कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 9 चर्चा कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
आपके अनुसार सिक्किम में पारंपरिक घर लकड़ी से क्यों बनाए जाते हैं और उनकी छतें तिरछी क्यों होती हैं?
उत्तर
पृष्ठ 147–148 में दिखाए गए जैसा एक पारंपरिक घर — लकड़ी की दीवारें, चौड़ी खिड़कियाँ और दोनों ओर ढलती हुई छत, ऊपर प्रार्थना-ध्वज।
इसके दो अलग-अलग कारण हैं — एक लकड़ी का और एक तिरछी छत का।
लकड़ी इसलिए उपयोग होती है क्योंकि वहीं ओक, चीड़, अखरोट और शाहबलूत जैसे अनेक पेड़ उगते हैं, इसलिए लकड़ी सरलता से मिल जाती है और पहाड़ पर ले जाना भी आसान होता है। लकड़ी घर के भीतर को गरम भी रखती है।
तिरछी छतें इसलिए बनाई जाती हैं कि वर्षा का पानी और बर्फ उन पर से सीधे नीचे फिसल जाएँ और ऊपर कुछ जमा न हो।
सपाट छत क्यों नहीं: सपाट छत पर बर्फ और पानी इकट्ठा होते रहते। बोझ बढ़ता जाता, पानी भीतर रिसता और छत गिर भी सकती थी।
प्र2.
क्या आपके घर में कोई ऐसी विशेषता है जो पहाड़ों के घरों जैसी है?
उत्तर
अपने घर को देखिए और पुस्तक के चित्र से उसकी तुलना कीजिए।
छत सपाट है या ढलानदार?
वह किससे बनी है — लकड़ी, ईंट, सीमेंट, टीन की चादर, खपरैल या फूस?
खिड़कियाँ बड़ी हैं या छोटी? क्या बरामदा है?
नमूना उत्तर: हाँ, एक बात समान है। मेरे घर की छत टीन की ढलानदार छत है, ठीक पहाड़ी घरों की तरह, क्योंकि मेरे नगर में खूब वर्षा होती है और पानी शीघ्र बह जाना चाहिए। परंतु मेरी दीवारें लकड़ी की नहीं, ईंट की हैं, और खिड़कियाँ बड़ी हैं क्योंकि हमारा मौसम गरम है।
इसके पीछे का विचार: ढलानदार छत वहीं बनाई जाती है जहाँ अधिक वर्षा या बर्फ पड़ती है — चाहे वह पहाड़ हो या वर्षा वाला मैदान। घर का आकार वहाँ के मौसम का उत्तर होता है।
प्र3.
वर्षा ऋतु में पहाड़ों पर भूस्खलन क्यों सामान्य है?
उत्तर
भूस्खलन तब होता है जब मिट्टी और चट्टानें ढलान से नीचे खिसक जाती हैं। वर्षा ऋतु में पहाड़ों पर ऐसा प्राय: होता है।
पहाड़ी ढलानें खड़ी होती हैं, इसलिए मिट्टी और चट्टानें सदा नीचे सरकने को तैयार रहती हैं।
भारी वर्षा से मिट्टी ढीली, नरम और भारी हो जाती है और वह टिक नहीं पाती।
पानी चट्टानों के बीच बहकर उन्हें अलग कर देता है।
जहाँ पेड़ काट दिए गए हों, वहाँ मिट्टी को थामने वाली जड़ें नहीं होतीं, इसलिए वह सरलता से खिसक जाती है।
सड़कों और भवनों के लिए पहाड़ी काटने से भी ढलान कमजोर होती है।
पेड़ कैसे बचाते हैं: पेड़ों की जड़ें अनेक छोटे हाथों की तरह मिट्टी को पकड़े रहती हैं। इसीलिए ढलानों पर पेड़ लगाना भूस्खलन रोकने के सबसे अच्छे उपायों में से एक है।
प्र4.
आपके विचार में भूस्खलन के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्या किया जा सकता है?
उत्तर
कुछ काम वर्षा से पहले किए जाते हैं और कुछ वर्षा के समय।
वर्षा से पहले:
खाली ढलानों पर पेड़ और घास लगाइए, जिससे जड़ें मिट्टी को थामे रहें।
पहाड़ी सड़क के किनारे मजबूत पत्थर की दीवारें बनवाइए।
नालियाँ बनवाइए, जिससे वर्षा का पानी ढलान में रिसने के बजाय बह जाए।
ढीली और खड़ी ढलान के नीचे घर मत बनाइए।
भारी वर्षा के समय:
रेडियो, दूरदर्शन या फ़ोन पर मिलने वाली चेतावनी सुनिए।
तेज वर्षा में पहाड़ी सड़कों पर यात्रा मत कीजिए।
खड़ी ढलानों से दूर हट जाइए और किसी सुरक्षित भवन में रहिए।
टॉर्च, सूखा भोजन, पानी और सहायता नंबर तैयार रखिए।
चेतावनी सबसे महत्वपूर्ण क्यों: भूस्खलन कुछ ही क्षणों में हो जाता है। असली बचाव यही है कि ढलान खिसकने से पहले ही लोग वहाँ से हट जाएँ।
प्र5.
समुदाय उन लोगों की सहायता के लिए क्या कर सकता है जो अपना घर खो देते हैं या प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होते हैं?
उत्तर
समुदाय तुरंत भी सहायता कर सकता है और बहुत समय तक भी।
तुरंत:
विद्यालय या सामुदायिक भवन को शरण-स्थल के रूप में खोल दीजिए।
स्वच्छ पीने का पानी, पका भोजन, वस्त्र और कंबल दीजिए।
घायलों को अस्पताल पहुँचाइए और सहायता नंबर पर सूचना दीजिए।
बंद रास्ता साफ करने और लापता लोगों को खोजने में सहायता कीजिए।
आने वाले सप्ताहों में:
धन, पुस्तकें और बस्ते एकत्र कीजिए, जिससे बच्चे फिर विद्यालय जा सकें।
मिलकर घर बनाने में सहायता कीजिए, जैसे लोग श्रमदान में करते हैं।
काम के साधन लौटाइए — मछुआरों को जाल और नाव, किसानों को बीज।
लोगों के पास बैठिए, उनकी बात सुनिए और उनका साथ दीजिए, क्योंकि वे डरे हुए और दुखी होते हैं।
मिलकर क्यों: आपदा के बाद कोई एक परिवार अकेले सब कुछ नहीं बना सकता। जब अनेक लोग थोड़ा-थोड़ा समय, भोजन या धन देते हैं, तो पूरा गाँव फिर खड़ा हो जाता है। स्वर्ण मंदिर की लंगर सेवा, जहाँ लोग खाना पकाने, परोसने और बर्तन धोने का कार्य स्वेच्छा से करते हैं, यही दिखाती है कि सामुदायिक सेवा कितनी बड़ी शक्ति है।