कक्षा ४ हिंदी अध्याय 12 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
(क) सभी दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या क्यों करते थे?
उत्तर

सभी दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या करते थे, क्योंकि राजा उन्हीं की बात सुनते और उन्हीं की प्रशंसा करते थे

  • तीसरा दरबारी कहता है — “महाराज ने भी बहुत सिर चढ़ाया है तेनाली को!”
  • चौथा दरबारी राजा की नकल करके चिढ़ाता है — “हाँ तेनाली! वाह तेनाली! क्या पते की बात कही तेनाली ने…”
  • वही दरबारी कहता है — “कान पक गए हैं प्रशंसा सुनते-सुनते।”
  • दूसरा दरबारी कहता है कि महाराज तो तेनाली की मुट्ठी में हैं, इसलिए वे हम जैसों को क्यों पूछेंगे।
ऐसा क्यों: दरबारी कई बार तेनाली को नीचा दिखाने का प्रयत्न कर चुके थे। हर बार तेनाली की चतुराई के आगे उनकी एक नहीं चली। इसी हार से उनकी जलन और बढ़ गई।
प्र2.
(ख) दरबारियों ने राजा से तेनालीरामन के बारे में क्या कहा?
उत्तर

दरबारियों ने राजा से झूठ कहा कि तेनालीरामन शतरंज के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। उन्होंने ये बातें कहीं —

  • पहला दरबारी — “अभी नहीं आए। लगता है शतरंज का खेल जमा है कहीं।”
  • दूसरा दरबारी — “हाँ महाराज, वे तो अद्भुत खिलाड़ी हैं।”
  • तीसरा दरबारी — “पर महाराज की बराबरी नहीं कर सकते।”
  • चौथा दरबारी — “महाराज, आज्ञा हो तो मुकाबला आयोजित किया जाए।”
  • पहला दरबारी — “वह आपकी हार नहीं देखना चाहता महाराज, इसलिए छिपाए रखा। पर वास्तव में बड़ा घाघ है तेनाली। एक से एक खिलाड़ियों को मात दे चुका है।”
  • बाद में सब दरबारी बोले — “हमने महाराज अपनी आँखों से इन्हें बाजी पर बाजी जीतते हुए देखा है।”
ऐसा क्यों: यह सब उनकी चाल थी। वे चाहते थे कि तेनाली राजा से हारें और भरी सभा में उनका अपमान हो जाए।
प्र3.
(ग) शतरंज खेलते समय राजा को तेनालीरामन पर क्रोध क्यों आ रहा था?
उत्तर

राजा को क्रोध इसलिए आ रहा था, क्योंकि उन्हें लगा कि तेनाली जान-बूझकर हार रहे हैं। राजा ने इसे अपना अपमान समझा।

  • तेनाली की हर चाल अनाड़ी निकल रही थी। राजा बोले — “अरे, यह तो सरासर मूर्खता है। अवश्य जान-बूझकर हार रहा है।”
  • वे गरजकर बोले — “तेनाली मन से खेलो!” और फिर — “अपना सही रंग दिखाओ, खेल जमाओ!”
  • तेनाली का प्यादा पिटा तो राजा बोले — “उड़ गया न तुम्हारा प्यादा! फिर जानकर हारे तुम।”
ऐसा क्यों: दरबारियों ने राजा के मन में यह बात बिठा दी थी कि तेनाली बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। इसलिए सच्ची हार भी राजा को नाटक लगी। राजा चाहते थे कि बराबरी का खेल हो, क्योंकि “बराबर का खिलाड़ी मिले तभी खेल का आनंद आता है।”
प्र4.
(घ) तेनालीरामन ने मुंडन से बचने के लिए क्या चाल चली?
उत्तर

तेनालीरामन ने दो चालें चलीं। दोनों चालों से वे दंड से बच गए।

चालतेनाली ने क्या कहाक्या हुआ
पहली चाल“महाराज, इन बालों पर मैंने पाँच हजार अशर्फियाँ उधार ली हैं। जब तक ऋण न चुका दूँ, केश कटवाने का कोई अधिकार नहीं मुझे।”राजा ने कोष से पाँच हजार अशर्फियाँ तेनाली के घर भिजवा दीं
दूसरी चाल“हमारे यहाँ माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर ही मुंडन होता है। महाराज अब आप ही मेरे माता-पिता हैं… इधर मेरा मुंडन हो, उधर आप स्वर्ग सिधारें तो?”राजा घबरा गए और बोले — “रोक दो हाथ, नाई! तेनाली, दंड वापस लिया मैंने।”

बीच में तेनाली ने आँखें मूँदकर, हाथ जोड़कर मंत्र भी पढ़े — “ओऽम् नमो शिवाय।” उन्होंने कहा कि वे राजा की भलाई के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

ऐसा क्यों: तेनाली ने राजा से लड़ाई नहीं की। उन्होंने ऐसी बात कही जिससे राजा को अपनी ही चिंता हो गई। इसी से दंड अपने आप टल गया।
प्र5.
(ङ) घर में खेले जाने वाले खेलों में आपको सबसे अच्छा खेल कौन-सा लगता है? वह खेल कैसे खेला जाता है?
उत्तर

यह आपकी पसंद का प्रश्न है। पहले खेल का नाम लिखिए। फिर तीन-चार वाक्यों में बताइए कि वह कैसे खेला जाता है।

अच्छे उत्तर में ये बातें आनी चाहिए —

  • खेल का नाम।
  • कितने खिलाड़ी चाहिए और क्या सामान चाहिए।
  • खेल शुरू कैसे होता है और जीत कैसे होती है।
नमूना उत्तर: मुझे साँप-सीढ़ी सबसे अच्छा लगता है। इसे दो या उससे अधिक खिलाड़ी खेल सकते हैं। एक बोर्ड और एक पासा चाहिए। हर खिलाड़ी बारी-बारी से पासा फेंकता है और अपनी गोटी उतने खाने आगे बढ़ाता है। सीढ़ी मिलने पर गोटी ऊपर चढ़ जाती है। साँप मिलने पर नीचे उतर आती है। जो सबसे पहले आखिरी खाने पर पहुँचता है, वही जीतता है।
संकेत: आप लूडो, गुट्टे, कैरम, अष्टा-चक्कन या शतरंज के बारे में भी लिख सकते हैं। खेल के नियम अपने शब्दों में, क्रम से लिखिए।
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