| किसने | किससे |
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| राजा (कृष्णदेव राय) ने | दरबारियों से |
पहले दरबारी ने कहा था कि तेनाली अभी नहीं आए, लगता है कहीं शतरंज का खेल जमा है। यह सुनकर राजा ने चौंककर दरबारियों से यह प्रश्न पूछा। उत्तर दूसरे दरबारी ने दिया — “हाँ महाराज, वे तो अद्भुत खिलाड़ी हैं।”
अद्यतन2026-09-19
| किसने | किससे |
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| राजा (कृष्णदेव राय) ने | दरबारियों से |
पहले दरबारी ने कहा था कि तेनाली अभी नहीं आए, लगता है कहीं शतरंज का खेल जमा है। यह सुनकर राजा ने चौंककर दरबारियों से यह प्रश्न पूछा। उत्तर दूसरे दरबारी ने दिया — “हाँ महाराज, वे तो अद्भुत खिलाड़ी हैं।”
| किसने | किससे |
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| तेनालीरामन ने | राजा से |
यह दूसरे दृश्य की बात है (पृष्ठ 145)। राजा ने कहा था — “सँभल जाओ। यह हुई मेरी अगली चाल।” उसी के उत्तर में तेनाली ने अपना मोहरा चलते हुए यह कहा। इसके तुरंत बाद राजा बोले — “फँसाया न? मंत्री क्यों चले?”
| किसने | किससे |
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| नाई ने | राजा से |
यह तीसरे दृश्य की बात है (पृष्ठ 146)। राजा की आज्ञा पर तेनाली मंच पर चढ़ गए। जब नाई ने देखा कि मुंडन तेनालीरामन जैसे बड़े आदमी का करना है, तो वह चौंककर यह बोला। राजा ने उत्तर दिया — “डरो मत, नाई। तुम आज्ञा का पालन करो।”
| किसने | किससे |
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| पहले दरबारी ने | राजा से |
यह पहले दृश्य की बात है (पृष्ठ 141)। तेनाली ने कहा था कि उन्हें शतरंज के विषय में कुछ नहीं आता। तब राजा ने दरबारियों से पूछा — “क्यों?” उसी पर पहले दरबारी ने यह झूठ कह दिया।
| किसने | किससे |
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| राजा (कृष्णदेव राय) ने | नाई से |
यह तीसरे दृश्य की बात है (पृष्ठ 146)। सेवक नाई को खींचकर दरबार में लाया। नाई डर के मारे राजा के सामने गिरकर बोला — “मैंने कुछ नहीं किया महाराज। मैं निर्दोष हूँ।” तब राजा ने उसे यह कहकर उठाया।