कक्षा ४ हिंदी अध्याय 3 नीम के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
नीम एक कविता है। इसे हरीश निगम ने लिखा है। पूरी कविता में एक ही पेड़ की बात है — नीम की। हर दो पंक्तियों के अंत में ‘नीम’ शब्द आता है, इसलिए कविता गाने जैसी लगती है। कविता की हर जोड़ी पंक्ति नीम का एक गुण बताती है। पहले उसका रूप, फिर उसका स्वभाव, फिर उसका काम — इसी क्रम से कवि आगे बढ़ते हैं। पहली दो पंक्तियों में नीम हवा में लहराता-बलखाता है और दिनभर हँसता-गाता है। कवि ने पेड़ को एक खुश रहने वाले मित्र की तरह दिखाया है। तीसरी और चौथी पंक्ति में चिड़िया, कौआ और तोता आते हैं। नीम इन सबसे अपना नेह जताता है। ‘नेह’ का अर्थ है — प्यार और स्नेह। आगे कवि कहते हैं कि नीम डॉक्टर नहीं है, फिर भी कितने रोग भगाता है । नीम की पत्तियाँ, टहनियाँ और निबौरियाँ घरेलू उपचार में काम आती हैं। इसीलिए इसे औषधीय वृक्ष कहते हैं। हवा प्रदूषित यानी गंदी हो जाए तो नीम उसे शुद्ध बना देता है। पेड़ गंदी हवा लेकर हमें साफ
अभ्यास
- कविता का सरल अर्थ
- बातचीत के लिए
- पाठ के भीतर
- भाषा की बात
- अभिनय
- वृक्ष एक, गुण अनेक
- मैं नीम हूँ
- बूझो तो जानें
- मेरा पौधा
- भाँति-भाँति की पत्तियाँ