कक्षा ४ हिंदी अध्याय 13 पुस्तकालय या अन्य स्रोत से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
विद्यालय के पुस्तकालय से सूर्य के विषय में और अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर

यह आपको स्वयं करना है। नीचे तरीका दिया है।

कैसे खोजें —

  1. पुस्तकालय में विज्ञान और अंतरिक्ष वाली अलमारी देखिए।
  2. बाल-पत्रिकाओं में “सूर्य”, “तारे”, “अंतरिक्ष” शीर्षक वाले लेख देखिए।
  3. पुस्तकालय अध्यापक से कहिए कि सूर्य पर कोई सरल चित्र-पुस्तक दिखा दें।
  4. जो नई बात मिले, उसे अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए और नीचे पुस्तक का नाम भी लिखिए।

अपनी पुस्तिका में ऐसा पन्ना बनाइए (नमूना उत्तर) —

मैंने क्या जानाकहाँ से
सूर्य एक तारा है और बहुत गरम है।वीणा, पाठ 13, पृष्ठ 154
सूर्य हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का विशाल गोला है।वीणा, पाठ 13, पृष्ठ 155
………………………………(पुस्तकालय की पुस्तक का नाम)
स्रोत लिखना क्यों ज़रूरी है: इससे पता रहता है कि बात कहाँ से ली गई। पुस्तक ने भी पृष्ठ 159 पर चित्रों के नीचे लिखा है — “इसरो से साभार”।
प्र2.
सूर्यग्रहण क्यों लगता है? इस अवसर पर कहाँ-कहाँ मेले लगते हैं? इस विषय में अपने विद्यालय के पुस्तकालय, अभिभावकों और अन्य स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर सहपाठियों से साझा कीजिए।
उत्तर

इसके दो भाग हैं। पहला भाग पुस्तकालय से मिलेगा, दूसरा भाग घर के बड़ों से।

1. सूर्यग्रहण क्यों लगता है — चलते-चलते कभी चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में आ जाता है। तब वह सूर्य को हमारी आँखों से ढक लेता है। कुछ देर के लिए दिन में ही अँधेरा-सा हो जाता है। इसी को सूर्यग्रहण कहते हैं।

2. मेले कहाँ-कहाँ लगते हैं — यह आपको पता करना है। पाठ में किसी जगह का नाम नहीं दिया गया है, इसलिए इसका उत्तर अपने बड़ों या पुस्तकालय से पूछकर ही लिखिए।

पूछने के लिए प्रश्न बना लीजिए (नमूना उत्तर) —

  1. “क्या आपने कभी सूर्यग्रहण देखा है? कब देखा था?”
  2. “हमारे यहाँ ग्रहण के दिन लोग क्या करते हैं?”
  3. “ग्रहण के अवसर पर किस नदी या तीर्थ पर मेला लगता है?”
बहुत ज़रूरी सावधानी: सूर्यग्रहण को भी खुली आँखों से मत देखिए। अध्यापक जी की बात याद रखिए — “सूर्य को कभी भी प्रत्यक्ष देखने का प्रयास मत करना बच्चो।” (पृष्ठ 159) ग्रहण देखना ही हो तो बड़ों के साथ और विशेष चश्मे से ही देखिए।
यह प्रश्न इस पाठ में क्यों: पूरा पाठ बताता है कि सूर्य से जुड़ी बातें रहस्य जैसी लगती हैं। पर जाँचने और पूछने पर हर रहस्य का कारण मिल जाता है। यही वैज्ञानिक का काम है।
क्या यह उपयोगी रहा?