प्र1.
अपने क्षेत्र के पारंपरिक नृत्य और गीतों का पता लगाइए। अपने सहपाठियों और शिक्षकों की सहायता से अपने विद्यालय के वार्षिक दिवस पर एक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
पहले पता लगाइए, फिर अभ्यास कीजिए, फिर प्रस्तुत कीजिए। तरीका यह है।
क्या कीजिए
- अपने दादा-दादी और शिक्षक से अपने क्षेत्र के नृत्य का नाम पूछिए।
- पूछिए कि यह नृत्य कब किया जाता है — फसल कटाई पर, पर्व पर या विवाह में।
- उसकी पोशाक और वाद्ययंत्रों का पता लगाइए, जैसे ढोल और नगाड़ा।
- उसके साथ गाया जाने वाला गीत सीखिए। दो-तीन पंक्तियाँ लिख लीजिए।
- छह से आठ साथियों का समूह बनाकर मिलकर अभ्यास कीजिए।
- शिक्षक की सहायता से वार्षिक दिवस पर प्रस्तुत कीजिए।
नमूना उत्तर — भारत के कुछ पारंपरिक नृत्य:
| नृत्य | राज्य | कब किया जाता है |
|---|---|---|
| बिहू | असम | बिहू के फसल पर्व पर |
| गरबा | गुजरात | नवरात्रि में |
| भांगड़ा | पंजाब | बैसाखी पर, फसल कटने के बाद |
| घूमर | राजस्थान | पर्वों और विवाहों में |
| लावणी | महाराष्ट्र | मेलों और पर्वों में |
| करमा / छऊ | झारखंड, ओडिशा | बुआई और फसल कटाई के समय |
फसल के समय इतने नृत्य क्यों: अच्छी फसल प्रकृति का उपहार है। लोग उसके लिए धन्यवाद देने को नाचते और गाते हैं। पाठ में भी गाँव के लोग पहले ईश्वर और प्रकृति माँ की प्रार्थना करते हैं, तभी ढोल और नगाड़े बजते हैं।
सुझाव: पहली पंक्ति में अपने ही राज्य का नृत्य लिखिए। ऊपर की तालिका केवल नमूना है।