कक्षा ४ हिंदी अध्याय 12 पाठ के भीतर के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
इस नाटक में कौन-कौन पात्र हैं? पात्रों की सूची बनाइए।
उत्तर

इस नाटक में नौ तरह के पात्र बोलते हैं। पुस्तक ने अलग से पात्र-सूची नहीं छापी है। हर संवाद के पहले बाईं ओर पात्र का नाम लिखा है। उन्हीं नामों से यह सूची बनती है —

पात्रयह कौन हैनाटक में क्या करता है
राजा (कृष्णदेव राय)विजयनगर के महाराजतेनाली से शतरंज खेलते हैं और क्रोध में मुंडन का दंड देते हैं
तेनालीरामन (तेनाली)दरबार के विदूषक और राज परामर्शदाताहर बाजी हारते हैं, पर बुद्धि से दंड से बच जाते हैं
पहला दरबारीदरबार का एक दरबारीतेनाली को फँसाने का उपाय निकालता है
दूसरा दरबारीदरबार का एक दरबारीराजा को भड़काता है
तीसरा दरबारीदरबार का एक दरबारीतेनाली को चिढ़ाता है — “जरा बचके खेलिएगा, महाराज।”
चौथा दरबारीदरबार का एक दरबारीशतरंज के मुकाबले का सुझाव देता है
सब दरबारी / दरबारीगणसब दरबारी एक साथएक ही बात मिलकर बोलते हैं
एक सेवकदरबार का सेवकराजा और तेनाली के आने की सूचना देता है
नाईबाल बनाने वालामुंडन करने के लिए बुलाया जाता है
ऐसा क्यों: नाटक में लेखक कुछ नहीं बताता। सारी बात पात्र ही बोलते हैं। इसलिए हर संवाद से पहले बोलने वाले का नाम लिखना ज़रूरी होता है।
प्र2.
यह नाटक कितने दृश्यों में बँटा है? हर दृश्य में क्या होता है?
उत्तर

यह नाटक तीन दृश्यों में बँटा है — पहला दृश्य, दूसरा दृश्य और तीसरा दृश्य।

दृश्यजगहक्या होता हैपृष्ठ
पहला दृश्यराजा का दरबारदरबारी तेनाली से जलकर उपाय सोचते हैं। वे राजा से कहते हैं कि तेनाली शतरंज के बड़े खिलाड़ी हैं। राजा मुकाबले की आज्ञा दे देते हैं।139–142
दूसरा दृश्यदरबार भवन, बीच में शतरंज की चादरखेल होता है। तेनाली हर चाल गलत चलते हैं। राजा क्रोध में शतरंज उलट देते हैं और मुंडन का दंड सुनाते हैं।142–145
तीसरा दृश्यदरबार भवन, बीच में ऊँचा मंचनाई उस्तरा लेकर आता है। तेनाली दो चालें चलकर दंड से बच जाते हैं। राजा प्रसन्न होकर उन्हें बाग ले जाते हैं।146–148
दृश्य कैसे पहचानें: हर दृश्य के अंत में कोष्ठक में लिखा है — (पर्दा गिरता है)। इसका अर्थ है कि मंच का पर्दा गिर गया और वह हिस्सा पूरा हो गया। फिर अगले दृश्य का नाम मोटे अक्षरों में छपा है।
संकेत: दृश्य बदलने पर जगह भी बदल जाती है। पहले दरबार, फिर खेल की चौकी, फिर ऊँचा मंच।
प्र3.
नाटक में कोष्ठक ( ) के भीतर लिखी पंक्तियाँ किसके लिए होती हैं? पाठ से तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर

कोष्ठक के भीतर लिखी पंक्तियों को मंच-निर्देश कहते हैं। ये पात्र के बोलने के लिए नहीं होतीं। ये अभिनय करने वालों को बताती हैं कि मंच पर क्या करना है।

