कक्षा ४ हिंदी अध्याय 12 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आपको यह नाटक कैसा लगा और क्यों?
उत्तर

यह आपकी अपनी राय का प्रश्न है। पहले साफ़-साफ़ बताइए कि नाटक अच्छा लगा या नहीं। फिर एक-दो वाक्य में कारण दीजिए।

अच्छे उत्तर में ये बातें आनी चाहिए —

  • नाटक का कौन-सा हिस्सा आपको सबसे अच्छा लगा।
  • वह क्यों अच्छा लगा — हँसी आई, तेनाली की बुद्धि पसंद आई, या अंत चौंकाने वाला था।
  • नाटक पढ़ने में कहानी से अलग क्या लगा।
नमूना उत्तर: मुझे यह नाटक बहुत अच्छा लगा। सबसे मज़ेदार हिस्सा वह है जब तेनाली कहते हैं कि अब राजा ही मेरे माता-पिता हैं। राजा तुरंत घबरा गए और दंड वापस ले लिया। मुझे यह भी अच्छा लगा कि नाटक में हर पात्र स्वयं बोलता है। पढ़ते समय लगता है कि सब सामने खड़े होकर बात कर रहे हैं।
ऐसा क्यों: नाटक में लेखक बीच में नहीं आता। इसीलिए यह कहानी से अधिक जीवंत लगता है।
प्र2.
आपने तेनालीरामन के किस्सों की तरह और किसके बुद्धिमानी के किस्से सुने हैं? उनमें से कोई एक सुनाइए।
उत्तर

यह सुनाने का काम है। पहले नाम बताइए, फिर छोटा-सा किस्सा सुनाइए।

अच्छे उत्तर में ये बातें आनी चाहिए —

  • उस बुद्धिमान व्यक्ति का नाम।
  • उसके सामने कौन-सी कठिन बात आई।
  • उसने बुद्धि से उसे कैसे हल किया।
नमूना उत्तर: मैंने बीरबल के किस्से सुने हैं। एक बार बादशाह ने दरबार में एक लकीर खींच दी। उन्होंने कहा कि इसे छुए बिना छोटा कर दो। सब चुप रहे। बीरबल ने उसके पास एक बड़ी लकीर खींच दी। अब पहली लकीर अपने आप छोटी दिखने लगी।
संकेत: आप गोनू झा, मुल्ला नसीरुद्दीन या अपने गाँव-घर का कोई किस्सा भी सुना सकते हैं। बस अंत में यह ज़रूर बताइए कि बुद्धि कहाँ लगी।
प्र3.
तेनालीरामन की तरह क्या आपने भी कभी किसी कठिन परिस्थिति को संभाला है? यदि संभाला है तो कैसे?
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। पहले हाँ या नहीं कहिए। फिर अपनी बात बताइए।

अच्छे उत्तर में ये बातें आनी चाहिए —

  • कठिनाई क्या थी।
  • उस समय आपने क्या सोचा।
  • आपने क्या किया और आखिर में क्या हुआ।
नमूना उत्तर: हाँ, एक बार मैंने ऐसा किया था। खेलते समय मेरी छोटी बहन का गुब्बारा पेड़ की डाल में अटक गया। वह रोने लगी। मैं डाल तक नहीं पहुँच सकता था। मैंने एक लंबी छड़ी ली और उसमें कपड़ा बाँध दिया। फिर धीरे से गुब्बारा नीचे गिरा लिया।
ऐसा क्यों: तेनाली ने भी ताकत से नहीं, सोच से काम निकाला। कठिनाई में घबराने की जगह सोचना ही असली चतुराई है।
प्र4.
यदि तेनालीरामन शतरंज का खेल जानते तो नाटक का अंत क्या होता?
उत्तर

यदि तेनाली शतरंज जानते, तो नाटक का अंत बहुत सीधा और कम मज़ेदार होता।

  • वे राजा से बराबरी का खेल खेलते। राजा को खेल का आनंद आता।
  • राजा को यह न लगता कि तेनाली जान-बूझकर हार रहे हैं। इसलिए उन्हें क्रोध ही न आता।
  • मुंडन का दंड सुनाया ही नहीं जाता। अशर्फियों वाली और माता-पिता वाली चालें चलने की ज़रूरत ही न पड़ती।
  • दरबारियों की चाल भी नाकाम रहती, क्योंकि उन्होंने तो तेनाली को अनाड़ी सिद्ध करके फँसाना चाहा था।
ऐसा क्यों: नाटक का सारा मज़ा इसी बात पर टिका है कि तेनाली को खेल आता ही नहीं। शतरंज में वे हारे, पर बुद्धि की चाल में जीत गए। पाठ का नाम भी इसीलिए “शतरंज में मात” है।
संकेत: इसका एक और उत्तर भी ठीक है — यदि तेनाली जीत जाते तो राजा का अपमान होता और दरबारी और खुश होते। बस अपना कारण ज़रूर लिखिए।
क्या यह उपयोगी रहा?