प्र1.
अपने परिवार के बड़ों से चर्चा कीजिए और नीचे दी गई तालिका में पौधे और उसके भागों का नाम तथा उसका उपयोग लिखिए।
पुस्तक में छपी तालिका, जिसमें पहले दो पौधों के नाम पहले से भरे हैं।
| पौधे का नाम | पौधे का भाग | उपयोग |
|---|---|---|
| तुलसी | पत्तियाँ | |
| अजवाइन | ||
उत्तर
घर के बड़ों से पूछिए कि बीमार होने पर वे किन पौधों का उपयोग करते हैं। फिर तालिका भरिए।
| पौधे का नाम | पौधे का भाग | उपयोग |
|---|---|---|
| तुलसी | पत्तियाँ | |
| अजवाइन | ||
क्या कीजिए
- अपनी माँ, पिताजी या दादा-दादी से घरेलू उपचारों के बारे में पूछिए।
- हर उपचार में पूछिए कि पौधे का कौन-सा भाग काम आता है — पत्ती, बीज, जड़ या छाल।
- पौधे का नाम, उसका भाग और उपयोग लिखिए।
नमूना उत्तर:
| पौधे का नाम | पौधे का भाग | उपयोग |
|---|---|---|
| तुलसी | पत्तियाँ | खाँसी-जुकाम में चाय में उबालकर या चबाकर |
| अजवाइन | बीज | पेट दर्द में पानी में उबालकर |
| नीम | पत्तियाँ और तेल | पत्तियाँ अनाज के साथ रखी जाती हैं; नीम का तेल मच्छरों को दूर रखता है |
| अदरक | भूमिगत तना | गले की खराश और खाँसी में चाय में डालकर |
| हल्दी | जड़ | गरम दूध में मिलाकर; छोटी चोट पर लेप लगाकर |
यह क्यों महत्वपूर्ण है: कई दवाइयाँ पौधों से ही बनती हैं। अलग-अलग भागों में अलग गुण होते हैं — तुलसी की पत्ती, अजवाइन का बीज और हल्दी की जड़। इसीलिए भाग का नाम लिखना ज़रूरी है।
सुझाव: पाठ में भी यही दिखता है। दादाजी की बोतल में नीम के तेल का मिश्रण है, जिसे हाथ-पैर पर लगाने से मच्छर नहीं काटते।