कक्षा ४ हिंदी अध्याय 2 विभिन्न ध्वनियाँ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी — बादलों का गरजना
उत्तर

बादलों के गरजने की ध्वनि — गड़गड़

इसे कड़-कड़ या गरज-गरज भी लिखा जा सकता है।

वाक्य में: रात भर बादल गड़गड़ करते रहे।

ऐसे शब्द क्यों बनते हैं: ऐसे शब्द वही आवाज़ सुनाते हैं जो चीज़ सचमुच करती है। इसीलिए पढ़ते ही आवाज़ कानों में बज जाती है। पाठ का “खड़-खड़” भी ऐसा ही शब्द है।
प्र2.
इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी — पानी का बरसना
उत्तर

पानी के बरसने की ध्वनि — रिमझिम

तेज़ बारिश हो तो छम-छम या झर-झर भी कहा जाता है।

वाक्य में: सुबह से रिमझिम बारिश हो रही है।

ध्यान दीजिए: एक ही चीज़ की ध्वनि हल्की और तेज़ होने पर बदल जाती है। हल्की बूँदें रिमझिम, तेज़ धार झर-झर।
प्र3.
इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी — नल से बूँदों का गिरना
उत्तर

नल से बूँदों के गिरने की ध्वनि — टप-टप

बहुत धीमी बूँद हो तो टिप-टिप भी कहते हैं।

वाक्य में: बंद नल से रात भर टप-टप पानी गिरता रहा।

Tip: यह ध्वनि हमें याद दिलाती है कि नल ठीक से बंद करना चाहिए, वरना पानी बेकार बहता है।
प्र4.
इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी — मेंढक का बोलना
उत्तर

मेंढक के बोलने की ध्वनि — टर्र-टर्र

वाक्य में: बारिश होते ही तालाब से टर्र-टर्र सुनाई देने लगी।

क्यों याद रह जाती है: मेंढक की आवाज़ गले से निकलती है और बार-बार दोहराई जाती है। दोहराव के कारण शब्द भी दो बार लिखा जाता है — टर्र-टर्र।
प्र5.
इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी — घंटी का बजना
उत्तर

घंटी के बजने की ध्वनि — टन-टन

बड़ी घंटी हो तो ठन-ठन या घनन-घनन भी कहते हैं।

वाक्य में: छुट्टी की घंटी टन-टन बजने लगी।

प्र6.
इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी — हवा का बहना
उत्तर

हवा के बहने की ध्वनि — सन-सन

पत्तों से टकराए तो सर-सर भी सुनाई देती है।

वाक्य में: रात में सन-सन हवा चल रही थी।

पाठ से जोड़िए: कहानी में हवा से ही पत्ता गिरा था और “खड़-खड़” की ध्वनि आई थी। यानी एक ध्वनि से दूसरी ध्वनि बनती है।
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