कक्षा ४ हिंदी अध्याय 4 कविता के आधार पर के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे एक तालिका दी गई है। दिए गए उदाहरण के आधार पर तालिका को पूरा कीजिए—
फलों के नामसाग-भाजियों के नामदूध से बने उत्पादों/सामानों के नामसलाद की सामग्री के नाम
आमपरवलदहीगाजर
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उत्तर

हर खाने में कविता की चीजें भर दीजिए। पूरी तालिका इस तरह बनेगी—

फलों के नामसाग-भाजियों के नामदूध से बने उत्पादों/सामानों के नामसलाद की सामग्री के नाम
आमपरवलदहीगाजर
केलाभिंडीमक्खनखीरा
पपीतापालकपनीरटमाटर
अमरूदनेनुआछाछमूली
कैसे भरें: पहला खाना केवल फलों का है, दूसरा साग-भाजियों का, तीसरा दूध से बनी चीजों का और चौथा सलाद में डाली जाने वाली चीजों का। हर नाम को उसी खाने में लिखिए जिससे वह मेल खाता है।
संकेत: गाजर, टमाटर और मूली साग-भाजी भी हैं और सलाद में भी जाते हैं। इसलिए वे दोनों खानों में लिखे जा सकते हैं। आप अपने घर की चीजें भी लिख सकते हैं।
प्र2.
निम्नलिखित प्रश्न के सही उत्तर का चयन करके उसके सामने दी गई जगह पर सेब का चित्र बनाइए— (क) चावल, दाल और साग-भाजी खाने के लाभ हैं— i. शरीर मोटा होता है। ii. शरीर सुस्त रहता है। iii. शरीर चुस्त और फुर्तीला बनता है। iv. शरीर पतला बनता है।
उत्तर

सही उत्तर — iii. शरीर चुस्त और फुर्तीला बनता है। इसी के सामने सेब का चित्र बनाइए।

क्यों: कविता की पंक्ति है — “चावल, दाल और सब्जी खाओ, तन में चुस्ती-फुर्ती लाओ।” यानी ये तीनों चीजें मिलकर शरीर में फुर्ती लाती हैं।
प्र3.
(ख) गरमी के मौसम में किन वस्तुओं का भरपूर सेवन करना चाहिए? i. खरबूज ii. ककड़ी iii. खीरा iv. चाय-कॉफी
उत्तर

सही उत्तर — i. खरबूज, ii. ककड़ी और iii. खीरा। तीनों के सामने सेब का चित्र बनाइए।

क्यों: कविता कहती है — “खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा, गरमी की हरते हैं पीड़ा।” इनमें पानी बहुत होता है, इसलिए ये गरमी में राहत देते हैं।
संकेत: प्रश्न में “सही उत्तरों” लिखा है — यानी एक से अधिक उत्तर सही हो सकते हैं। चाय-कॉफी का नाम कविता में कहीं नहीं आया, इसलिए वह उत्तर नहीं है।
प्र4.
(ग) हम खाकर कब पछताते हैं? i. जब कम खाते हैं। ii. जब अधिक खाते हैं। iii. जब दूसरा अधिक खाता है। iv. इनमें से सभी
उत्तर

सही उत्तर — ii. जब अधिक खाते हैं। इसी के सामने सेब का चित्र बनाइए।

क्यों: कविता की पंक्ति है — “पेट से ज्यादा जब कोई खाए, खाकर वह पीछे पछताए।” पेट भर जाने के बाद और खा लेने से पेट भारी हो जाता है।
प्र5.
(घ) किन खाद्य पदार्थों को नियमित खाने का सुझाव दिया गया है? i. नमकीन और चिप्स ii. भूँजा और सत्तू iii. बर्फ़ और आइसक्रीम iv. पकौड़े और पराठे
उत्तर

सही उत्तर — ii. भूँजा और सत्तू। इसी के सामने सेब का चित्र बनाइए।

क्यों: कविता कहती है — “भूँजा-सत्तू नियमित खाएँ, वैद्य-हकीम घर न आएँ।” यानी ये चीजें रोज खाने लायक हैं, इसलिए बीमारी पास नहीं आती।
संकेत: बाकी तीनों का नाम कविता में नहीं आया है। कविता उनके बारे में कुछ नहीं कहती, इसलिए वे इस प्रश्न के उत्तर नहीं हैं।
प्र6.
हमें फलों और फूलों के बगीचे क्यों लगाने चाहिए?
उत्तर

