क्योंकि घोंघा बहुत धीरे-धीरे चलता है।
कहानी बताती है कि “बगीचा बहुत छोटा और सुंदर था।” फिर भी घोंघे को दो दिन लगते थे। इसका मतलब है कि देर बगीचे के बड़े होने से नहीं थी। देर घोंघे की अपनी चाल से थी।
अद्यतन2026-09-19
क्योंकि घोंघा बहुत धीरे-धीरे चलता है।
कहानी बताती है कि “बगीचा बहुत छोटा और सुंदर था।” फिर भी घोंघे को दो दिन लगते थे। इसका मतलब है कि देर बगीचे के बड़े होने से नहीं थी। देर घोंघे की अपनी चाल से थी।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। सबका उत्तर अलग होगा।
नमूना उत्तर: मैं अपने विद्यालय पैदल जाता हूँ। मेरा घर विद्यालय से ज़्यादा दूर नहीं है। मुझे लगभग दस मिनट लगते हैं। मैं अपनी बड़ी बहन के साथ जाता हूँ। रास्ते में एक बड़ा बरगद का पेड़ पड़ता है।
क्योंकि वह जानना चाहता था कि बाहर की दुनिया कैसी है।
कहानी में लिखा है — “पर कभी-कभी घोंघे को लगता था, इस बगीचे के बाहर क्या होगा? कैसी होती होगी बाहर की दुनिया?”
यही जिज्ञासा बढ़ती गई। आख़िर उसने तय कर लिया — “मैं बाहर जाकर देखूँगा कि दुनिया कैसी है।”
यह आपकी अपनी इच्छा का प्रश्न है। मन की बात सच-सच लिखिए।
नमूना उत्तर: मेरा समुद्र किनारे जाने का मन करता है। मैंने समुद्र केवल चित्रों में देखा है। मुझे पहाड़ों पर भी जाना है, क्योंकि वहाँ बर्फ़ गिरती है। एक बार मैं चिड़ियाघर भी जाना चाहता हूँ। वहाँ मैं हाथी को पास से देखूँगा।
यह भी आपके अपने अनुभव का प्रश्न है।
नमूना उत्तर: मैं रविवार को पास के बगीचे में घूमने जाता हूँ। वहाँ मैं अपने दादा जी के साथ जाता हूँ। छुट्टियों में हम नानी के गाँव जाते हैं। वहाँ खेत और तालाब देखना मुझे सबसे अच्छा लगता है। पिछली बार हम मेले में भी गए थे।