कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 6 गतिविधि 4 और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
अन्न के प्रत्येक दाने का महत्व होता है। क्या आप अपनी थाली में परोसे गए खाने के प्रत्येक दाने को खाते हैं?
उत्तर

इसका उत्तर सच्चाई से दीजिए — हाँ या नहीं। फिर अगले भोजन के बाद अपनी थाली को ध्यान से देखिए।

नमूना उत्तर: हाँ, अधिकतर दिन मैं अपनी थाली का पूरा भोजन कर लेता हूँ। कुछ दिन थोड़े चावल बच जाते हैं। तब अगली बार मैं कम चावल लेता हूँ।

महत्वपूर्ण यह है कि आप आगे क्या करते हैं।

  • पहले थोड़ा-सा भोजन लीजिए।
  • भूख शेष रहने पर ही और माँगिए।
क्यों: जब हम खाना व्यर्थ करते हैं तो हम उन सभी व्यक्तियों के परिश्रम के प्रति असम्मान दिखाते हैं, जिनके कारण हमें भोजन प्राप्त हुआ है।
प्र2.
अपने एक सप्ताह के सुबह, दोपहर और रात के भोजन को अभिलेखित कीजिए। प्रत्येक भोजन के बाद नीचे दी गई तालिका में प्रविष्टि भरिए। यदि आपने अपनी थाली का पूरा खाना खा लिया है, तो ‘हाँ’ लिखिए और एक प्रसन्न मुद्रा संकेत बनाइए। यदि आपने कुछ खाना छोड़ दिया है, तो ‘नहीं’ लिखिए और एक दुखित मुद्रा संकेत बनाइए।
दिनसुबह का भोजनदोपहर का भोजनरात का भोजनक्या आपने पूरा भोजन कर लिया?क्या आपने भोजन व्यर्थ किया?आपको कैसी अनुभूति हुई?
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पृष्ठ 93 पर दी गई तालिका। हर दिन के बाद एक पंक्ति भरिए।
उत्तर

यह एक सप्ताह तक घर पर की जाने वाली गतिविधि है।

  1. तालिका को वहीं रखिए जहाँ आप भोजन करते हैं।
  2. प्रत्येक भोजन के बाद लिखिए कि आपने क्या खाया।
  3. पूरा भोजन कर लेने पर ‘हाँ’ लिखिए और प्रसन्न मुद्रा संकेत बनाइए।
  4. कुछ भोजन छोड़ने पर ‘नहीं’ लिखिए और दुखित मुद्रा संकेत बनाइए।
  5. अंतिम खाने में लिखिए कि आपको कैसी अनुभूति हुई — अच्छा लगा, बुरा लगा या पेट भर गया।
  6. सात दिन बाद गिनिए कि कितनी पंक्तियों में ‘नहीं’ लिखा है।
दिनसुबह का भोजनदोपहर का भोजनरात का भोजनक्या आपने पूरा भोजन कर लिया?क्या आपने भोजन व्यर्थ किया?आपको कैसी अनुभूति हुई?
1.पोहा और दूधचावल, दाल, भिंडीदो रोटी, दहीहाँ 🙂नहींअच्छा लगा
2.इडली और सांभररोटी, राजमा, सलादखिचड़ीनहीं 🙁हाँ, थोड़े चावलबुरा लगा
3.पराठा और दहीचावल, दाल, लौकीदो रोटी, सब्ज़ीहाँ 🙂नहींअच्छा लगा
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पहली तीन पंक्तियों का एक नमूना।

आपको क्या मिलेगा: सप्ताह बीतते-बीतते दुखित मुद्रा संकेतों की संख्या घटती जाएगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अब आप उतना ही भोजन लेने लगेंगे जितना आप खा सकते हैं।

क्यों: लिखकर रखने से हमें अपनी आदत दिखाई देने लगती है। जो आदत दिखाई देती है, उसे बदला जा सकता है।
प्र3.
आप क्या करेंगे — यदि कोई आपको आवश्यकता से अधिक भोजन परोसे?
उत्तर

विनम्रता से कहिए: ‘धन्यवाद, मेरे लिए इतना पर्याप्त है।’

  • पहले थोड़ा-सा भोजन लीजिए।
  • भूख शेष रहने पर ही और माँगिए।
  • केवल देखने में अच्छा लगने के कारण थाली में भोजन मत लीजिए।
क्यों: थाली में छोड़ा गया भोजन फिर से काम में नहीं आ सकता। वह व्यर्थ हो जाता है और उसके साथ किसान, दुकानदार तथा रसोइए का परिश्रम भी।
प्र4.
आप क्या करेंगे — यदि आपको अपनी थाली में रखा हुआ कोई खाद्य पदार्थ पसंद नहीं है?
उत्तर

उसे फेंकिए मत। ये तीन बातें कीजिए।

  1. परोसने से पहले ही विनम्रता से कह दीजिए कि आपको वह पदार्थ थोड़ा-सा ही चाहिए।
  2. उसे थोड़ा चखिए। बड़े होने के साथ हमारा स्वाद बदलता है और कई नापसंद चीज़ें अच्छी लगने लगती हैं।
  3. यदि आप सचमुच नहीं खा सकते, तो थाली से खाना आरंभ करने से पहले वह पदार्थ घर के किसी ऐसे सदस्य को दे दीजिए जिसे वह पसंद है।
क्यों: उस भोजन को आपकी थाली तक पहुँचाने में अनेक लोगों ने परिश्रम किया है। उसे छोड़ देने से वह सारा परिश्रम व्यर्थ चला जाता है।
सुझाव: अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थों वाली थाली हमें स्वस्थ रखती है। इसलिए हर बार किसी नए पदार्थ का एक कौर चखना अच्छा रहता है।
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