बगीचे लगाने से हमें ताजे फल और सुंदर फूल घर पर ही मिल जाते हैं।

  • कविता कहती है — “दूध-दही तुम छककर खाओ, फल-फूलों के बाग लगाओ।”
  • अपने बाग के फल एकदम ताजे होते हैं।
  • फूलों से आँगन सुंदर लगता है और मन खुश रहता है।
  • पेड़-पौधे हवा को साफ रखते हैं और छाया भी देते हैं।
क्यों ज़रूरी है: ताजा फल खाने से शरीर मजबूत बनता है। इसलिए कविता हमें खुद बाग लगाने को कहती है।
प्र7.
हमें भूख से अधिक क्यों नहीं खाना चाहिए?
उत्तर

भूख से अधिक खाने पर बाद में पछताना पड़ता है।

  • कविता कहती है — “पेट से ज्यादा जब कोई खाए, खाकर वह पीछे पछताए।”
  • पेट भारी हो जाता है और बेचैनी लगती है।
  • शरीर सुस्त हो जाता है, खेलने-पढ़ने का मन नहीं करता।
क्यों: पेट में उतनी ही जगह होती है जितनी भूख होती है। उससे ज्यादा खाना पेट पर बोझ बन जाता है। इसलिए जितनी भूख हो, उतना ही खाना चाहिए।
प्र8.
“ताजा खाना हरदम खाओ, नहीं बहाना कभी बनाओ।” इस पंक्ति के माध्यम से क्या संदेश दिया गया है?
उत्तर

इस पंक्ति का संदेश है — हमेशा ताजा बना खाना खाइए और खाने में आनाकानी मत कीजिए।

सरल अर्थ: हरदम का अर्थ है हमेशा। बहाना का अर्थ है टालने के लिए कोई बात कहना। कवि कहते हैं कि ताजा खाना रोज खाओ और “मुझे यह नहीं खाना” — ऐसा बहाना मत बनाओ।

क्यों: ताजा खाना स्वाद में भी अच्छा होता है और शरीर को भी लगता है। बहाना बनाकर खाना छोड़ देने से शरीर को ताकत नहीं मिलती।
प्र9.
भोजन का सेवन किस प्रकार करने की सलाह दी गई है और क्यों?
उत्तर

कविता ढंग से भोजन करने की सलाह देती है।

  • भूख से ज्यादा न खाएँ।
  • ताजा खाना खाएँ।
  • थाली में चावल, दाल, साग-भाजी, दूध-दही, फल और सलाद — सब कुछ रखें।
  • खूब पानी पिएँ।

क्यों — कविता की पंक्ति है, “जब खाते हैं ढंग से खाना, व्याधि को ना मिले बहाना।”

इसका अर्थ: व्याधि यानी बीमारी। ढंग से खाने पर बीमारी को घर आने का मौका ही नहीं मिलता। इसलिए अंत में कवि कहते हैं — “ऐसा हो अपना आहार, खाकर हम ना पड़ें बीमार।”
प्र10.
मिलान कीजिए—
(क) कविता की पहली पंक्ति(ख) दूसरी पंक्ति
पेट से ज्यादा जब कोई खाए,खाकर हम ना पड़ें बीमार।
खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा,इसका है अपना अंदाज।
ऐसा हो अपना आहार,व्याधि को ना मिले बहाना।
भोजन में हो खूब सलाद,खाकर वह पीछे पछताए।
जब खाते हैं ढंग से खाना,गरमी की हरते हैं पीड़ा।
उत्तर

