| चित्र में क्या-क्या दिखता है |
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| एक नदी या तालाब, जिसमें दो लोग कमर तक पानी में खड़े हैं। |
| दाईं ओर लाल चुनरी ओढ़े एक स्त्री है। उसने दोनों हाथ ऊपर उठाकर एक लोटा पकड़ा है और उसमें से पानी की धार गिर रही है। |
| बाईं ओर सफ़ेद कुरता पहने एक पुरुष है। उसके हाथों में बाँस का एक सूप है, जिसमें फल और सब्ज़ियाँ रखी हैं। |
| दोनों के बीच, पानी के उस पार क्षितिज पर एक लाल-सा गोल सूरज दिख रहा है। पानी में उसकी लाल परछाईं पड़ रही है। |
इस चित्र में लोग नदी के जल में खड़े होकर सूर्य को जल चढ़ा रहे हैं। इसे सूर्य को अर्घ्य देना कहते हैं।
| चित्र में क्या-क्या दिखता है |
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| एक नदी या तालाब, जिसमें दो लोग कमर तक पानी में खड़े हैं। |
| दाईं ओर लाल चुनरी ओढ़े एक स्त्री है। उसने दोनों हाथ ऊपर उठाकर एक लोटा पकड़ा है और उसमें से पानी की धार गिर रही है। |
| बाईं ओर सफ़ेद कुरता पहने एक पुरुष है। उसके हाथों में बाँस का एक सूप है, जिसमें फल और सब्ज़ियाँ रखी हैं। |
| दोनों के बीच, पानी के उस पार क्षितिज पर एक लाल-सा गोल सूरज दिख रहा है। पानी में उसकी लाल परछाईं पड़ रही है। |
चित्र से जो बातें पक्की दिखती हैं —
- दोनों लोग पानी में खड़े हैं, किनारे पर नहीं।
- स्त्री ने लोटे से पानी की धार सूर्य की ओर गिराई है।
- पुरुष के हाथ में फल और सब्ज़ियों से भरा सूप है।
- सामने डूबता या उगता हुआ लाल सूरज दिख रहा है।
नमूना उत्तर: “हाँ, मैंने यह देखा है। हमारे मोहल्ले में छठ पर्व मनाया जाता है। शाम को सब लोग तालाब के किनारे जाते हैं। मेरी मौसी पानी में खड़ी होकर सूरज को अर्घ्य देती हैं। सूप में केला, नारियल और गन्ना रखा जाता है। सुबह उगते सूरज को फिर से अर्घ्य दिया जाता है।”