प्र1.
इस नाटक में कौन-कौन पात्र हैं? पात्रों की सूची बनाइए।
उत्तर
इस नाटक में नौ तरह के पात्र बोलते हैं। पुस्तक ने अलग से पात्र-सूची नहीं छापी है। हर संवाद के पहले बाईं ओर पात्र का नाम लिखा है। उन्हीं नामों से यह सूची बनती है —
| पात्र | यह कौन है | नाटक में क्या करता है |
|---|---|---|
| राजा (कृष्णदेव राय) | विजयनगर के महाराज | तेनाली से शतरंज खेलते हैं और क्रोध में मुंडन का दंड देते हैं |
| तेनालीरामन (तेनाली) | दरबार के विदूषक और राज परामर्शदाता | हर बाजी हारते हैं, पर बुद्धि से दंड से बच जाते हैं |
| पहला दरबारी | दरबार का एक दरबारी | तेनाली को फँसाने का उपाय निकालता है |
| दूसरा दरबारी | दरबार का एक दरबारी | राजा को भड़काता है |
| तीसरा दरबारी | दरबार का एक दरबारी | तेनाली को चिढ़ाता है — “जरा बचके खेलिएगा, महाराज।” |
| चौथा दरबारी | दरबार का एक दरबारी | शतरंज के मुकाबले का सुझाव देता है |
| सब दरबारी / दरबारीगण | सब दरबारी एक साथ | एक ही बात मिलकर बोलते हैं |
| एक सेवक | दरबार का सेवक | राजा और तेनाली के आने की सूचना देता है |
| नाई | बाल बनाने वाला | मुंडन करने के लिए बुलाया जाता है |
ऐसा क्यों: नाटक में लेखक कुछ नहीं बताता। सारी बात पात्र ही बोलते हैं। इसलिए हर संवाद से पहले बोलने वाले का नाम लिखना ज़रूरी होता है।