कविता की पंक्तियाँ इस तरह जुड़ती हैं—

पहली पंक्तिसही जोड़
पेट से ज्यादा जब कोई खाए,खाकर वह पीछे पछताए।
खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा,गरमी की हरते हैं पीड़ा।
ऐसा हो अपना आहार,खाकर हम ना पड़ें बीमार।
भोजन में हो खूब सलाद,इसका है अपना अंदाज।
जब खाते हैं ढंग से खाना,व्याधि को ना मिले बहाना।
कैसे मिलाएँ: दोनों पंक्तियों के अंतिम शब्द तुक मिलाते हैं — खाए–पछताए, खीरा–पीड़ा, आहार–बीमार, सलाद–अंदाज, खाना–बहाना। तुक देखकर जोड़ा आसानी से मिल जाता है।
संकेत: पुस्तक में पहला जोड़ा (पेट से ज्यादा जब कोई खाए → खाकर वह पीछे पछताए) पहले से मिलाकर दिखाया गया है।
प्र11.
चित्र में दी गई साग-भाजियों को पहचानिए और उनके नाम नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए—
पृष्ठ 44 पर दिया गया चित्र — बारह साग-भाजियों के पौधे; कुछ की उपज मिट्टी के ऊपर है और कुछ की मिट्टी के नीचे।
उत्तर

चित्र में बारह साग-भाजियाँ हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं—

पंक्तिबाएँ से दाएँ नाम
ऊपर की पंक्तिटमाटर, शिमला मिर्च, आलू, भिंडी, बैंगन
नीचे की पंक्तिकद्दू, चुकंदर, प्याज, गाजर, मूली, लहसुन, पत्तागोभी
पहचान का तरीका: कुछ साग-भाजियाँ मिट्टी के ऊपर लगती हैं — टमाटर, शिमला मिर्च, भिंडी, बैंगन, कद्दू, पत्तागोभी। कुछ मिट्टी के नीचे बनती हैं — आलू, चुकंदर, प्याज, गाजर, मूली, लहसुन। चित्र में मिट्टी की रेखा देखकर यह पहचाना जा सकता है।
संकेत: भिंडी, परवल और नेनुआ के नाम कविता में भी आए हैं। चित्र में भिंडी के पतले हरे फल ऊपर की ओर खड़े दिखते हैं।
प्र12.
नीचे दिए गए कथनों को ‘हाँ जी हाँ’ और ‘ना जी ना’ से पूरा कीजिए— (क) तुम केवल आलू ही लाना, मुझको है बस आलू खाना। (ख) दूध-दही तुम छककर खाना, हरी सब्जियाँ भूल ना जाना। (ग) खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा, खाने पर होती है पीड़ा। (घ) भोजन में हो खूब सलाद, चौबीस घंटे रखना याद। (ङ) ताजा खाना हरदम खाओ, रोग-व्याधि को दूर भगाओ।
उत्तर
कथनउत्तर
(क) तुम केवल आलू ही लाना, मुझको है बस आलू खाना।ना जी ना, ना जी ना
(ख) दूध-दही तुम छककर खाना, हरी सब्जियाँ भूल ना जाना।हाँ जी हाँ, हाँ जी हाँ
(ग) खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा, खाने पर होती है पीड़ा।ना जी ना, ना जी ना
(घ) भोजन में हो खूब सलाद, चौबीस घंटे रखना याद।हाँ जी हाँ, हाँ जी हाँ
(ङ) ताजा खाना हरदम खाओ, रोग-व्याधि को दूर भगाओ।हाँ जी हाँ, हाँ जी हाँ
कारण एक-एक करके:
  • (क) कविता कहती है, “केवल आलू तुम मत लाना।” थाली में कई चीजें होनी चाहिए, इसलिए ‘ना जी ना’।
  • (ख) कविता कहती है, “दूध-दही तुम छककर खाओ।” हरी सब्जी भी ज़रूरी है, इसलिए ‘हाँ जी हाँ’।
  • (ग) कविता कहती है कि ये गरमी की पीड़ा हरते हैं, यानी दूर करते हैं। कथन उलटा है, इसलिए ‘ना जी ना’।
  • (घ) कविता कहती है, “भोजन में हो खूब सलाद।” इसे याद रखना ठीक है, इसलिए ‘हाँ जी हाँ’।
  • (ङ) कविता कहती है, “ताजा खाना हरदम खाओ।” इससे व्याधि दूर रहती है, इसलिए ‘हाँ जी हाँ’।
संकेत: पुस्तक में (क) का उत्तर उदाहरण के रूप में पहले से लिखा है।
क्या यह उपयोगी रहा?