प्र1.
ऐसे कौन-कौन से उपाय हैं, जिनसे हम प्रकृति का और अपने आस-पड़ोस का ध्यान रख सकते हैं? कुछ उपाय सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर
हम प्रकृति और आस-पड़ोस का ध्यान छोटे-छोटे कामों से रखते हैं, जिन्हें बार-बार करना पड़ता है।
- पौधे लगाइए और जब तक वे बड़े न हो जाएँ, उन्हें पानी देते रहिए — जैसे बच्चों ने वन महोत्सव पर किया।
- बिना कारण टहनियाँ, फूल और पत्ते न तोड़िए।
- कूड़ा केवल कूड़ेदान में डालिए, और सूखा तथा गीला कूड़ा अलग-अलग रखिए।
- पत्ते और बचा हुआ भोजन गड्ढे में डालिए। वे खाद बन जाते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
- दाँत साफ करते समय नल बंद रखिए और टपकता नल तुरंत ठीक करवाइए।
- कमरे से निकलते समय पंखे और बत्तियाँ बंद कर दीजिए।
- बाजार जाते समय कपड़े का थैला ले जाइए, जिससे प्लास्टिक की थैली घर न आए।
- गर्मी में पक्षियों के लिए पानी रखिए और उनके घोंसलों को न छेड़िए।
- टूटे प्रकाश स्तंभ, भरे कूड़ेदान या टपकते पाइप के बारे में किसी बड़े को बताइए।
- मित्रों के साथ अपने उद्यान या गली में स्वच्छता अभियान चलाइए।
यह क्यों काम करता है: प्रकृति और आस-पड़ोस सबका है। एक बच्चा एक पौधे को पानी दे तो वह बहुत छोटा काम लगता है — पर तीस बच्चे तीस पौधों को पानी दें तो सूना उद्यान हरा-भरा हो जाता है।