कक्षा ४ गणित अध्याय 3 रंगीन मोम रंगों (क्रेयॉन्स) की सजावट के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
प्रत्येक विषम संख्या पर गोला लगाइए और सम संख्या के चारों ओर बॉक्स बनाइए। यदि आवश्यकता हो तो मोम रंग का उपयोग कीजिए।पृष्ठ 37 पर दी गई ग्यारह संख्याएँ। इनमें से दो पर निशान पहले से लगा है।पुस्तक का मोम रंग (क्रेयॉन), जिस पर 1 से 100 तक की संख्याएँ दो-दो करके लिखी हैं।
उत्तर
पृष्ठ 37 पर दी गई ग्यारह संख्याएँ। इनमें से दो पर निशान पहले से लगा है।
हर संख्या का इकाई अंक देखिए और फिर निशान लगाइए।
हर संख्या पर निशान — विषम पर गोला, सम पर बॉक्स।
गोला लगाइए (विषम)
5, 51, 37, 43, 69
बॉक्स बनाइए (सम)
8, 36, 22, 30, 38, 52
पुस्तक में 5 पर गोला और 8 पर बॉक्स पहले से बना है। इसलिए आपको शेष नौ संख्याओं पर निशान लगाना है — 36, 69, 22, 51, 30, 38, 37, 52, 43।
मोम रंग (क्रेयॉन) की सजावट से मदद मिलती है। संख्या को क्रेयॉन पर ढूँढ़िए — बाएँ स्तंभ में हो तो विषम, दाएँ स्तंभ में हो तो सम।
पुस्तक का मोम रंग (क्रेयॉन), जिस पर 1 से 100 तक की संख्याएँ दो-दो करके लिखी हैं।
ऐसा क्यों होता है: दहाइयाँ अपने आप युग्मों में बँट जाती हैं, इसलिए केवल इकाई का अंक निर्णय करता है। 52 में 5 दहाई और 2 इकाई हैं; 2 इकाइयाँ एक युग्म बना लेती हैं, कुछ नहीं बचता।
संकेत: बड़ी संख्या को दो-दो करके गिनने की ज़रूरत नहीं। अंगूठे से दहाइयाँ ढककर केवल अंतिम अंक देख लीजिए।
प्र2.
चर्चा कीजिए कि कौन-सी संख्याएँ सम हैं और कौन-सी विषम।पृष्ठ 37 पर दी गई ग्यारह संख्याएँ। इनमें से दो पर निशान पहले से लगा है।
उत्तर
पृष्ठ 37 पर दी गई ग्यारह संख्याएँ। इनमें से दो पर निशान पहले से लगा है।
सम संख्याएँ
8, 22, 30, 36, 38, 52
विषम संख्याएँ
5, 37, 43, 51, 69
कक्षा में बताइए कि आपने कैसे तय किया। कारण इस तरह दीजिए:
22, 30, 36, 38, 52 और 8 के अंत में 2, 0, 6, 8, 2 और 8 हैं। ये अंक सम हैं, इसलिए ये संख्याएँ सम हैं।
37, 43, 51, 69 और 5 के अंत में 7, 3, 1, 9 और 5 हैं। ये अंक विषम हैं, इसलिए ये संख्याएँ विषम हैं।
52 → 5 दहाई और 2 इकाई → 2 इकाइयों का 1 युग्म बना → सम 51 → 5 दहाई और 1 इकाई → उस 1 इकाई का कोई साथी नहीं → विषम
ऐसा क्यों होता है: दस 5 युग्मों का बना होता है, इसलिए हर दहाई पूरी तरह युग्मों में बँट जाती है। केवल बची हुई इकाइयाँ ही युग्मन बिगाड़ सकती हैं।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण गाड़ी का नंबर, घर का नंबर या बस का नंबर केवल अंतिम अंक देखकर सम या विषम बताया जा सकता है।
प्र3.
अपनी गणित की पाठ्यपुस्तक का अवलोकन कीजिए और पता कीजिए कि शर्ली ने क्या देखा है। सम संख्याओं पर बॉक्स एवं विषम संख्याओं पर गोला बनाइए।
उत्तर
खुली हुई गणित की पुस्तक। पृष्ठ संख्या हर पृष्ठ के नीचे लिखी होती है।
शर्ली ने यह देखा: उसकी गणित की पुस्तक में हर बाएँ पृष्ठ की संख्या सम है और हर दाएँ पृष्ठ की संख्या विषम है।
इसे आप स्वयं कीजिए:
इस पुस्तक को कहीं से भी खोलकर सीधा रखिए।
बाएँ पृष्ठ के नीचे लिखी संख्या पढ़िए — जैसे 36। उस पर बॉक्स बनाइए।
दाएँ पृष्ठ की संख्या पढ़िए — 37। उस पर गोला बनाइए।
ऐसा क्यों होता है: कागज़ के हर पन्ने के दो पृष्ठ होते हैं। आगे वाला पृष्ठ दायाँ होता है और पीछे वाला अगला बायाँ, इसलिए संख्याएँ बारी-बारी से बदलती रहती हैं।
यह कीजिए: कोई कहानी की पुस्तक और अख़बार भी देखिए। हर छपी हुई पुस्तक में यही नियम मिलेगा।