।

ऐसा क्यों होता है: दो अलग अंकों के लिए भरने को केवल दो स्थान हैं, इसलिए उन्हें सजाने के केवल दो ही तरीके हैं।
संकेत: 16 और 61 में अंक वही हैं, पर संख्याएँ अलग हैं। अंक का स्थान ही उसका मान तय करता है।
प्र3.
सम या विषम संख्याओं को पहचानिए। अब कोई 2 अंक चुनिए और उनसे 2-अंकीय सम संख्याएँ बनाइए।
उत्तर

पहले 1 और 6 से बनी दोनों संख्याओं की पहचान कीजिए:

16 के अंत में 6 → सम
61 के अंत में 1 → विषम

अब ऐसे दो अंक चुनिए जिनसे दोनों तरह की संख्याएँ सम बनें। इसके लिए दोनों सम अंक चुनिए।

नमूना उत्तर: अंक 2 और 4 लीजिए।

2 और 4 → 24 और 42
24 के अंत में 4 → सम
42 के अंत में 2 → सम

ये जोड़े भी काम करते हैं — 4 और 6 से 46, 64; 6 और 8 से 68, 86; 2 और 8 से 28, 82।

ऐसा क्यों होता है: संख्या तभी सम होती है जब उसका इकाई अंक सम हो। यदि दोनों अंक सम हैं, तो इकाई के स्थान पर कोई भी आए, संख्या सम ही रहेगी।
स्वयं जाँचिए: 3 और 5 लीजिए। बनेंगी 35 और 53 — दोनों विषम। दो विषम अंकों से 2-अंकीय सम संख्या कभी नहीं बनती।
प्र4.
1 से 100 तक की संख्याओं में सम संख्याएँ अधिक हैं या विषम?
उत्तर

दोनों बराबर हैं। सम संख्याएँ भी उतनी ही हैं जितनी विषम संख्याएँ।

सम: 2, 4, 6, 8 … 98, 100 → 50 संख्याएँ
विषम: 1, 3, 5, 7 … 97, 99 → 50 संख्याएँ
50 + 50 = 100

इसे सबसे अच्छे से तब देखा जा सकता है जब संख्याएँ दो-दो करके लिखी जाएँ, जैसे पुस्तक के मोम रंग (क्रेयॉन) पर लिखी हैं।

1234567891011121314151617181920. . .99100
पुस्तक का मोम रंग (क्रेयॉन), जिस पर 1 से 100 तक की संख्याएँ दो-दो करके लिखी हैं।

बाएँ स्तंभ में सारी विषम संख्याएँ हैं और दाएँ स्तंभ में सारी सम संख्याएँ। दोनों स्तंभ बराबर लंबे हैं, इसलिए दोनों तरह की संख्याएँ बराबर हैं।

ऐसा क्यों होता है: संख्याएँ विषम, सम, विषम, सम … बारी-बारी से चलती हैं। 1 से शुरू होकर किसी सम संख्या पर समाप्त होने वाली गिनती में हर विषम संख्या को ठीक बाद वाली एक सम संख्या साथी के रूप में मिल जाती है।
संकेत: यदि 1 और 100 को छोड़कर केवल बीच की संख्याएँ लें, तो 49 विषम और 49 सम मिलेंगी — तब भी दोनों बराबर।
प्र5.
अब शिव यह सोच रहा है कि किसी सम संख्या से पहले और बाद की दोनों संख्याएँ विषम होती हैं। आपको क्या लगता है? जाँच कीजिए और चर्चा कीजिए।
उत्तर

शिव सही सोच रहा है। किसी सम संख्या से ठीक पहले और ठीक बाद की दोनों संख्याएँ विषम होती हैं।

कुछ संख्याओं से जाँच कीजिए:

पहलेसम संख्याबाद में
7 (विषम)89 (विषम)
19 (विषम)2021 (विषम)
45 (विषम)4647 (विषम)
99 (विषम)100101 (विषम)

शर्ली ने इसी नियम का दूसरा आधा भाग पहले ही देख लिया था — किसी विषम संख्या से पहले और बाद की दोनों संख्याएँ सम होती हैं। जैसे 6, 7, 8।

… 6 7 8 9 10 11 12 …
सम विषम सम विषम सम विषम सम
ऐसा क्यों होता है: सम समूह में एक सिक्का जोड़ने पर वह अकेला रह जाता है, और सम समूह से एक सिक्का हटाने पर भी एक अकेला रह जाता है। इसलिए दोनों पड़ोसी विषम ही होंगे।
स्वयं जाँचिए: 10 कंकड़ लेकर 5 युग्म बनाइए। एक कंकड़ और जोड़िए — उसका कोई साथी नहीं। 10 में से दो हटाइए — 8 बचेंगे और सब फिर युग्मों में।
प्र6.
किसी भी बीच की संख्या को छोड़े बिना किन्हीं 10 लगातार संख्याओं को चुनिए। प्रत्येक संख्या के नीचे लिखिए कि वह सम है या विषम। क्या आपको कोई ध्यान देने वाली बात दिखी? चर्चा कीजिए।
2021
पुस्तक में दी गई दस गोलों की पट्टी। पहले दो गोले भरे हुए हैं।
उत्तर
2021
पुस्तक में दी गई दस गोलों की पट्टी। पहले दो गोले भरे हुए हैं।

पुस्तक में पट्टी 20 और 21 से शुरू की गई है। बिना कोई संख्या छोड़े आगे बढ़िए।

20सम21विषम22सम23विषम24सम25विषम26सम27विषम28सम29विषम
पट्टी भरी हुई, हर संख्या के नीचे उसकी पहचान।
संख्या20212223242526272829
सम या विषमसमविषमसमविषमसमविषमसमविषमसमविषम

ध्यान देने वाली बातें:

  • सम और विषम बारी-बारी से आते हैं — कभी दो सम साथ नहीं, कभी दो विषम साथ नहीं।
  • दस संख्याओं में 5 सम और 5 विषम हैं।
  • कहीं से भी शुरू कीजिए, यही होता है। 37 से शुरू कीजिए तो विषम, सम, विषम, सम … मिलेगा।
ऐसा क्यों होता है: संख्या में 1 जोड़ने पर या तो अकेले सिक्के को साथी मिल जाता है, या एक नया सिक्का अकेला रह जाता है। इसलिए हर कदम पर प्रकार बदलना ही पड़ता है।
यह कीजिए: अपनी पट्टी किसी विषम संख्या से शुरू कीजिए, जैसे 45। तब पहली, तीसरी, पाँचवीं … संख्याएँ सम के बदले विषम होंगी, पर बारी-बारी का क्रम वही रहेगा।
क्या यह उपयोगी रहा?