प्र1.
घोंघे को सबसे पहले बच्चों के खेलने का स्थान दिखाई दिया। कल्पना कीजिए कि बच्चों ने घोंघे को देखा और उससे बातें कीं। संवाद पूरा कीजिए —
उत्तर
पुस्तक में संवाद की दो पंक्तियाँ भरी हैं और आगे की पंक्तियाँ आपको लिखनी हैं —
| बच्चे – | अरे! आप कौन? |
| घोंघा – | मुझे नहीं पहचानते! मैं घोंघा, नहीं तो और कौन? |
| बच्चे – | …………………………………… |
| घोंघा – | …………………………………… |
| बच्चे – | …………………………………… |
| घोंघा – | …………………………………… |
| बच्चे – | …………………………………… |
संवाद लिखने के चार नियम:
1 — हर पंक्ति छोटी रखिए, जैसे हम सचमुच बोलते हैं।
2 — बच्चे सवाल पूछें और घोंघा उत्तर दे।
3 — बातें कहानी से जुड़ी हों — बगीचा, दीवार का छेद, बाहर की दुनिया।
4 — अंत में बच्चे कोई अच्छी बात कहें, जिससे संवाद पूरा लगे।
1 — हर पंक्ति छोटी रखिए, जैसे हम सचमुच बोलते हैं।
2 — बच्चे सवाल पूछें और घोंघा उत्तर दे।
3 — बातें कहानी से जुड़ी हों — बगीचा, दीवार का छेद, बाहर की दुनिया।
4 — अंत में बच्चे कोई अच्छी बात कहें, जिससे संवाद पूरा लगे।
नमूना उत्तर:
| बच्चे – | अरे! आप कौन? |
| घोंघा – | मुझे नहीं पहचानते! मैं घोंघा, नहीं तो और कौन? |
| बच्चे – | आप यहाँ कहाँ से आए हैं? |
| घोंघा – | उस दीवार के छेद से। उसके पीछे मेरा छोटा-सा बगीचा है। |
| बच्चे – | आपकी पीठ पर यह गोल-गोल चीज़ क्या है? |
| घोंघा – | यह मेरा शंख है। यही मेरा घर है और इसी में मेरा सामान भी है। |
| बच्चे – | वाह! फिर तो आप अपना घर साथ लेकर घूमते हैं। हमारे साथ खेलिए न! |
यह संवाद क्यों ठीक है: इसमें हर बात कहानी से निकली है — दीवार का छेद, छोटा बगीचा और शंख में बँधा सामान। कल्पना करते समय भी पाठ की बातें साथ रखनी चाहिए।