पाठ से उदाहरण —

मंच-निर्देशयह क्या बताता है
(राजा का दरबार। दरबारी अपने-अपने आसन पर बैठे हैं।)मंच पर कौन-सी जगह दिखानी है और कौन कहाँ बैठा है
(क्रोधित) तेनाली, तुमने बताया नहीं…यह संवाद किस भाव से बोलना है — यहाँ गुस्से से
(मोहरा उठाकर रखते हैं।)बोलते समय पात्र को क्या काम करना है
(पर्दा गिरता है)दृश्य यहीं समाप्त हो गया
ऐसा क्यों: नाटक मंच पर खेला जाता है। दर्शक को अभिनय दिखता है, लिखी बात नहीं। इसलिए भाव और काम अलग से कोष्ठक में लिखने पड़ते हैं।
ध्यान दीजिए: पुस्तक में ये पंक्तियाँ तिरछे अक्षरों में छपी हैं। इससे पता चलता है कि इन्हें बोलना नहीं है।
प्र4.
नाटक और कहानी के लिखने के ढंग में क्या अंतर है?
उत्तर

दोनों में कहानी तो होती ही है। पर लिखने का ढंग अलग होता है।

बातनाटककहानी
पंक्ति कैसे शुरू होती हैपहले पात्र का नाम, फिर डैश, फिर उसकी बातसीधे पैराग्राफ़ में लिखी जाती है
कौन बताता हैसब कुछ पात्र स्वयं बोलकर बताते हैंलेखक बीच-बीच में आकर बताता है
कोष्ठककोष्ठक में मंच-निर्देश होते हैंऐसे मंच-निर्देश नहीं होते
बँटवारादृश्यों में बँटा होता हैपैराग्राफ़ों में बँटी होती है
किसलिए लिखा जाता हैमंच पर खेलने के लिएपढ़ने या सुनाने के लिए

एक ही बात दोनों ढंग से देखिए —

नाटक की तरह:
राजा – (क्रोधित) तेनाली, तुमने बताया नहीं कि तुम शतरंज में माहिर हो?
तेनाली – (चकित) शतरंज और मैं!

कहानी की तरह:
राजा ने गुस्से में तेनाली से पूछा कि उसने शतरंज का हुनर छिपाकर क्यों रखा। तेनाली चौंक गया।
ऐसा क्यों: कहानी में लेखक हमें “गुस्से में” बता सकता है। नाटक में लेखक मंच पर नहीं होता। इसलिए वह भाव कोष्ठक में लिखकर अभिनय करने वाले को सौंप देता है।
प्र5.
नाटक की घटनाओं को क्रम से लिखिए।
उत्तर

घटनाएँ इस क्रम में होती हैं —

  1. दरबारी आपस में कहते हैं कि राजा तेनाली को बहुत सिर चढ़ाते हैं।
  2. पहला दरबारी एक उपाय निकालता है। सब उसे घेरकर खुसुर-फुसुर करते हैं।
  3. राजा आते हैं। दरबारी कहते हैं कि तेनाली शतरंज के अद्भुत खिलाड़ी हैं।
  4. राजा शतरंज के मुकाबले की आज्ञा दे देते हैं। तेनाली मना करते हैं, पर कोई सुनता नहीं।
  5. खेल होता है। तेनाली की हर चाल अनाड़ी निकलती है। उनका प्यादा, मंत्री और राजा एक-एक कर पिट जाते हैं।
  6. राजा क्रोध में शतरंज उलट देते हैं। वे भरी सभा में मुंडन का दंड सुना देते हैं।
  7. तीसरे दृश्य में नाई उस्तरा लेकर आता है।
  8. तेनाली कहते हैं कि बालों पर पाँच हजार अशर्फियाँ उधार हैं। राजा कोष से वह रकम भिजवा देते हैं।
  9. फिर तेनाली कहते हैं कि मुंडन माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर होता है, और अब राजा ही उनके माता-पिता हैं।
  10. राजा घबराकर दंड वापस ले लेते हैं। वे प्रसन्न होकर तेनाली को बाग ले जाते हैं।
ध्यान दीजिए: तेनाली ने दो चालें चलीं — पहली अशर्फियों वाली, दूसरी माता-पिता वाली। पहली चाल से उन्हें धन मिला, दूसरी से दंड टल गया।
क्या यह उपयोगी रहा?