कक्षा ४ गणित अध्याय 8 दैनिक जीवन में जल संरक्षण के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आपने कभी अपने नल अथवा जल-शोधक (वाटर प्यूरिफायर) से टपकती हुई पानी की बूँदों को देखा है? क्या आपने कभी सोचा है कि इस प्रकार धीरे-धीरे टपकने से कितनी मात्रा में पानी व्यर्थ हो जाता है?
उत्तर

हाँ, धीरे-धीरे टपकती बूँदों पर ध्यान नहीं जाता, पर वे कभी रुकती नहीं।

लगभग 10 बूँदें मिलकर 1 मि.ली. बनती हैं
धीरे टपकता नल एक मिनट में लगभग 40 बार टपकता है
अर्थात् एक मिनट में लगभग 4 मि.ली. पानी व्यर्थ

एक बूँद कुछ भी नहीं लगती, पर वह दिन-रात टपकती रहती है। धीमा रिसाव भी प्रतिदिन कई लीटर पानी व्यर्थ कर देता है।

ऐसा क्यों होता है: बूँद बहुत छोटी होती है, पर बूँदें आना बंद नहीं होता। छोटी-छोटी मात्राएँ बार-बार जुड़कर बड़ी मात्रा बन जाती हैं।
संकेत: टपकता नल दिखते ही बड़ों को बताइए। नई वाशर बहुत सस्ती आती है और बहुत पानी बचाती है।
प्र2.
एक खाली पात्र लीजिए और उसे टपकने वाले नल के अथवा जल-शोधक के नीचे एक घंटे के लिए रख दीजिए। देखिए, केवल धीमी बूँदों के रिसाव से ही एक घंटे में कितनी मात्रा में जल का अपव्यय होता है। क्या यह देखकर आप चकित हुए?
उत्तर

यह गतिविधि इस प्रकार कीजिए:

  1. टपकते नल के नीचे एक खाली मापक बोतल रखिए।
  2. समय देखिए और उसे ठीक एक घंटे तक वहीं रहने दीजिए।
  3. एक घंटे बाद बोतल पर पानी का स्तर पढ़िए।

नमूना उत्तर: एक घंटे बाद मेरी बोतल में 250 मि.ली. के निशान तक पानी भर गया था।

1 घंटे में व्यर्थ हुआ पानी = 250 मि.ली.
अर्थात् एक पूरा गिलास — और वह भी बंद नल से!

हाँ, यह देखकर आश्चर्य होता है। जिस नल का कोई प्रयोग ही नहीं कर रहा, वह भी हर घंटे एक गिलास पानी बहा देता है।

ऐसा क्यों होता है: बूँदें लगातार जुड़ती रहती हैं। एक घंटे में 60 मिनट होते हैं और हर मिनट कुछ और मिलीलीटर पानी बोतल में गिर जाता है।
संकेत: आपका उत्तर 250 मि.ली. से कम या अधिक हो सकता है। जो आपकी बोतल सचमुच दिखाए, वही लिखिए।
प्र3.
अब अनुमान लगाइए कि एक दिन में कितनी मात्रा में पानी व्यर्थ होता है?
उत्तर

एक घंटे में 250 मि.ली. व्यर्थ हुआ। एक दिन में 24 घंटे होते हैं।

1 घंटा = 250 मि.ली.
4 घंटे = 250 + 250 + 250 + 250 = 1000 मि.ली. = 1 ली.
24 घंटे = 4 घंटे, छह बार
अत: 1 दिन = 1 ली. छह बार = 6 ली.

केवल एक धीमे रिसाव से एक दिन में लगभग 6 लीटर पानी व्यर्थ हो जाता है।

ऐसा क्यों होता है: चार घंटे में एक लीटर भरता है और चौबीस में चार छह बार आता है। इसलिए एक दिन में छह लीटर पानी व्यर्थ होता है।
संकेत: 6 लीटर लगभग आधी बाल्टी होती है। इतना साफ पानी एक बिना ठीक किए नल से प्रतिदिन बह जाता है।
प्र4.
एक सप्ताह में कितना पानी व्यर्थ होगा?
उत्तर

एक सप्ताह में 7 दिन होते हैं और हर दिन लगभग 6 ली. पानी व्यर्थ होता है।

6 ली. + 6 ली. + 6 ली. + 6 ली. + 6 ली. + 6 ली. + 6 ली.
6, 12, 18, 24, 30, 36, 42
अत: एक सप्ताह = 42 ली.

एक सप्ताह में लगभग 42 लीटर पानी व्यर्थ हो जाता है।

ऐसा क्यों होता है: हर दिन वही 6 लीटर पानी व्यर्थ होता है, इसलिए हम 6 को सात बार जोड़ते हैं — सप्ताह के हर दिन के लिए एक बार।
संकेत: 42 लीटर लगभग तीन भरी बाल्टियाँ हैं। इतने पानी से एक परिवार स्नान कर सकता है।
प्र5.
पानी के इस अपव्यय का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर

व्यर्थ बहा पानी केवल उसी का नुकसान नहीं करता जिसका नल टपक रहा है, बल्कि सबका करता है।

  • कुएँ, तालाब और टंकियाँ जल्दी सूख जाते हैं, जिससे सबके लिए पानी कम पड़ता है।
  • नल तक पहुँचने से पहले पानी को खींचना और साफ करना पड़ता है। पानी व्यर्थ करने से वह मेहनत और बिजली भी व्यर्थ जाती है।
  • किसानों को फसलों के लिए कम पानी मिलता है, जिससे अनाज कम उगता है।
  • पशु-पक्षियों को पीने का पानी कम मिलता है।
  • गर्मियों में नल दिन में केवल एक घंटे ही आ पाते हैं।
एक नल एक सप्ताह में 42 ली. पानी व्यर्थ करता है
ऐसे 10 नल एक सप्ताह में 42 × 10 = 420 ली. पानी व्यर्थ करेंगे
ऐसा क्यों होता है: पृथ्वी के पानी का बहुत थोड़ा भाग ही साफ और पीने योग्य है। एक बार व्यर्थ हो जाने पर हम उसे फिर से नहीं बना सकते।
संकेत: तीन आसान आदतें: दाँत साफ करते समय नल बंद रखिए, बाल्टी से स्नान कीजिए और हर टपकते नल की मरम्मत कराइए।
क्या यह उपयोगी रहा?