कक्षा ४ हिंदी अध्याय 6 अनुमान और कल्पना के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
निम्नलिखित के बारे में अनुमान लगाइए कि ये क्या और कैसे होंगे? — (क) जंतर-मंतर
उत्तर

यह क्या है — जंतर-मंतर एक वेधशाला है। पत्र में लिखा है — “इस वेधशाला का निर्माण राजा सवाई जयसिंह ने किया था।”

यह कैसा होगा — पुस्तक पृष्ठ 73 पर बताती है कि वेधशाला वह स्थान है जहाँ ग्रहों, तारों और नक्षत्रों को देखने के लिए यंत्र रखे जाते हैं। इसलिए जंतर-मंतर में बड़े-बड़े यंत्र होंगे। ये यंत्र खुले में बने होंगे, ताकि आकाश दिखाई दे। अमर लिखता है — “हमने घूम-घूमकर जंतर-मंतर देखा।” इससे लगता है कि यह जगह बहुत बड़ी और खुली होगी, तभी वहाँ घूम-घूमकर देखना पड़ा।

क्यों: तारों को देखने वाले यंत्र छोटे कमरे में नहीं रखे जा सकते। उन्हें आकाश के सामने खुला रखना पड़ता है।
प्र2.
निम्नलिखित के बारे में अनुमान लगाइए कि ये क्या और कैसे होंगे? — (ख) रामनिवास बाग
उत्तर

यह क्या है — ‘बाग’ का अर्थ है बगीचा। तो रामनिवास बाग जयपुर का एक बड़ा बगीचा होगा।

यह कैसा होगा — उसमें पेड़, फूल और घास होगी। चलने के लिए रास्ते बने होंगे और बैठने के लिए जगह भी होगी। लोग वहाँ घूमने और बैठने आते होंगे। इसी बाग में एक अच्छा कला-संग्रहालय भी है, जैसा अमर ने लिखा है। इसका मतलब है कि बाग इतना बड़ा है कि उसमें एक पूरा भवन भी बना हुआ है।

क्यों: अमर ने लिखा — “इसके बाद हम रामनिवास बाग गए। यहाँ एक अच्छा कला-संग्रहालय है।” छोटे बगीचे में इतना बड़ा संग्रहालय नहीं समा सकता।
प्र3.
निम्नलिखित के बारे में अनुमान लगाइए कि ये क्या और कैसे होंगे? — (ग) शीशमहल
उत्तर

यह क्या है — ‘शीश’ का अर्थ है काँच। तो शीशमहल वह महल होगा जिसमें काँच लगे हों।

यह कैसा होगा — उसकी दीवारों और छत पर छोटे-छोटे काँच जड़े होंगे। दीया या रोशनी जलाने पर ये काँच चमक उठते होंगे। तब पूरा महल जगमगाता दिखता होगा। यह आमेर के दुर्ग के भीतर है और अमर लिखता है कि यह “देखने योग्य है”

क्यों: शब्द के नाम से ही उसका अर्थ पता चल जाता है — शीश + महल = काँच वाला महल। इसी तरह हवा + महल = हवा वाला महल।
प्र4.
निम्नलिखित के बारे में अनुमान लगाइए कि ये क्या और कैसे होंगे? — (घ) हवामहल
उत्तर

यह क्या है — ‘हवा’ और ‘महल’ — दो शब्द मिलकर बने हैं। तो हवामहल वह महल होगा जिसमें खूब हवा आती हो।

यह कैसा होगा — उसमें बहुत-सी खिड़कियाँ और झरोखे होंगे। इन्हीं से हवा आती-जाती होगी, इसलिए भीतर ठंडक रहती होगी। यह जयपुर में है और अमर ने सैर में सबसे पहले इसी को देखा।

क्यों: राजस्थान में गर्मी बहुत पड़ती है। ऐसी जगह हवा आने-जाने वाला भवन बहुत काम का होता है।
संकेत: ये सब अनुमान हैं। अनुमान का अर्थ है — जो हम जानते हैं, उससे सोचकर बताना। इसीलिए यहाँ ‘होगा’, ‘होंगी’ जैसे शब्द आते हैं।
प्र5.
अनुमान लगाकर बताइए कि उदयपुर को झीलों का नगर क्यों कहा जाता है।
उत्तर

क्योंकि उदयपुर में बहुत-सी झीलें होंगी। पत्र में अमर लिखता है — “आज दोपहर पश्चात् हम झीलों के नगर उदयपुर जाएँगे।”

सोचने का तरीका: किसी जगह का नाम अकसर उसी चीज़ पर पड़ता है जो वहाँ सबसे अधिक हो। जिस नगर में एक-दो नहीं, कई झीलें हों, उसे ही लोग ‘झीलों का नगर’ कहने लगते हैं।

क्यों: यदि वहाँ केवल एक झील होती, तो उसे ‘झीलों का नगर’ न कहते। ‘झीलों’ बहुवचन है — इसका अर्थ है कि झीलें बहुत-सी हैं।
ऐसे ही सोचिए: जिस नगर में मंदिर बहुत हों, उसे मंदिरों का नगर कहते हैं। जहाँ बाग बहुत हों, उसे बागों का नगर कहते हैं।
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