कक्षा ४ हिंदी अध्याय 3 कविता का सरल अर्थ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“लहराता-बलखाता नीम, / दिनभर हँसता-गाता नीम। / चिड़िया, कौआ, तोता सबसे, / अपना नेह जताता नीम।” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
उत्तर

इन चार पंक्तियों में कवि नीम के पेड़ का रूप और उसका स्वभाव बता रहे हैं।

लहराता-बलखाता नीम,
दिनभर हँसता-गाता नीम।
चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,
अपना नेह जताता नीम।

पहले कठिन शब्द समझ लीजिए —

शब्दअर्थ
लहरानाहवा में लहरों की तरह हिलना
बलखानाटेढ़ा-मेढ़ा होकर मुड़ना
दिनभरपूरे दिन
नेहप्यार, स्नेह

अब पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ देखिए —

पंक्तिसरल अर्थ
“लहराता-बलखाता नीम,”हवा चलती है तो नीम की डालियाँ लहराती और बल खाती हैं।
“दिनभर हँसता-गाता नीम।”नीम पूरे दिन खुश रहता है, मानो हँस और गा रहा हो।
“चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,”चिड़िया, कौआ और तोता — तीनों पक्षी उस पर आकर बैठते हैं।
“अपना नेह जताता नीम।”नीम इन सब पक्षियों से अपना प्यार दिखाता है।
भाव: कवि ने नीम को एक जीते-जागते मित्र की तरह दिखाया है। पेड़ हँसता या गाता तो नहीं, पर उसकी पत्तियाँ हिलने पर सर-सर की आवाज़ आती है। वही आवाज़ कवि को हँसी और गीत जैसी लगती है। पक्षी उसकी डालों पर घोंसला बनाते हैं, इसलिए कवि कहते हैं कि नीम उनसे नेह जताता है।
ध्यान दीजिए: ‘लहराता-बलखाता’ और ‘हँसता-गाता’ — ये जोड़ी शब्द हैं। इनसे कविता में लय बनती है और पेड़ की हलचल आँखों के सामने आ जाती है।
प्र2.
“नहीं डॉक्टर फिर भी देखो, / कितने रोग भगाता नीम। / चले प्रदूषित वायु कभी तो, / उसको शुद्ध बनाता नीम।” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
उत्तर

इन पंक्तियों में कवि नीम के दो बड़े काम बता रहे हैं — रोग भगाना और हवा को साफ़ करना।

नहीं डॉक्टर फिर भी देखो,
कितने रोग भगाता नीम।
चले प्रदूषित वायु कभी तो,
उसको शुद्ध बनाता नीम।
पंक्तिसरल अर्थ
“नहीं डॉक्टर फिर भी देखो,”नीम कोई डॉक्टर नहीं है, फिर भी ज़रा देखो तो सही।
“कितने रोग भगाता नीम।”वह कितनी ही बीमारियों को दूर भगा देता है।
“चले प्रदूषित वायु कभी तो,”कभी गंदी हवा चलने लगे तो,
“उसको शुद्ध बनाता नीम।”नीम उस हवा को फिर से साफ़ बना देता है।
ऐसा क्यों: नीम की पत्तियाँ, कोमल टहनियाँ और निबौरियाँ घरेलू उपचार में काम आती हैं। पत्तियों के पानी से नहाने पर खुजली में आराम मिलता है और टहनी से दातुन की जाती है। इसीलिए इसे औषधीय वृक्ष कहते हैं। हर पेड़ की तरह नीम भी गंदी हवा लेकर हमें साफ़ हवा लौटाता है।
ध्यान रखिए: पेड़ दवा का काम करते हैं, पर बीमार पड़ने पर डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है। कविता पेड़ के गुण की तारीफ़ कर रही है, डॉक्टर की जगह नहीं ले रही।
प्र3.
“कड़वे तन में मन को मीठा, / रखना हमें सिखाता नीम। / हवा चले तो झूम-झूमके, / सब का मन बहलाता नीम।” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
उत्तर

ये कविता की सबसे सुंदर पंक्तियाँ हैं। यहाँ नीम एक शिक्षक की तरह हमें एक बात सिखाता है।

कड़वे तन में मन को मीठा,
रखना हमें सिखाता नीम।
हवा चले तो झूम-झूमके,
सब का मन बहलाता नीम।
पंक्तिसरल अर्थ
“कड़वे तन में मन को मीठा,”नीम का शरीर (तन) कड़वा है, पर उसका मन मीठा है।
“रखना हमें सिखाता नीम।”वह हमें सिखाता है कि मन हमेशा मीठा रखो।
“हवा चले तो झूम-झूमके,”हवा चलती है तो नीम झूम-झूमकर हिलता है।
“सब का मन बहलाता नीम।”उसे झूमता देखकर सबका मन खुश हो जाता है।
भाव: नीम का हर भाग स्वाद में कड़वा है, पर उससे मिलता सबको भला ही है — छाया, हवा और दवा। इसी से सीख मिलती है कि बाहर से कड़वे लगने वाले भी भीतर से बहुत अच्छे हो सकते हैं। जैसे दवा कड़वी होती है, पर वह हमें ठीक कर देती है।
प्र4.
“लेता नहीं किसी से कुछ भी, / पर कितना दे जाता नीम।” — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए और पूरी कविता का भाव अपने शब्दों में बताइए।
उत्तर

अर्थ: नीम किसी से कुछ भी नहीं माँगता, फिर भी सबको बहुत कुछ देकर जाता है।

लेता नहीं किसी से कुछ भी,
पर कितना दे जाता नीम।

नीम हमें क्या-क्या देता है —

  • ठंडी छाया, जिसके नीचे हम खेलते और बैठते हैं;
  • शुद्ध हवा, जो साँस लेने के काम आती है;
  • दवा — पत्तियाँ, टहनियाँ और निबौरियाँ;
  • पक्षियों के लिए घर और झूला झूलने के लिए मज़बूत डाल
पूरी कविता का भाव: कवि कहना चाहते हैं कि पेड़ हमारे सच्चे मित्र हैं। वे बदले में कुछ नहीं माँगते, केवल देते हैं। इसलिए हमें पेड़ लगाने चाहिए और उन्हें काटने से बचाना चाहिए।
करके देखिए: कविता को ताली बजाकर गाइए। हर दूसरी पंक्ति के अंत में ‘नीम’ पर ज़ोर दीजिए — कविता अपने आप याद हो जाएगी।
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