यह क्या है — जंतर-मंतर एक वेधशाला है। पत्र में लिखा है — “इस वेधशाला का निर्माण राजा सवाई जयसिंह ने किया था।”
यह कैसा होगा — पुस्तक पृष्ठ 73 पर बताती है कि वेधशाला वह स्थान है जहाँ ग्रहों, तारों और नक्षत्रों को देखने के लिए यंत्र रखे जाते हैं। इसलिए जंतर-मंतर में बड़े-बड़े यंत्र होंगे। ये यंत्र खुले में बने होंगे, ताकि आकाश दिखाई दे। अमर लिखता है — “हमने घूम-घूमकर जंतर-मंतर देखा।” इससे लगता है कि यह जगह बहुत बड़ी और खुली होगी, तभी वहाँ घूम-घूमकर देखना पड़ा।