प्र1.
“लहराता-बलखाता नीम, / दिनभर हँसता-गाता नीम। / चिड़िया, कौआ, तोता सबसे, / अपना नेह जताता नीम।” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
उत्तर
इन चार पंक्तियों में कवि नीम के पेड़ का रूप और उसका स्वभाव बता रहे हैं।
लहराता-बलखाता नीम,
दिनभर हँसता-गाता नीम।
चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,
अपना नेह जताता नीम।
दिनभर हँसता-गाता नीम।
चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,
अपना नेह जताता नीम।
पहले कठिन शब्द समझ लीजिए —
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| लहराना | हवा में लहरों की तरह हिलना |
| बलखाना | टेढ़ा-मेढ़ा होकर मुड़ना |
| दिनभर | पूरे दिन |
| नेह | प्यार, स्नेह |
अब पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ देखिए —
| पंक्ति | सरल अर्थ |
|---|---|
| “लहराता-बलखाता नीम,” | हवा चलती है तो नीम की डालियाँ लहराती और बल खाती हैं। |
| “दिनभर हँसता-गाता नीम।” | नीम पूरे दिन खुश रहता है, मानो हँस और गा रहा हो। |
| “चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,” | चिड़िया, कौआ और तोता — तीनों पक्षी उस पर आकर बैठते हैं। |
| “अपना नेह जताता नीम।” | नीम इन सब पक्षियों से अपना प्यार दिखाता है। |
भाव: कवि ने नीम को एक जीते-जागते मित्र की तरह दिखाया है।
पेड़ हँसता या गाता तो नहीं, पर उसकी पत्तियाँ हिलने पर सर-सर की आवाज़ आती है। वही आवाज़ कवि को
हँसी और गीत जैसी लगती है। पक्षी उसकी डालों पर घोंसला बनाते हैं, इसलिए कवि कहते हैं कि नीम उनसे नेह जताता है।
ध्यान दीजिए: ‘लहराता-बलखाता’ और ‘हँसता-गाता’ — ये जोड़ी शब्द हैं। इनसे कविता में
लय बनती है और पेड़ की हलचल आँखों के सामने आ जाती है।