कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 9 चर्चा कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
पर्वतीय क्षेत्रों की ठंडी जलवायु लोगों के रहन-सहन और वेशभूषा को किस प्रकार प्रभावित करती है?
उत्तर

वहाँ की ठंड दैनिक जीवन की लगभग हर बात तय करती है।

जीवन का भागठंड उसे कैसे बदलती है
वस्त्रबखू, दुमद्यम और गुन्यो चोलो जैसे मोटे ऊनी परिधान, साथ में टोपी, शॉल और बंद जूते
आवासलकड़ी के घर, ढलानदार छतें और छोटी खिड़कियाँ, जिससे गरमी भीतर बनी रहे
भोजनगरम थुकपा और मुलायम सेल रोटी जैसे व्यंजन
जंतुयाक जैसे घने फर वाले जंतु पाले जाते हैं
कामबाहर बहुत ठंड होने पर करघे पर बुनाई और बाँस की टोकरी बनाने जैसे घर के भीतर के काम चलते रहते हैं
ऐसा क्यों: ठंडी हवा में शरीर की गरमी जल्दी निकल जाती है। गरम वस्त्र, गरम घर और गरम भोजन — तीनों एक ही काम करते हैं, शरीर की गरमी को बाहर जाने से रोकते हैं।
प्र2.
आपके क्षेत्र में कौन-से पारंपरिक परिधान पहने जाते हैं? वे किस प्रकार स्थानीय जलवायु के अनुकूल हैं?
उत्तर

यह उत्तर अपने अपने क्षेत्र के लिए दीजिए। दो चरणों में कीजिए।

  1. घर पर पूछिए कि पर्वों और विवाहों में बड़े लोग कौन-से वस्त्र पहनते हैं। वही पारंपरिक परिधान हैं।
  2. अब सोचिए — मेरा क्षेत्र गरम है, ठंडा है, वर्षा वाला है या शुष्क? फिर बताइए कि परिधान उसके अनुकूल कैसे हैं।

नमूना उत्तर: मेरे क्षेत्र में लोग पारंपरिक रूप से सूती धोती या साड़ी के साथ हल्का गमछा पहनते हैं। हमारी गरमी लंबी और तेज होती है, इसलिए पतले सूती वस्त्र सबसे उपयुक्त हैं — उनमें हवा आती-जाती रहती है और धोने पर वे जल्दी सूख जाते हैं।

अध्याय से कुछ और उदाहरण —

  • पंजाब (मैदान): पगड़ी के साथ कुर्ता-पाजामा और दुपट्टे के साथ सलवार-कमीज — गरमी के लिए ढीले सूती वस्त्र।
  • राजस्थान (रेगिस्तान): बाँधनी दुपट्टे के साथ घाघरा और रंग-बिरंगी पगड़ियाँ — ये सिर को तेज धूप और उड़ती रेत से ढँकते हैं।
  • सिक्किम (पहाड़): बखू, दुमद्यम और गुन्यो चोलो — ठंड के लिए मोटे और गरम।
याद रखने योग्य नियम: पारंपरिक परिधान केवल सुंदरता के लिए नहीं चुने जाते। उन्हें वहाँ का मौसम गढ़ता है, इसीलिए वे क्षेत्र-क्षेत्र में अलग होते हैं।
प्र3.
आपके विचार से चीड़ और बांज (ओक) जैसे कुछ पेड़ पहाड़ों में अच्छी तरह से क्यों विकसित होते हैं?
उत्तर

चीड़ और बांज पहाड़ों में इसलिए अच्छी तरह उगते हैं क्योंकि वे ठंडे मौसम और खड़ी, पथरीली भूमि के अनुकूल हैं।

  • ये बहुत ठंडी हवा और बर्फ सह लेते हैं।
  • चीड़ की पत्तियाँ पतली और सुई जैसी होती हैं, इसलिए पेड़ से पानी बहुत कम उड़ता है।
  • चीड़ पतला और नुकीला होता है, इसलिए बर्फ डालियों पर टिकने के बजाय फिसल जाती है और डालियाँ नहीं टूटतीं।
  • ढलान की पतली, पथरीली मिट्टी में भी इनकी जड़ें अच्छी पकड़ बना लेती हैं।
  • बांज का तना मजबूत होता है और जड़ें गहरी जाकर पहाड़ी को थामे रहती हैं।
दूसरे पेड़ क्यों नहीं: चौड़ी और कोमल पत्तियों वाला पेड़ ठंडी सूखी हवा में बहुत पानी खो देता, और भारी बर्फ उसकी चपटी डालियाँ तोड़ देती।
प्र4.
सिक्किम की ठंडी जलवायु में याक जैसे जंतु कैसे जीवित रहते हैं?
उत्तर

याक का शरीर ठंड के लिए ही बना है।

  • उसका शरीर मोटे और लंबे बालों से ढँका रहता है, जो लगभग भूमि तक लटकते हैं और गरम कंबल का काम करते हैं।
  • त्वचा के नीचे चरबी की परत होती है, जो शरीर की गरमी को भीतर रोके रखती है।
  • उसकी टाँगें मजबूत और खुर चौड़े तथा कड़े होते हैं, इसलिए वह चट्टान, बर्फ और खड़ी पगडंडी पर सुरक्षित चल लेता है।
  • वह घास और पहाड़ी पौधे खाता है, जो वहाँ वर्ष के अधिकांश समय मिलते रहते हैं।
लोगों के लिए इसका महत्व: याक मजबूत है और ढलानों पर संभलकर चलता है, इसलिए लोग पहाड़ों में यात्रा के लिए उसका उपयोग करते हैं। नयन ने अपनी दैनंदिनी में लिखा कि उसने याक की सवारी का आनंद लिया और पहाड़ों पर यात्रा के लिए सामान्यत: याक का उपयोग किया जाता है।
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