कक्षा ४ हिंदी अध्याय 5 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
खरगोश को ऐसा क्यों लगा कि आसमान गिर रहा है? यदि आप खरगोश के स्थान पर होते तो क्या करते?
उत्तर

खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी जोर की आवाज हुई — धम्म! वह चौंककर उठ गया।

पाठ में लिखा है — “खरगोश ने इधर-उधर देखा। उसे कुछ दिखाई नहीं दिया।” आवाज तो हुई, पर उसका कारण नहीं दिखा। इसी से उसे लगा कि आसमान गिर रहा है।

ऐसा क्यों हुआ: जब आवाज की वजह दिखाई न दे, तब मन अपने आप कोई डरावनी बात सोच लेता है।

यदि मैं खरगोश के स्थान पर होता —

  • मैं पहले रुक जाता। भागता नहीं।
  • मैं ऊपर पेड़ की ओर देखता।
  • फिर जमीन पर देखता कि गिरा क्या है।
  • मुझे वहाँ बड़ा-सा फल दिख जाता। मेरा डर खत्म हो जाता।
संकेत: कहानी के अंत में शेर ने यही किया। उसने पहले देखा, फिर माना।
प्र2.
क्या आपने कभी आसमान से किसी वस्तु को गिरते हुए देखा है? अपने-अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर

यह आपका अपना अनुभव है। इसलिए उत्तर हर बच्चे का अलग होगा। बताते समय तीन बातें जरूर कहिए —

  1. वह चीज क्या थी?
  2. वह कहाँ और कब गिरी?
  3. उस समय आपको कैसा लगा?

नमूना उत्तर: हाँ, मैंने देखा है। पिछली गर्मियों में हमारे आँगन में आम का पेड़ था। एक दिन तेज हवा चली। एक पका आम धम्म से नीचे गिरा। पहले तो मैं डर गया। फिर ऊपर देखा तो समझ आया कि आम गिरा है। मैंने वह आम उठा लिया।

संकेत: ओले, बारिश की बूँदें, पतंग, पत्ते और पक्षी का पंख — ये भी ‘आसमान से गिरने वाली’ चीजें हैं। इनमें से किसी के बारे में भी बताया जा सकता है।
प्र3.
यदि आप शेर के स्थान पर होते तो खरगोश को किस प्रकार समझाते? कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर

समझाने का सबसे अच्छा तरीका है — डाँटना नहीं, बल्कि साथ ले जाकर सच दिखा देना। कहानी में शेर ने भी यही किया। उसने कहा, “चलो, चलकर देखें।”

अच्छे उत्तर में ये बातें होनी चाहिए —

  • पहले खरगोश को शांत कीजिए।
  • फिर उससे प्रश्न पूछिए — क्या गिरा, कहाँ गिरा।
  • फिर उसे उसी जगह ले जाइए।
  • अंत में नियम बताइए — पहले देखो, फिर मानो।

नमूना उत्तर: “खरगोश भाई, डरो मत। रुको और गहरी साँस लो। अब बताओ, तुमने क्या देखा था? कुछ नहीं देखा? केवल आवाज सुनी थी? चलो, हम दोनों उसी पेड़ के नीचे चलते हैं। देखो, यह रहा बड़ा-सा फल! यही धम्म से गिरा था। आसमान नहीं गिरा। अगली बार पहले देख लेना, फिर भागना।”

क्यों: डर केवल बातों से नहीं जाता। जब आँखों से सच दिख जाता है, तब डर अपने आप चला जाता है।
प्र4.
इस कहानी से मिलती-जुलती कोई दूसरी घटना या कहानी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर

ऐसी कहानी चुनिए जिसमें कोई बिना देखे डर जाता हो और फिर सच पता चलने पर सब हँस पड़ते हों।

सुनाते समय यह क्रम रखिए — (1) कौन डरा, (2) किस बात से डरा, (3) सबने क्या किया, (4) सच क्या निकला, (5) क्या सीख मिली।

नमूना उत्तर: हमारे गाँव में रात को एक बार बहुत शोर हुआ। सबने कहा कि खेत में भूत आ गया है। लोग घरों में छिप गए। सुबह किसान चाचा खेत में गए। वहाँ एक बछड़ा रस्सी तोड़कर टिन के डिब्बों से टकरा रहा था। वही आवाज रात को आ रही थी। यह सुनकर सब खूब हँसे।

संकेत: ‘आसमान गिरा’ की तरह यहाँ भी सीख वही है — बिना देखे किसी बात पर यकीन मत कीजिए।
क्या यह उपयोगी रहा?